
महाराष्ट्र में छोटे बच्चों के स्कूलों को 9 बजे से शुरू करने का आदेश, बच्चों की हेल्थ से जुड़ी इस वजह से लिया गया यह फैसला
मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र राज्य सरकार ने यह निर्णय लेने से पहले, स्कूल के समय परिवर्तन प्रस्ताव पर एक सर्वे भी कराया।

मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र राज्य सरकार ने यह निर्णय लेने से पहले, स्कूल के समय परिवर्तन प्रस्ताव पर एक सर्वे भी कराया।

अगर आपके बच्चे के साथ भी ऐसी ही समस्या है तो आप ये तरीके अपनाएं और अपने बच्चे को ये स्किल्स सिखाएं।

बच्चे जब पहली बार स्कूल जाते हैं तो उन्हें कुछ ऐसी बातें जरूर सीखानी चाहिए जो स्कूल में उन्हें एडजस्ट होने और खुद को सेफ रखने में मदद करें। यहां पढ़ें कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में जो स्कूल जाने से पहले बच्चों को जरूरी सीखनी चाहिए।

अगर आप अपने बच्चे को समय के साथ उनकी सेफ्टी से जुड़ी ये बातें समझाते जाएं तो इससे बच्चे भी खुद का बेहतर ख्याल रख सकते हैं और आपकी चिंता भी कम होती है।

बच्चे अक्सर डर जाते हैं कि कहीं उनके टीचर ने उनकी शिकायत के लिए तो माता-पिता को स्कूल नहीं बुलाया और मीटिंग के बाद उन्हें और डांट तो नहीं पड़ेगी। ऐसे में बच्चे इस बात से कतराते हैं कि उनके मां-बाप स्कूल की पेरेंट्स टीचर मीटिंग में जाएं ।

माता-पिता को इस बात को नजरअंदाज ना करते हुए बच्चे के ऐसे व्यवहार का कारण समझने की कोशिश करनी चाहिए

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नोरोवायरस दूषित खाने और पानी से फैलता है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि नोरोवायरस आमतौर पर दो दिनों तक रहता है, लेकिन इसका अधिक प्रभाव नहीं होता है।

इन गाइडलाइंस में स्कूलों की टाइमिंग्स बदलने और बच्चों के लिए स्कूल में प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के लिए ज़रूरी इंतजाम करने की सलाह दी है। (New Guidelines For Schools Amid Heatwave )

झारखंड में पिछले दो दिनों में 11 स्टुडेंट्स के कोविड पॉजिटिव पाए जाने की खबर मिली है। ये सभी छात्राएं एक ही स्कूल से हैं। छात्राओं के कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद स्कूल और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।

एक नये सर्वे के अनुसार, लगभग 12.8 फीसदी मामलों में, बच्चों में पाए जाने वाली कान की बीमारी की वजह उनके कान में अत्यधिक ईयरवैक्स जमा होने की स्थिति ही थाी। (Excessive Earwax Health Hazards)

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने कहा है कि, स्कूलों में बच्चों को अनिवार्य रुप से मास्क पहनने के नियम से उनमें कोविड -19 संक्रमण के प्रसार की संभावना कम हुई है। (Covid-19 Infection Among Children)

एक हालिया स्टडी में कहा गया कि बच्चों से कोविड-19 संक्रमण एक-दूसरे तक नहीं फैलता। इस स्टडी में कहा गया कि, कोविड-19 संक्रमित एक लड़के के सम्पर्क में उसके साथ पढ़ने वाले 80 बच्चे आए। लेकिन, उनमें से किसी को भी संक्रमण नहीं हुआ। अब इसी बात को आधार बनाते हुए, यूरोप के कई देशों और जापान में स्कूल खुलने लगे हैं।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा हाल ही में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए एक निर्देश के बाद यह निर्णय लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि विटामिन डी की कमी से होने वाली बीमारियों, जैसे रिकेट्स से निपटने के लिए सूर्य की रोशनी में अधिक से अधिर शारीरिक गतिविधियों का आयोजन किया जाए।

भारी बैग के चलते बच्चों को रीढ़ की हड्डी के नुकसान के साथ-साथ फेफड़ों की समस्याएं होने की संभावनाएं भी होती हैं और इससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं।

मेघालय में नौ महीने और 15 वर्ष की उम्र के 13 लाख बच्चों में लगभग 4 लाख बच्चों को खसरा और रूबेला का टीका लगाया गया है।

दमे से पीड़ित बच्चे स्कूल में स्वस्थ्य, खुशहाल और सक्रिय जीवन बिता सकते हैं : डॉ. हर्षवर्धन।

एडीएचडी पीड़ित बच्चों की यूं मदद कर सकते हैं स्कूल।

एक्सपर्ट से जानें जब बच्चा बीमार हो तो कैसे समझें कि उसे स्कूल भेजना है या नहीं?

क्रिकेट से लेकर पढ़ाई और डांस से लेकर स्विमिंग। बच्चे को आल-राउंडर बनने की बजाय वह करने के लिए कहें जो उसे पसंद है।

अगर स्टील का बॉक्स ले रही हैं तो सिलिकॉन लिड या ढक्कनवाला ही लें ताकि वह एयर-टाइट और लीक प्रूफ रहे।

मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र राज्य सरकार ने यह निर्णय लेने से पहले, स्कूल के समय परिवर्तन प्रस्ताव पर एक सर्वे भी कराया।

अगर आपके बच्चे के साथ भी ऐसी ही समस्या है तो आप ये तरीके अपनाएं और अपने बच्चे को ये स्किल्स सिखाएं।

अगर आप अपने बच्चे को समय के साथ उनकी सेफ्टी से जुड़ी ये बातें समझाते जाएं तो इससे बच्चे भी खुद का बेहतर ख्याल रख सकते हैं और आपकी चिंता भी कम होती है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नोरोवायरस दूषित खाने और पानी से फैलता है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि नोरोवायरस आमतौर पर दो दिनों तक रहता है, लेकिन इसका अधिक प्रभाव नहीं होता है।

इन गाइडलाइंस में स्कूलों की टाइमिंग्स बदलने और बच्चों के लिए स्कूल में प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के लिए ज़रूरी इंतजाम करने की सलाह दी है। (New Guidelines For Schools Amid Heatwave )

झारखंड में पिछले दो दिनों में 11 स्टुडेंट्स के कोविड पॉजिटिव पाए जाने की खबर मिली है। ये सभी छात्राएं एक ही स्कूल से हैं। छात्राओं के कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद स्कूल और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।

एक नये सर्वे के अनुसार, लगभग 12.8 फीसदी मामलों में, बच्चों में पाए जाने वाली कान की बीमारी की वजह उनके कान में अत्यधिक ईयरवैक्स जमा होने की स्थिति ही थाी। (Excessive Earwax Health Hazards)

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने कहा है कि, स्कूलों में बच्चों को अनिवार्य रुप से मास्क पहनने के नियम से उनमें कोविड -19 संक्रमण के प्रसार की संभावना कम हुई है। (Covid-19 Infection Among Children)

एक हालिया स्टडी में कहा गया कि बच्चों से कोविड-19 संक्रमण एक-दूसरे तक नहीं फैलता। इस स्टडी में कहा गया कि, कोविड-19 संक्रमित एक लड़के के सम्पर्क में उसके साथ पढ़ने वाले 80 बच्चे आए। लेकिन, उनमें से किसी को भी संक्रमण नहीं हुआ। अब इसी बात को आधार बनाते हुए, यूरोप के कई देशों और जापान में स्कूल खुलने लगे हैं।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा हाल ही में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए एक निर्देश के बाद यह निर्णय लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि विटामिन डी की कमी से होने वाली बीमारियों, जैसे रिकेट्स से निपटने के लिए सूर्य की रोशनी में अधिक से अधिर शारीरिक गतिविधियों का आयोजन किया जाए।

भारी बैग के चलते बच्चों को रीढ़ की हड्डी के नुकसान के साथ-साथ फेफड़ों की समस्याएं होने की संभावनाएं भी होती हैं और इससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं।

मेघालय में नौ महीने और 15 वर्ष की उम्र के 13 लाख बच्चों में लगभग 4 लाख बच्चों को खसरा और रूबेला का टीका लगाया गया है।

दमे से पीड़ित बच्चे स्कूल में स्वस्थ्य, खुशहाल और सक्रिय जीवन बिता सकते हैं : डॉ. हर्षवर्धन।

एडीएचडी पीड़ित बच्चों की यूं मदद कर सकते हैं स्कूल।

एक्सपर्ट से जानें जब बच्चा बीमार हो तो कैसे समझें कि उसे स्कूल भेजना है या नहीं?

क्रिकेट से लेकर पढ़ाई और डांस से लेकर स्विमिंग। बच्चे को आल-राउंडर बनने की बजाय वह करने के लिए कहें जो उसे पसंद है।

अगर स्टील का बॉक्स ले रही हैं तो सिलिकॉन लिड या ढक्कनवाला ही लें ताकि वह एयर-टाइट और लीक प्रूफ रहे।

बच्चे अक्सर डर जाते हैं कि कहीं उनके टीचर ने उनकी शिकायत के लिए तो माता-पिता को स्कूल नहीं बुलाया और मीटिंग के बाद उन्हें और डांट तो नहीं पड़ेगी। ऐसे में बच्चे इस बात से कतराते हैं कि उनके मां-बाप स्कूल की पेरेंट्स टीचर मीटिंग में जाएं ।

माता-पिता को इस बात को नजरअंदाज ना करते हुए बच्चे के ऐसे व्यवहार का कारण समझने की कोशिश करनी चाहिए