
60+ लोगों में क्यों बढ़ जाता है अल्जाइमर का खतरा, डॉक्टर से जानें बचाव कैसे है संभव?
Alzheimers Risk in 60+ Peoples: 60 साल के बाद अल्जाइमर का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में सोचने और समझने की क्षमता कम हो जाती है।

Alzheimers Risk in 60+ Peoples: 60 साल के बाद अल्जाइमर का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में सोचने और समझने की क्षमता कम हो जाती है।

Alzheimer's Treatment: अल्जाइमर का समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी है। अल्जाइमर रोगी की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है।

अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति की याद्दाश्त भी कम हो जाती है। जानें, किन लोगों को होता है अल्जाइमर का ज्यादा जोखिम?

भूलना एक हद तो ठीक है पर बार-बार कुछ भी भूल जाना और याद न आना ये आपकी भूलने की आदत कहीं बीमारी तो नहीं । अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण क्या हैं, क्या है अल्जाइमर बीमारी, ये आज हम आपको इस लेख में बताएंगे ।

एक नयी स्टडी में कहा गया है कि अल्जाइमर्स का रिस्क कोरोना संक्रमण की वजह से बढ़ सकता है।

World Alzheimer's Day 2022: अल्जाइमर और डिमेंशिया को समझने के लिए उसके लक्षणों को जानना जरूरी होता है, यह दोनों ही बीमारी एक जैसी लगती हैं, मगर इनमें कई असमानताएं हैं।

आज विश्व अल्जाइमर दिवस (World Alzheimer's Day) के दिवस पर आपको बता दें कि अल्जाइमर के लक्षणों को समय पर पहचानकर इलाज और बचाव के तरीके अपनाने चाहिए। मानसिक रूप से आप खुद को व्यस्त रखकर इस बीमारी से बचाव कर सकते हैं।

21 सितंबर को विश्व भर में ''विश्व अल्जाइमर दिवस'' (World Alzheimer’s Day 2021) मनाया जाता है। अल्जाइमर रोग एक दिमाग से संबंधित बीमारी है, जिसका सीधा असर याद्दाश्त पर होता है। यह समस्या होने पर मरीज को कुछ भी ठीक से याद नहीं रहता है। मरीज की याद्दाश्त गंभीर रूप से कम होने लगती है।

''विश्व अल्जाइमर दिवस'' (World Alzheimer’s Day 2021) पर जानें कौन से खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से खाने से आप अल्जाइमर डिजीज से बचे रह सकते हैं।

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, हर 5 सेकेंड में दुनिया भर मे अल्जाइमर का एक नया मामला सामने आ रहा है। करीब 38 मिलियन लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं और आने वाले 10 सालों में इसकी संख्या बढ़कर 76 लाख होने की संभावना है।

World Alzheimer’s Day 2021: आज (21 सितंबर) 'वर्ल्ड अल्जाइमर्स डे' है। अल्जाइमर डिजीज मस्तिष्क से संबंधित एक रोग है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है। यदि आप नहीं चाहते कि कम उम्र में ही आपको ये भूलने की बीमारी हो, तो नियमित रूप से इन 2 योगासन का अभ्यास करना शुरू कर दें।

संगीत से निकलने वाली तरंगे हमारे मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय रखती हैं। बांसुरी, हारमोनियम, गिटार, माउथ ऑर्गन आप कुछ भी बजाना शुरू कर सकते हैं। सीखने के लिए इससे बेहतर उम्र कोई नहीं होगी।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाने और नशा करने की आदत छोड़ने से इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। कई बीमारियां उम्र बढ़ने के साथ ही बुज़ुर्गों के शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख बीमारी बुढ़ापे में भूलने की आदतों (अल्जाइमर्स-डिमेंशिया) की है। इसीलिए इस बीमारी की चपेट में आने से लोगों को बचाने और जागरूकता फैलाने के लिहाज से प्रति वर्ष 21 सितम्बर को विश्व अल्जाइमर्स दिवस(World Alzheimer's Day) मनाया जाता है।

ब्रेन एक्सपर्ट का मानना है कि इससे आपको ब्रेन को सजग और सतर्क रखने में मदद मिलती है। आप अपने आसपास की चीजों के प्रति ज्या दा सतर्क और सजग हो जाते हैं। उन्हें याद रखने की क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है।

सिर्फ बुजुर्गों ही नहीं नौकरीपेशा अधेड़ उम्र लोगों को भी मेमोरी संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे बचने के लिए विशेषज्ञ ध्यान के अभ्यास की सलाह देते हैं।

हल्दी में पाए जाने वाले ‘करक्यूमिन’ में ऑक्सीकरण-रोधी गुण होते हैं। इसे एक संभावित कारण बताया गया है कि भारत में जहां करक्यूमिन आहार में शामिल होता है, बूढ़े-बुजुर्ग अल्जाइमर की चपेट में कम आते हैं। उनकी याददाश्त भी तुलनात्मक रूप से अच्छी होती है।

एशिया में लगातार बढ़ रही है डिमेंशिया ग्रस्त लोगों की संख्या।

अपनाएं ये पांच अच्छी आदतें, जिससे आपको और आपके अपनों को न लगे अल्जा्इमर की नजर!

इसके लिए सावधानियां और व्यायाम ज़रूर हैं, जो इस बीमारी में काफ़ी हद तक नियंत्रण में रखते हैं।

यह विशेष रूप से बुजुर्गो को प्रभावित करता है। इसे सेनाइल डीमेंशिया के नाम से भी जाना जाता है। यह दिमाग की न्यूरोडीजनरेटिव बीमारी है जिसमें मरीज की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है और इसका असर व्यक्ति के मानसिक कार्यो पर भी पड़ता है।

यह बीमारी अब केवल बूढ़ों तक ही सीमित नहीं रही है। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चल सकती है। इस रोग के प्रारंभिक लक्षण याद्दाश्त में कमी, भौतिक वातावरण और भाषा में बाधा आदि है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि आप अलग-थलग रहेंगे, किसी से बात नहीं करेंगे, तो भविष्य में आपके इस रोग से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ सकती है। अधिक लोगों के साथ रहने, उनसे बातचीत करने से इस रोग से बचा जा सकता है।

जानिए अल्जाइमर से पीड़ित लोगों की सही देखभाल क्यों है जरूरी!

Alzheimers Risk in 60+ Peoples: 60 साल के बाद अल्जाइमर का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में सोचने और समझने की क्षमता कम हो जाती है।

Alzheimer's Treatment: अल्जाइमर का समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी है। अल्जाइमर रोगी की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है।

अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति की याद्दाश्त भी कम हो जाती है। जानें, किन लोगों को होता है अल्जाइमर का ज्यादा जोखिम?

भूलना एक हद तो ठीक है पर बार-बार कुछ भी भूल जाना और याद न आना ये आपकी भूलने की आदत कहीं बीमारी तो नहीं । अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण क्या हैं, क्या है अल्जाइमर बीमारी, ये आज हम आपको इस लेख में बताएंगे ।

एक नयी स्टडी में कहा गया है कि अल्जाइमर्स का रिस्क कोरोना संक्रमण की वजह से बढ़ सकता है।

World Alzheimer's Day 2022: अल्जाइमर और डिमेंशिया को समझने के लिए उसके लक्षणों को जानना जरूरी होता है, यह दोनों ही बीमारी एक जैसी लगती हैं, मगर इनमें कई असमानताएं हैं।

आज विश्व अल्जाइमर दिवस (World Alzheimer's Day) के दिवस पर आपको बता दें कि अल्जाइमर के लक्षणों को समय पर पहचानकर इलाज और बचाव के तरीके अपनाने चाहिए। मानसिक रूप से आप खुद को व्यस्त रखकर इस बीमारी से बचाव कर सकते हैं।

21 सितंबर को विश्व भर में ''विश्व अल्जाइमर दिवस'' (World Alzheimer’s Day 2021) मनाया जाता है। अल्जाइमर रोग एक दिमाग से संबंधित बीमारी है, जिसका सीधा असर याद्दाश्त पर होता है। यह समस्या होने पर मरीज को कुछ भी ठीक से याद नहीं रहता है। मरीज की याद्दाश्त गंभीर रूप से कम होने लगती है।

''विश्व अल्जाइमर दिवस'' (World Alzheimer’s Day 2021) पर जानें कौन से खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से खाने से आप अल्जाइमर डिजीज से बचे रह सकते हैं।

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, हर 5 सेकेंड में दुनिया भर मे अल्जाइमर का एक नया मामला सामने आ रहा है। करीब 38 मिलियन लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं और आने वाले 10 सालों में इसकी संख्या बढ़कर 76 लाख होने की संभावना है।

World Alzheimer’s Day 2021: आज (21 सितंबर) 'वर्ल्ड अल्जाइमर्स डे' है। अल्जाइमर डिजीज मस्तिष्क से संबंधित एक रोग है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है। यदि आप नहीं चाहते कि कम उम्र में ही आपको ये भूलने की बीमारी हो, तो नियमित रूप से इन 2 योगासन का अभ्यास करना शुरू कर दें।

संगीत से निकलने वाली तरंगे हमारे मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय रखती हैं। बांसुरी, हारमोनियम, गिटार, माउथ ऑर्गन आप कुछ भी बजाना शुरू कर सकते हैं। सीखने के लिए इससे बेहतर उम्र कोई नहीं होगी।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाने और नशा करने की आदत छोड़ने से इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। कई बीमारियां उम्र बढ़ने के साथ ही बुज़ुर्गों के शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख बीमारी बुढ़ापे में भूलने की आदतों (अल्जाइमर्स-डिमेंशिया) की है। इसीलिए इस बीमारी की चपेट में आने से लोगों को बचाने और जागरूकता फैलाने के लिहाज से प्रति वर्ष 21 सितम्बर को विश्व अल्जाइमर्स दिवस(World Alzheimer's Day) मनाया जाता है।

सिर्फ बुजुर्गों ही नहीं नौकरीपेशा अधेड़ उम्र लोगों को भी मेमोरी संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे बचने के लिए विशेषज्ञ ध्यान के अभ्यास की सलाह देते हैं।

हल्दी में पाए जाने वाले ‘करक्यूमिन’ में ऑक्सीकरण-रोधी गुण होते हैं। इसे एक संभावित कारण बताया गया है कि भारत में जहां करक्यूमिन आहार में शामिल होता है, बूढ़े-बुजुर्ग अल्जाइमर की चपेट में कम आते हैं। उनकी याददाश्त भी तुलनात्मक रूप से अच्छी होती है।

एशिया में लगातार बढ़ रही है डिमेंशिया ग्रस्त लोगों की संख्या।

इसके लिए सावधानियां और व्यायाम ज़रूर हैं, जो इस बीमारी में काफ़ी हद तक नियंत्रण में रखते हैं।

यह विशेष रूप से बुजुर्गो को प्रभावित करता है। इसे सेनाइल डीमेंशिया के नाम से भी जाना जाता है। यह दिमाग की न्यूरोडीजनरेटिव बीमारी है जिसमें मरीज की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है और इसका असर व्यक्ति के मानसिक कार्यो पर भी पड़ता है।

यह बीमारी अब केवल बूढ़ों तक ही सीमित नहीं रही है। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चल सकती है। इस रोग के प्रारंभिक लक्षण याद्दाश्त में कमी, भौतिक वातावरण और भाषा में बाधा आदि है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि आप अलग-थलग रहेंगे, किसी से बात नहीं करेंगे, तो भविष्य में आपके इस रोग से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ सकती है। अधिक लोगों के साथ रहने, उनसे बातचीत करने से इस रोग से बचा जा सकता है।

जानिए अल्जाइमर से पीड़ित लोगों की सही देखभाल क्यों है जरूरी!

ब्रेन एक्सपर्ट का मानना है कि इससे आपको ब्रेन को सजग और सतर्क रखने में मदद मिलती है। आप अपने आसपास की चीजों के प्रति ज्या दा सतर्क और सजग हो जाते हैं। उन्हें याद रखने की क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है।

अपनाएं ये पांच अच्छी आदतें, जिससे आपको और आपके अपनों को न लगे अल्जा्इमर की नजर!