World Tuberculosis Day 2020 : सभी 75 जिलों में टीबी मरीजों का सैम्पल पहुंचाएंगे डाकिये

राज्य क्षय रोग विभाग और भारतीय डाक विभाग में मंगलवार को 'विश्व क्षय रोग दिवस' (24 मार्च) के मौके पर एक करार किया। इसके तहत अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में टीबी मरीजों का सैम्पल लैब तक पहुंचाने का काम डाकिये करेंगे। इससे पहले यह सैम्पल कुरियर से भेजे जाते थे, जिसमें समय अधिक लगता था।

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Written By: Anshumala | Published : March 24, 2020 7:27 PM IST

World Tuberculosis Day 2020 : राज्य क्षय रोग (Tuberculosis) और डाक विभाग के बीच आज एक करार हुआ, जिससे क्षय रोगियों का सैम्पल 24 घंटे के भीतर 142 सीबीनाट मशीन सेंटर्स तक पहुंच सकेगा। प्रदेश के पांच जिलों में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट में मिली सफलता के बाद यह करार करने का निर्णय लिया गया था। इस करार के बाद प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों से लिया गया सैम्पल तकरीबन 2300 टीबी जांच केन्द्रों तक पहुंच सकेगा।

राज्य क्षय रोग विभाग और भारतीय डाक विभाग में मंगलवार को 'विश्व क्षय रोग दिवस' (24 मार्च) के मौके पर यह करार हुआ। इसके तहत अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में टीबी मरीजों का सैम्पल लैब तक पहुंचाने का काम डाकिये करेंगे। इससे पहले यह सैम्पल कुरियर से भेजे जाते थे, जिसमें समय अधिक लगता था। पायलट प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ समेत प्रदेश के पांच जिलों में पहले चरण में यह कार्यक्रम नौ महीने पहले चलाया गया था। सफलता मिलने के बाद विभाग ने यह बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है।

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इस संबंध में राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ.संतोष गुप्ता का कहना है कि टीबी मरीजों की जांच बड़ी चुनौती है। देर या लापरवाही समाज के लिए घातक है। डाक विभाग से हमारा करार हुआ है। अब प्रदेश के करीब 2300 से अधिक टीबी जांच केन्द्रों से 24 घंटे के अन्दर 142 सीबीनाट मशीन सेंटर तक सैम्पल पहुंचाने का रास्ता आसान किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में प्रदेश में करीब 4़86 लाख मरीजों को चिन्हित कर इलाज शुरू किया गया, जो कि वर्ष 2018 के मुकाबले करीब 19 फीसदी अधिक है। ऐसे मरीजों की खोज के लिए समय-समय पर पूरे प्रदेश में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान चलाये गए। इन अभियानों के जरिए हर बार औसतन करीब 7000 टीबी रोगी खोजे गए, जिनका जल्द से जल्द इलाज शुरू किया गया।

सभी टीबी मरीजों (TB patient) के बेहतर खानपान के लिए इलाज के दौरान प्रतिमाह 500 रुपये दिए जाने की व्यवस्था की गयी है, जिसके तहत करीब 112 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। टीबी मरीजों के एचआईवी ग्रसित होने की अंदेशा अधिक होता है, जिसे देखते हुए वर्ष 2019 में करीब 77 फीसद मरीजों की एचआईवी जाच कराई गयी जो कि पिछले साल के मुकाबले करीब 11 फीसदी अधिक है।