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Written By: akhilesh dwivedi | Published : January 21, 2020 6:14 PM IST
Type 1 Diabetes: टाइप 1 डायबिटीज के कारण लक्षण इलाज |TheHealthSite Hindi
डायबिटीज/मधुमेह की बीमारी मुख्य रूप से दो तरह की होती है. वैसे तो डायबिटीज का एक तीसरा प्रकार भी है. टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes), टाइट 2 डायबिटीज और टाइप 1.5 डायबिटीज मुख्य प्रकार हैं. हम यहां पर टाइप 1 डायबिटीज के कारण (Type 1 diabetes causes) पर बात कर रहे हैं. दुनियाभर में डायबिटीज रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. डायबिटीज होने के मुख्य कारणों में जीवनशैली और खान-पान को हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं. कुछ मामलों में यह जेनेटिक कारणों से भी होती है. आइए जानते हैं टाइप 1 डायबिटीज कारण, लक्षण और इलाज (Type 1 diabetes symptoms) के कुछ जरूरी सवाल और उनके जवाब...
टाइप 1 डायबिटीज या जुवेनाइल डायबिटीज पैंक्रियास की बीटा कोशिकाओं (जो इन्सुलिन का स्राव करती हैं) के पूर्ण क्षतिग्रस्त होने के कारण होती है। इसके कारण मांसपेशियों द्वारा ग्लूकोस का उपयोग नहीं हो पता और रक्त में मौजूद ग्लूकोस मूत्रमार्ग से शरीर के बाहर हो जाता है।
अभी तक टाइप 1 डायबिटीज होने के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है. ज्यादातर मामलों में टाइप 1 डायबिटीज अनुवांशिक तौर पर होता है. इसके अलावा जब शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं के खिलाफ एंटीबाडीज बनाने लगता है तब टाइप 1 डायबिटीज होता है. इसके अलावा टाइप 1 डायबिटीज का तीसरा बड़ा कारण वायरस संक्रमण भी हो सकता है.
रक्त शर्करा के स्तर अनुसार नियमित इन्सुलिन इंजेक्शन लेना जिससे यह स्तर सामान्य के निकट बना रहे, यह टाइप 1 डायबिटीज का इलाज है। इसके साथ नियमित आहार और एक्सरसाइज करनी चाहिए। ये भी पढ़ेंः डायबिटीज से जुड़ी पांच गलत बातें जिसे लोग सच मानते हैं।
टाइप 1 डायबिटीज से तात्कालिक और दूरगामी दोनों तरह की समस्याएं होती हैं। त्वरित समस्याओं में, यदि रक्त में ग्लूकोस की मात्रा के अनुसार इन्सुलिन की सही मात्रा का इंजेक्शन ना दिया जाये तो इन्सुलिन के कम स्तर से डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (शरीर में एसिडिक कीटोन बॉडीज का बनना) और अधिक स्तर से हाइपोग्लायसीमिया (रक्त शर्करा की कम मात्रा) हो सकते हैं।
दूरगामी समस्याएं सालों तक रक्त में शर्करा का स्तर लगातार अधिक बने रहने के कारण होती हैं। इसके कारण मूल अंग की क्षति जैसे कि किडनी का फेल होना, डायबिटिक रेटिनोपैथी (आँखों की क्षति), पेरीफेरल और ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी (तंत्रिकाओं को क्षति), डायबिटिक फुट (पैरों को क्षति) और ह्रदय रोग हो सकते हैं।
जी हाँ, आप ऐसा कर सकते हैं बशर्ते आप अपने रक्त में ग्लूकोस की मात्रा के अनुसार सही इन्सुलिन के इंजेक्शन्स लेकर अपने रक्त शर्करा स्तर को सामान्य सीमाओं में रखें और साथ ही उचित आहार लें। समस्याओं पर निगरानी और सुरक्षात्मक चिकित्सा की दृष्टि से नियमित रक्त परीक्षण की सलाह दी जाती है।
टाइप 1 डायबिटीज से बचाव संभव नहीं है क्योंकि रोग का निश्चित कारण पता नहीं लगाया जा सकता। डायबिटीज की बीमारी से बचने के लिए डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं की बेहतर जीवनशैली और संतुलित भोजन बहुत जरूरी होता है.