विश्व एड्स दिवस 2017: HIV के मरीज़ों को TB होने का ख़तरा क्यों होता है?

HIV पॉजिटीव लोगों में HIV -नेगेटिव लोगों के मुकाबले TB होने की संभावना 26 से 31 गुना ज्यादा होती है।

विश्व एड्स दिवस 2017: HIV के मरीज़ों को TB होने का ख़तरा क्यों होता है?

Written by Editorial Team |Published : December 1, 2017 7:30 PM IST

भारत में एचआईवी/एड्स और इसके उपचार के बारे में लोगों को बहुत जानकारियां है। लेकिन, कई लोगों को पता नहीं है कि एचआईवी संक्रमित होने के बाद आपके लिए और भी कई इंफेक्शन का ख़तरा बढ़ सकता है। और ऐसा ही एक को-इंफेक्शन है टीबी (tuberculosis-TB) है, जो कि एचआईवी संक्रमण वाले ज्यादातर लोगों में देखा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक एचआईवी पॉजिटीव लोगों में एचआईवी-नेगेटिव लोगों के मुकाबले सक्रिय टीबी होने की संभावना कहीं अधिक (लगभग 26 से 31 गुना ज्यादा) होती है। अगर आप सोच रहे हैं कि एचआईवी पॉजिटिव रोगियों को टीबी को-इंफेक्शन का जोखिम ज़्यादा क्यों हैं, तो आपके इस सवाल का जवाब दे रहे हैं एड्स हेल्थकेयर फाउंडेशन के कंट्री प्रोग्राम डायरेक्टर, डॉ. वी. सैम प्रसाद।

एचआईवी और टीबी को-इंफेक्शन

यह सच है कि एचआईवी संक्रमित लोगों को टीबी होने का डर बहुत ज़्यादा होता है। इसका कारण यह है कि, अगर किसी को एचआईवी संक्रमण है, तो वायरस इम्यूनिटी सिस्टम को कमज़ोर कर देता है, रोगप्रतिरोधक सेल्स पर हमला करता है, जिससे सीडी 4 काउंट (डब्ल्यूबीसी का एक प्रकार जो संक्रमण से लड़ते हैं) गिर जाता है। शरीर में सीडी4 काउंट के आधार पर ये कोशिकाएं एचआईवी मार्कर के रूप में काम करती हैं, और इस तरह यह एचआईवी रोगी में इंफेक्शन की गंभीरता के बारे में जानकारी देते हैं। हालांकि सीडी4 सेल्स का सामान्य स्तर उम्र, भौगोलिक क्षेत्र, आनुवंशिकी और अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

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एचआईवी वायरस इम्यूनिटी कोशिकाओं को मार देता है और जब आपकी रोगप्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है, तो इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। टीबी के जीवाणु निष्क्रिय रहते हैं और जब इम्यूनिटी लेवल में गिरावट होती है और पर्यावरण से जुड़े कारकों भी आपकी मदद नहीं करते, तब ये जीवाणु सक्रिय हो जाते हैं, और इस तरह टीबी का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, जब कम इम्यूनिटी वाले एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति बैक्टीरिया या संक्रमण के संपर्क में आते हैं, तो उस व्यक्ति को संक्रमण जल्दी से हो सकता है।

टीबी एचआईवी रोगियों में सबसे आम को -इंफेक्शन है। दरअसल , यह एक घातक बीमारी है क्योंकि एचआईवी संक्रमित लोग एड्स की तुलना में टीबी से ज़्यादा मरते हैं क्योंकि एड्स धीमी गति से गंभीर होता है जबकि टीबी फेफड़ों और श्वसन तंत्र को पूरी तरह से कमज़ोर बनाकर मरीज़ों की मृत्यु का कारण बनता है। टीबी के लक्षणों या एचआईवी के साथ मिल जाने के बाद, इसे रोकने के लिए सबसे अच्छा तरीका टीबी की जांच कराना है।

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अनुवादक: Sadhana Tiwari.

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चित्रस्रोत:Shutterstock Images.

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