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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : December 13, 2019 5:50 PM IST
मौसमी चटर्जी की बेटी पायल सिन्हा का निधन, जुवेनाइल डायबिटीज से थीं पीड़ित, जानें कारण और इलाज.
फिल्म जगत की मशहूर अभिनेत्री मौसमी चटर्जी (Moushumi Chatterjee) की बेटी पायल सिन्हा का बीती रात में निधन हो गया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पायल सिन्हा लंबे समय से हॉस्पिटल में भर्ती थीं. इसके पहले 2018 में पायल सिन्हा जुवेनाइल डायबिटीज (Juvenile Diabetes) की वजह से कोमा में चली गयी थीं. डिक्की सिन्हा (Dicky Sinha) की पत्नी पायल जुवेनाइल डायबिटीज अर्थात टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) की मरीज थीं. डिकी सिन्हा पर पायल सिन्हा की देखभाल में कोताही बरतने का आरोप मौसमी चटर्जी और उनके पती जयंत मुखर्जी (Jayanta Mukherjee) पहले भी लगा चुके हैं. इसके लिए 2018 में मुंबई हाईकोर्ट में भी अपील की थी. अपनी अपील में मौसमी चटर्जी और जयंत मुखर्जी ने कहा था कि पायल के पति डिकी सिन्हा पायल की देखभाल ठीक से नहीं करते हैं. अपनी शिकायत में डाइट, दवा, जांच और फिजियोथेरेपी न कराने का भी उल्लेख किया था. अपनी अपील मौसमी चटर्जी ने जवेलाइल डायबिटीज से पीड़ित बेटी पायल की देखभाल करने की इजाजत मांगी थी.
जब शरीर में इंसुलिन नहीं बनता है तब उसे डायबिटीज कहते हैं. लेकिन जब यह समस्या जन्म के साथ ही रहती है तो इसे जुवेनाइल डायबिटीज कहा जाता है. मेडिकल भाषा में जुवेनाइल डायबिटीज को ही टाइप 1 डायबिटीज कहते हैं.
जो लोग टाइप 1 डायबिटीज के मरीज होते हैं उन्हें इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज रोगी भी कहा जाता है. क्योंकि जुवेनाइल डायबिटीज में रोगी इंसुलिन इंजेक्शन पर ही डिपेंड होता है.
डॉक्टर्स टाइप 1 डायबिटीज या जुवेनाइल डायबिटीज को ऑटो इम्यून डिजीज बताते हैं. जीन में गड़बड़ी होने के कारण जुवेनाइल डायबिटीज होता है. सामान्यतः 18 वर्ष से पहले होने वाले डायबिटीज में टाइप 1 डायबिटीज होने की संभावना ज्यादा होती है.
कुछ लोगों में टाइप-1 डायबिटीज या जुवेनाइल डायबिटीज जन्म के साथ ही होती है. टाइप-1 डायबिटीज को टाइप 2 डायबिटीज की तुलना में ज्यादा खतरनाक माना जाता है. क्योंकि इंसुलिन की कमी की वजह से मरीज कोमा में चला जाता है.
बचपन में होने वाली जुवेनाइल डायबिटीज के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं. अचानक प्यास का बढ़ना, बार-बार यूरिन आना, भूख बहुत लगना इत्यादि जुवेनाइल डायबिटीज के लक्षण होते हैं.
समय रहते लक्षणों की पहचान न की जाए तो मरीज को डायबिटिक कीटोएसिडोसिस हो सकता है. डायबिटिक कीटोएसिडोसिस जानलेवा होता है इसकी वजह से किडनी, हार्ट को बहुत नुकासान होता है.
टाइप 1 डायबिटीज में मरीज इंसुलिन पर निर्भर रहता है. जो लोग जुवेनाइल डायबिटीज के शिकार होते हैं उनको नियमित तौर पर ब्लड शुगर चेक करना होता है. ब्लड शुगर लेवल अधिक होने पर इंसुलिन का इंजेक्शन लेना होता है. जुवेनाइल के मरीज को विशेष देखभाल की जरूरत होती है.
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