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Published by: Nikhil Khattar | Published : November 3, 2022 5:30 PM IST
Heart Disease: महिलाओं के लिए प्रेगनेंसी बहुत विशेष होती हैं। इसलिए इस समय कोई ढिलाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर होने वाले बच्चे के दिल पर पड़ सकता हैं। इससे शिशु और मां दोनों को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं। एक रिपोर्ट में यह सामने आया है की 2018 तक भारत में दो करोड़ बच्चों ने जन्म लिया। जिसमे से 240000 बच्चों में हृदय रोग पाया गया। जिसे हम सीएचडी कहते हैं। जानते हैं कि इस बीमारी से बचने के लिए हम क्या कदम उठा सकते हैं। ताकि आने वाले शिशु तंदुरुस्त पैदा हो सके।
-स्तिथि को जाने - सबसे पहले ओपन हार्ट सीएचडी सर्जरीकी लागत जाने। जिसकी क़ीमत लगभग 3 से 5 लाख रुपये है। जिसका लाभ कुछ लोग ही ले पाते हैं।
-टेस्ट में कमी - नवजात शिशुओं की चिकित्सालय से छुट्टी होने के बाद सीएचडी पल्स ऑक्सीमेट्री परीक्षण कम ही होती हैं। उसे समय रहते ज़रूर करवायें, बिना जांच किए घर न जाएं।
-डॉक्टरों की कमी - भारत की 139 करोड़ से ज़्यादा की जान संख्या हैं। जिसने केवल 300 बच्चों के हृदय के डॉक्टर हैं। जिसका मतलब काबिल कर्मी कम ही हैं। वास्तव में इनकी संख्या ज़्यादा होनी चाहिए जिससे कि शिशुओं का इलाज हो सके।
-चिकित्सा केंद्र की कमी - हमारे भारत में बाल हृदय चिकित्सा केंद्र बहुत कम हैं। लेकिन पिछले पंद्रह सालों में जो भी चिकित्सालय का निर्माण हुआ है वह दक्षिणी भर में ही हैं। पर इसकी ज़रूरत भारत के पूर्वी और मध्य भाग में ज़्यादा हैं, क्योंकि इन राज्यो में जन्म दर अधिक हैं।
-सुविधाओं का अभाव- भारत की 42 करोड़ से अधिक की जनसंख्या स्वास्थ बीमा से वंचित हैं। याने की उन्हें चिकित्सा का लाभ नहीं मिलता। इसके लिए हमे ज़्यादा से ज़्यादा शल्यचिकित्सा और दीर्घकालीन के साथ संस्था स्थापित करनी चाहिए। जिससे लोगों को सही समय पर और बीमा किसी रुकावट के बाल हृदय चिकित्सा मिल सके।