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गठिया का आयुर्वेदिक उपचार: अर्थराइटिस यानी गठिया रोग लोगों की जीवनशैली में कुछ लापरवाही का कारण है। लापरवाही कई प्रकार की हो सकती हैं जैसे-अपने खानपान में लापरवाही, तकनीकी युग में शारीरिक गतिविधियों का कम होना, बदलती जीवनशैली, मोटापा व अन्य कारणों के चलते बुजुर्ग ही नहीं बल्कि नौ जवान भी अर्थराइटिस के शिकार हो रहे हैं। नौ जवानों में यह समस्या जंक फूड व फास्ट फूड जैसे भोजनों के चलते मोटापा बढ़ने के कारण हो रहा है। जहां पहले अर्थराइटिस की समस्या लगभग 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को होती थी वहीं अब 50 साल से कम उम्र के लोगों को भी यह समस्या होती जा रही है। यह समस्या पिछले करीब 10 सालों से युवाओं को अपनी चपेट में ले रही है। अर्थराइटिस बच्चों में भी होता है इसे जुवेनाइल अर्थराइटिस कहा जाता है।
अगर रोगी को अर्थराइटिस यानी गठिया है तो इसमें रोगी को जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाता है। यह रोगी के एक या एक से अधिक जोड़ों में भी हो सकता है, जोड़ों में गांठ बन जाती हैं और सुई चुभने जैसा दर्द होता है। यह दर्द हांथ, कंधों और घुटने के जोड़ों में ज्यादातर रहता जिस कारण उन्हें चल पाने में, हांथ मिलाने या फिर कंधों के द्वारा कुछ भी कार्य करने में बहुत कठिनाई होती है। इस वीडियो में जानिए कैसे आप गठिया के दर्द को इन आयुर्वेदिक नुस्खों से कम कर सकते हैं।