कोरोना से ठीक होने के बाद पाचन संबंधी समस्या
Post Covid Complications: लोगों में कोविड से ठीक होने के बाद कई ऐसे लक्षण मिल रहे हैं जैसे कि सूजन, गैस, एसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स या कब्ज आदि। इनकी वजह को जानना जरूरी है।
Post Covid Complications: लोगों में कोविड से ठीक होने के बाद कई ऐसे लक्षण मिल रहे हैं जैसे कि सूजन, गैस, एसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स या कब्ज आदि। इनकी वजह को जानना जरूरी है।
Stomach Bloating: आमतौर पर कई लोगों को पेट में गैस इकट्ठा होने की समस्या होती है, जिसे ब्लोटिंग कहते हैं। अक्सर लोग इस समस्या से जूझते ही हैं। इसके उपचार के लिए आप आयुर्वेदिक उपाय आजमा सकते हैं।
Stomach Infection Home Remedies: पेट संबंधी समस्याएं आपके डेली रूटीन को प्रभावित कर सकती हैं। सर्दियों में पेट दर्द, गैस, अपच और डिहाइड्रेशन से छुटकारा पाने के लिए इन घरेलू उपायों को आजमाएं।
हमारे पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और पेट फूलने जैसी स्थति को रोकने के लिए हर्बल काढ़ा बेहद फायदेमंद माना जाता है। इस हर्बल काढ़े से न सिर्फ हमारा पेट का स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि पेट से जुड़ी कई बीमारियां भी दूर होती हैं। आइए जानते हैं पेट फूलने से बचने के लिए पिएं जाने वाले हर्बल काढ़े के बारे में।
जब पेट खाली होता है तो भोजन का सेवन बहुत सोच समझकर करना चाहिए। कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें खाली पेट खाने से जबरदस्त लाभ मिलता है, जबकि कुछ चीजों का सेवन खाली पेट करने से नुकसान होता है। आज हम आपको कुछ ऐसी चीजें बता रहे हैं जिनका सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए।
पेट दर्द की समस्या आम समस्याओं में से एक है। गलत खानपान के चलते या फिर दिनचर्या में बदलाव के कारण पेट दर्द (Stomach pain) और एसिडिटी जैसी समस्या होने लगती है। इस परेशानी को दूर करने के लिए बहुत से लोग एलोपैथी दवाईयां खाते हैं।
Stomach Ulcer Symptoms : स्टमक अल्सर आमतौर पर पेट के अंदर होने वाले घाव हैं, जिनमें दर्द भी महसूस होता है। इससे पेट में गम्भीर दर्द होता है। यही नहीं, आगे चलकर यह समस्या गम्भीर रूप ले लेती है और इंस्टेटाइनल कैंसर की वजह भी बनता है।
इसके अलावा कमज़ोर पाचन तंत्र और किसी प्रकार की एलर्जी होने पर भी लोगों को पेट दर्द की शिकायत होती है। अपने पेट दर्द के सही कारण का पता लगाएं और उसकी गम्भीरता के अनुसार डॉक्टर से मदद भी लें।
बच्चों की कमज़ोर पाचन तंत्र के लिए नैचुरल तरीके इस्तेमाल करना सही है।
एब्डॉमिनल माइग्रेन (Abdominal Migraine) पेट में होने वाले माइग्रेन को कहते हैं। यह माइग्रेन बड़ों की अपेक्षा बच्चों में अधिक होता है। जानें, बच्चों में होने वाले एब्डॉमिनल माइग्रेन के लक्षण, कारण और इलाज।
यह साइलेंट किलर के रूप में धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और शरीर के आंतरिक अंगों जैसे बड़ी आंत, मलाशय, भोजन की नली, पेट, गुर्दे, पित्ताशय की थैली, पैनक्रियाज या पाचक ग्रंथि, छोटी आंत, अपेंडिक्स और गुदा को प्रभावित करता है।
इलायची के सेवन से आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करने वाली कई समस्याओं को कम किया जा सकता है।
पेप्टिक अल्सर ऐसे घाव होते हैं जो पेट की अस्तर या अंदरूनी परत, ग्रासनली के निचले भाग या छोटी आंत में विकसित होते हैं। ऐसा तब होता है, जब पेट के अम्ल आपके पाचन तंत्र की सुरक्षात्मक परत श्लेष्म को नष्ट कर देता है।
बच्चे को हो गया है कब्ज, आजमाएं ये घरेलू नुस्खे
जरूर खाएं हेल्दी 'जामुन मिंट पॉपसिकल'
अगर आप इसके लक्षणों को ठीक से पहचान लें तो आप काफी हद तक अपना बचाव कर सकते हैं।
नाभि के खिसकने का मुख्य कारण भारी वजन उठाना, वजन लेकर झुकना, दुर्घटना आदि में अंगों का अचानक खिंचाव आदि है।
अगर गर्भावस्था के दौरान वजन अचानक से घटने लगता है। यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो आपको सचेत हो जाना चाहिए, क्योंकि यह गर्भपात के लक्षणों में से एक है।
ये सभी चीज़ें आपके किचन में आसानी से मिल जाती हैं।
60 वर्षीय महिला के शरीर से 35 किलोग्राम वजन का ट्यूमर उसके अोवरी से निकालने में डॉक्टरों को सफलता हासिल हुई है।
भुट्टा खाने के लगभग 45 मिनट पहले और खाने के 45 मिनट बाद ही पानी पिएं।
घरेलू नुस्खे बहुत असरदार होते हैं और उनका कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं होता। इन घरेलू नुस्खों से आप फूड प्वाइजनिंग से भी बच सकते हैं।
आप दूध के साथ बासी रोटी खाएंगे, तो आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहेगा।
पेट के निचले भाग में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं। उसमें से सबसे सामान्य कारणों में से एक है पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम।
अगर गर्भावस्था के दौरान वजन अचानक से घटने लगता है। यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो आपको सचेत हो जाना चाहिए, क्योंकि यह गर्भपात के लक्षणों में से एक है।
60 वर्षीय महिला के शरीर से 35 किलोग्राम वजन का ट्यूमर उसके अोवरी से निकालने में डॉक्टरों को सफलता हासिल हुई है।
भुट्टा खाने के लगभग 45 मिनट पहले और खाने के 45 मिनट बाद ही पानी पिएं।
घरेलू नुस्खे बहुत असरदार होते हैं और उनका कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं होता। इन घरेलू नुस्खों से आप फूड प्वाइजनिंग से भी बच सकते हैं।
आप दूध के साथ बासी रोटी खाएंगे, तो आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहेगा।
पेट के निचले भाग में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं। उसमें से सबसे सामान्य कारणों में से एक है पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम।
बच्चों में मिट्टी खाने की आदत लाइलाज नहीं है, लेकिन पहले उसकी तह में जाना होगा कि वह मिट्टी क्यों खाता है।
साफ-सफाई का जितना ध्यान रखेंगे, फूड प्वाइजनिंग होने का खतरा उतना ही कम होता जाएगा।
पीरियड्स के समय ब्लड प्रेशर चेक कराएं और डॉक्टर से खानपान से जुड़ी जानकारी लें।
सौंफ में मौजूद तत्व पेट की गैस कम करने और पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करते हैं।
कहीं आपका बच्चा बार-बार इसलिए तो नहीं रोता है!