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Published by: Mousumi Dutta | Updated : January 4, 2017 6:34 PM IST
अक्सर लोगों को इस बात की गलतफहमी होती है कि एक बार कैंसर ठीक हो जाने के बाद कुछ महीने तक ही लगातार चेक-अप करवाते रहना चाहिए। लेकिन ये मान्यता बिल्कुल गलत है। ऐसा क्यों इसके बारे में जानने के लिए चलिये कुछ और बातों के बारे में भी जानते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के मरीज़ को सर्जरी करने से पहले उसके पेट और बच्चादानी या गर्भाशय की भी जाँच, सिटिस्कैन, सोनोग्राफी करते हैं ये जानने के लिए कहीं शरीर के दूसरे अंगों में तो कैंसर नहीं फैला है क्योंकि इसके ऊपर मरीज़ का ट्रीटमेंट निर्भर करता है।
यहाँ तक कि कैंसर मरीज़ के ट्रीटमेंट के एक साल बाद उनका मैमोग्राफी और सोनोग्राफी किया जाता है ये पता लगाने के लिए कि कहीं कैंसर सेल का ग्रोथ हुआ है कि नहीं। क्योंकि कभी-कभी ये देखा जाता है कि सर्जरी के पहले जिन अंगों में कैंसर के सेल्स नहीं थे वहाँ भी इसके पनपने की संभावना रहती है। इसलिए उनकी भी जाँच करवानी जरूरी होती है।
शायद आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि एक साल बाद ब्रेस्ट के साथ पेट और बच्चादानी का फिर से जाँच की जाती है क्योंकि विशेष रूप से स्तन और बच्चादानी का एक घनिष्ठ संबंध होता है क्योंकि दोनों का हार्मोन लेवल कॉमन होता है।
क्या आपको पता है कि ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है जिन लोगों के दादा-दादी या नाना-नानी या माँ को कैंसर हुआ है। वैज्ञानिक अनुसंधानों से ये पता चला है कि जिन लोगों के आनुवांशिकता में कैंसर का इतिहास होता है उन लोगों को कैंसर का ज्यादा खतरा होता है।
चित्र स्रोत: Shutterstock
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