क्या पीरियड्स क्रैम्प्स होना नॉर्मल हैं? जानें मेन्स्ट्रुअल से जुड़े ये मिथ्स

पीरियड्स को लेकर कई मिथ्स लोगों के बीच गहराई से फैले हुए हैं, जिनका साइंस से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन क्या सच में ये बातें सही हैं या सिर्फ बेवजह की गलतफहमियां?

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Published by: Lakshmi Sharma | Published : March 26, 2025 6:16 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Manan Gupta

Periods Myths: पीरियड्स से जुड़ी कई गलतफहमियां पीढ़ियों से चली आ रही हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। एक आम मिथ ये है कि पीरियड्स के दौरान खट्टा खाने से ब्लड फ्लो पर असर पड़ता है या दर्द बढ़ सकता है। लेकिन सच तो ये है कि खट्टे फूड्स, जैसे नींबू, दही या इमली, का पीरियड्स पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ता। इसी तरह, एक और मिथ यह भी है कि पीरियड्स में एक्सरसाइज करने से कमजोरी आती है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, योग या वॉकिंग करने से क्रैम्प्स कम हो सकते हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।

एक और आम धारणा यह है कि पीरियड्स में ऐंठन (क्रैम्प्स) होना पूरी तरह नॉर्मल है। हालांकि हल्के-फुल्के दर्द को सामान्य माना जा सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा तेज दर्द (डिसमेनोरिया) किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है, जैसे एंडोमेट्रियोसिस या पीसीओएस। इसी तरह, यह भी एक मिथ है कि पीरियड्स के दौरान प्रेग्नेंसी संभव नहीं होती। हालांकि पीरियड्स के दिनों में गर्भधारण की संभावना कम होती है, लेकिन यह नामुमकिन नहीं है, खासकर अगर किसी का साइकल अनियमित हो या ओव्यूलेशन जल्दी हो जाए। इसलिए, सही जानकारी होना और इन मिथ्स से बचना बहुत जरूरी है ताकि सेहत से जुड़ी गलतफहमियों को दूर किया जा सके।