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Uterine Fibroids:आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, स्ट्रेस और उल्टा-सीधा खानपान सिर्फ त्वचा या वजन पर ही असर नहीं डाल रहा, बल्कि महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। खासकर एक गंभीर लेकिन अक्सर अनदेखी बीमारी है। फाइब्रॉइड, जिसे मेडिकल भाषा में यूटराइन लियोमायोमा कहा जाता है। ये एक नॉन-कैंसरस गांठ होती है जो महिलाओं के गर्भाशय की मांसपेशियों में बनती है। शहरों में रहने वाली और देर से प्रेग्नेंसी प्लान करने वाली महिलाओं में इसका खतरा सबसे ज़्यादा होता है। परेशानी की बात ये है कि कई बार महिलाएं इसके लक्षणों को पहचान ही नहीं पातीं और इसे आम थकान या पीरियड्स की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देती हैं।
इसीलिए आज हम एक्सपर्ट से जानेंगे कि ये फाइब्रॉइड आखिर होता क्या है, इसके लक्षण क्या हो सकते हैं, ये कितना खतरनाक हो सकता है और इसका इलाज क्या है।
डॉ. बंदना सोढ़ी (Fortis La Femme, Delhi) के मुताबिक "फाइब्रॉइड गर्भाशय की मांसपेशियों में पाई जाने वाली एक नॉन-कैंसरस गांठ होती है, जो कभी-कभी इतनी बड़ी हो जाती है कि यह गर्भधारण और डिलीवरी दोनों में रुकावट पैदा कर सकती है।"