
टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में बढ़ रहा Fatty Liver का खतरा, स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा
Fatty liver in type 1 diabetes: टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में फैटी लिवर की बीमारी, शरीर के मेटाबॉलिज्म में होने वाली समस्या ज्यादा पाई जाती है।

Fatty liver in type 1 diabetes: टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में फैटी लिवर की बीमारी, शरीर के मेटाबॉलिज्म में होने वाली समस्या ज्यादा पाई जाती है।

Is Diabetes Genetic: डायबिटीज एक जेनेटिक बीमारी है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों को माता-पिता से बच्चों डायबिटीज विरासत में मिले।

डायबिटीज अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा और टीनएजर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। बार-बार प्यास लगना और अचानक वजन घटने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज ना करें – ये बढ़ते शुगर लेवल का संकेत हो सकते हैं।

Bachchon mein diabetes ke karan: बच्चों को पोषण देने के लिए खिलाए जाने वाले कुछ हेल्दी फूड्स को उनके लिए नुकसानदायक पाया गया है। कुछ स्टडीज के अनुसार ये हेल्दी फूड्स भी बच्चों में डायबिटीज का रिस्क बढ़ा सकते हैं।

Type 1.5 Diabetes : टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज काफी कॉमन है। लेकिन क्या आप टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानते हैं? आइए जानते हैं क्या हैं इसके लक्षण और कारण?

Diabetes in Children in Hindi: आजकल बच्चों में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आइए, जानते हैं बच्चों में डायबिटीज के लक्षण बचाव के उपाय -

type 1 diabetes: टाइप 2 डायबिटीज के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज के बारे में अभी भी काफी लोगों को पता नहीं है। यह बीमारी उस से भी ज्यादा खतरनाक है, जो बड़ों ज्यादा बच्चों को प्रभावित करती है।

ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के अलावा, बच्चों को कुछ और भी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। ऐसी ही कुछ टिप्स के बारे में पढ़ें यहां।

एक ऐसी अनोखी तकनीक का पता लगाया है। जिससे, जन्म लेने के बाद भी इस बात का पता लगाया जा सकेगा कि नवजात बच्चे को भविष्य में टाइप 1 डायबिटीज़ (Type 1 Diabetes) हो सकता है। जर्नल नेचर मेडिसिन (journal Nature Medicine) में छपे इस शोध के बारे में ऐसा कहा जा रहा है कि, यह नवजात शिशुओं में आजीवन रहने वाली इस परेशानी का पता लगना ज्यादा आसान हो जाता है। एक अमेरिकी एनजीओ जेडीआरएफ से जुड़े और इस स्टडी में हिस्सा ले रहे संजोय दत्ता ने कहा कि, टाइप 1 डायबिटीज़ की स्थिति बनने के लिए जेनेटिक या अनुवांशिक कारण ज़िम्मेदार होते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से नवजात बच्चों में इस बीमारी का पता नहीं लगाया जा सकता।

डायबिटीज दो तरह (Types of Diabetes) की होती है। डायबिटीज टाइप-1 और डायबिटीज टाइप-2 (Type-1 Diabetes and Type-2 Diabetes) । इन दोनों तरह की डायबिटीज में काफी अंतर होता है। जानिए, आखिर दोनों डायबिटीज के बीच क्या होता है खास अंतर...

मौसमी चटर्जी की बेटी पायल सिन्हा जुवेनाइल डाइटबिटीज (Juvenile Diabetes) की मरीज थीं. जवेनाइल डायबिटीज को टाइप 1 डायबिटीज भी कहते हैं. टाइप 1 डायबिटीज में विशेष देखभाल और इलाज की जरूरत होती है. टाइप 1 डायबिटीज रोगी इंसुलिन पर पूरी तरह से निर्भर होता है. जुवेनाइल डायबिटीज की वजह से मौसमी चटर्जी की बेटी पायल एक बार कोमा में भी जा चुकी थीं.

छोटे बच्चों के आहार की शुरूआत अकसर गेहूं से बने व्यंजनों से की जाती है, पर डेनमार्क में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि बचपन में ग्लूटेन का अतिरिक्त सेवन शिशुओं में टाइप 1 डायबिटीज का जोखिम बढ़ा देता है।

एक खास बात और ध्यान में रखनी चाहिए कि बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children) माता-पिता के डायबिटीक होने की वजह से नहीं होती है. बच्चों में डायबिटीज होने का मुख्य कारण ऑटोइम्यून की बीमारी मानी जाती है.

Fatty liver in type 1 diabetes: टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में फैटी लिवर की बीमारी, शरीर के मेटाबॉलिज्म में होने वाली समस्या ज्यादा पाई जाती है।

Is Diabetes Genetic: डायबिटीज एक जेनेटिक बीमारी है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों को माता-पिता से बच्चों डायबिटीज विरासत में मिले।

Type 1.5 Diabetes : टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज काफी कॉमन है। लेकिन क्या आप टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानते हैं? आइए जानते हैं क्या हैं इसके लक्षण और कारण?

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ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के अलावा, बच्चों को कुछ और भी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। ऐसी ही कुछ टिप्स के बारे में पढ़ें यहां।

एक ऐसी अनोखी तकनीक का पता लगाया है। जिससे, जन्म लेने के बाद भी इस बात का पता लगाया जा सकेगा कि नवजात बच्चे को भविष्य में टाइप 1 डायबिटीज़ (Type 1 Diabetes) हो सकता है। जर्नल नेचर मेडिसिन (journal Nature Medicine) में छपे इस शोध के बारे में ऐसा कहा जा रहा है कि, यह नवजात शिशुओं में आजीवन रहने वाली इस परेशानी का पता लगना ज्यादा आसान हो जाता है। एक अमेरिकी एनजीओ जेडीआरएफ से जुड़े और इस स्टडी में हिस्सा ले रहे संजोय दत्ता ने कहा कि, टाइप 1 डायबिटीज़ की स्थिति बनने के लिए जेनेटिक या अनुवांशिक कारण ज़िम्मेदार होते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से नवजात बच्चों में इस बीमारी का पता नहीं लगाया जा सकता।

डायबिटीज दो तरह (Types of Diabetes) की होती है। डायबिटीज टाइप-1 और डायबिटीज टाइप-2 (Type-1 Diabetes and Type-2 Diabetes) । इन दोनों तरह की डायबिटीज में काफी अंतर होता है। जानिए, आखिर दोनों डायबिटीज के बीच क्या होता है खास अंतर...

मौसमी चटर्जी की बेटी पायल सिन्हा जुवेनाइल डाइटबिटीज (Juvenile Diabetes) की मरीज थीं. जवेनाइल डायबिटीज को टाइप 1 डायबिटीज भी कहते हैं. टाइप 1 डायबिटीज में विशेष देखभाल और इलाज की जरूरत होती है. टाइप 1 डायबिटीज रोगी इंसुलिन पर पूरी तरह से निर्भर होता है. जुवेनाइल डायबिटीज की वजह से मौसमी चटर्जी की बेटी पायल एक बार कोमा में भी जा चुकी थीं.

छोटे बच्चों के आहार की शुरूआत अकसर गेहूं से बने व्यंजनों से की जाती है, पर डेनमार्क में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि बचपन में ग्लूटेन का अतिरिक्त सेवन शिशुओं में टाइप 1 डायबिटीज का जोखिम बढ़ा देता है।

एक खास बात और ध्यान में रखनी चाहिए कि बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children) माता-पिता के डायबिटीक होने की वजह से नहीं होती है. बच्चों में डायबिटीज होने का मुख्य कारण ऑटोइम्यून की बीमारी मानी जाती है.