कैंसर रहित ट्यूमर का इलाज नहीं कराने से हो सकते हैं गंभीर परिणाम
एडेमोना सबसे आम प्रकार का नॉन कैंसरस ट्यूमर है जो ग्रंथियों की पतली उपकला परत से उत्पन्न हो सकता है।
एडेमोना सबसे आम प्रकार का नॉन कैंसरस ट्यूमर है जो ग्रंथियों की पतली उपकला परत से उत्पन्न हो सकता है।
60 वर्षीय महिला के शरीर से 35 किलोग्राम वजन का ट्यूमर उसके अोवरी से निकालने में डॉक्टरों को सफलता हासिल हुई है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन नाम का रसायन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में माहिर होता है।
दुर्लभ रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर निकालकर फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने दी मरीज को नयी ज़िंदगी।
अगर इसका इलाज नहीं किया जाता तो इसके कारण शरीर का एक तरफ का हिस्सा लकवाग्रस्त हो जाता।
पहले ब्रेन ट्यूमर के मरीज आम तौर पर तीन-चार महीने ही जीवित रह पाते थे लेकिन आज इलाज के बाद ब्रेन टृयूमर के मरीज 10 साल, 20 साल और यहां तक कि 50 साल तक भी जीवित रहते हैं।
भारत में हर साल 40 से 50 हजार लोगों में ब्रेन ट्यूमर का पता चलता है, जिनमें से 20 प्रतिशत बच्चे हैं।
ब्रिटेन में पता चला और पंचकूला में इलाज हुआ ।
अभिनेता इरफान खान ने इंस्टाग्राम पर शेयर की एक कविता
बच्चों में हो रहे कैंसर होने के संभावना को कैसे करें कम!
पहले ब्रेन ट्यूमर के मरीज आम तौर पर तीन-चार महीने ही जीवित रह पाते थे लेकिन आज इलाज के बाद ब्रेन टृयूमर के मरीज 10 साल, 20 साल और यहां तक कि 50 साल तक भी जीवित रहते हैं।
भारत में हर साल 40 से 50 हजार लोगों में ब्रेन ट्यूमर का पता चलता है, जिनमें से 20 प्रतिशत बच्चे हैं।
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