अब नहीं होगी देरी: नई टेस्टिंग किट से जल्दी पकड़ी जाएगी टीबी की बीमारी, WHO का दावा
पहले टीबी की जांच के लिए बलगम का सैंपल लिया जाता था। अब जीभ के स्वाब से टीबी की जांच हो सकती है। इसका रिल्जट भी एक घंटे के भीतर आ जाता है।
पहले टीबी की जांच के लिए बलगम का सैंपल लिया जाता था। अब जीभ के स्वाब से टीबी की जांच हो सकती है। इसका रिल्जट भी एक घंटे के भीतर आ जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अगले कुछ सालों में टीबी की वैक्सीन आ सकती है। इससे दुनियाभर में टीबी के मामलों में काफी कमी देखने को मिल सकती है।
टीबी की बीमारी सिर्फ फेफड़ों को प्रभावित नहीं करती है। यह शरीर के कई अन्य अंगों में भी हो सकता है। जानें, किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज!
आइए आपको बताते हैं टीबी से जुड़ी कुछ आम गलत अवधारणाओं के बारे में, जिनपर लोग बहुत जल्दी विश्वास कर लेते हैं।
जब एक संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो उसके पास मौजूद असंक्रमित व्यक्ति को भी टीबी होने का खतरा रहता है क्योंकि ये हवा में फैलता है।
पहले टीबी की जांच के लिए बलगम का सैंपल लिया जाता था। अब जीभ के स्वाब से टीबी की जांच हो सकती है। इसका रिल्जट भी एक घंटे के भीतर आ जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अगले कुछ सालों में टीबी की वैक्सीन आ सकती है। इससे दुनियाभर में टीबी के मामलों में काफी कमी देखने को मिल सकती है।
टीबी की बीमारी सिर्फ फेफड़ों को प्रभावित नहीं करती है। यह शरीर के कई अन्य अंगों में भी हो सकता है। जानें, किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज!
आइए आपको बताते हैं टीबी से जुड़ी कुछ आम गलत अवधारणाओं के बारे में, जिनपर लोग बहुत जल्दी विश्वास कर लेते हैं।
जब एक संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो उसके पास मौजूद असंक्रमित व्यक्ति को भी टीबी होने का खतरा रहता है क्योंकि ये हवा में फैलता है।