Video: मानसून में होने वाली इन 5 बीमारियों से रहें सावधान, जानिए बचाव और उपचार
अगर आप बारिश के मौसम में होने वाली बीमारियों से खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो यह वीडियो जरूर देखें.
अगर आप बारिश के मौसम में होने वाली बीमारियों से खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो यह वीडियो जरूर देखें.
महाराष्ट्र कोविड टास्क फोर्स के डॉक्टरों ने बरसात से पहले सभी बच्चों को इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाने की सलाह दी। (Influenza Vaccine for children)
कोविड-19 महामारी (Covid-19 pandemic) ने जहां इस वर्ष भारत में इतनी तबाही मचाई है, वहीं एक अच्छी खबर ये है कि इस वर्ष मानसून सीजन में दिल्ली में टाइफॉइड (Typhoid) और इन्फ्लूएंजा या फ्लू (Influenza) के मामलों में भारी कमी देखी गई है। इस वर्ष दिल्ली के हॉस्पिटल में इन दोनों मौसमी बीमारियों (Seasonal Diseases) के कम से कम 50 प्रतिशत कम मामले आए हैं।
बरसात में दूषित पीने की वजह से भी कई प्रकार की बीमारियां इस मौसम में होने लगती हैं। इन बीमारियां से पीड़ित लोगों को दवाइयों के साथ कुछ घरेलू नुस्खों का भी सेवन करना चाहिए। (Home Remedies for Monsoon Diseases) जिनके बारे में हम लिख रहे हैं यहां-
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, पिछले साल दिल्ली के दो करोड़ लोगों ने मिल कर डेंगू को हरा कर दिखाया था। इस बार भी हमें मिल कर डेंगू को हराना है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों, आरब्डल्यूए समेत दिल्ली में रहने वाले सभी लोगों से ''10 हफ्ते, 10 बजे, 10 मिनट अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील की।
बिहार में बाढ़ (Bihar flood) आने के बाद वहां के प्रभावित इलाकों में नदियों का पानी कम तो हो गया है, लेकिन लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। कई इलाकों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। लोगों को अब कोरोना (Coronavirus) सहित अन्य बीमारियों का डर सताने लगा है।
कई बार दाल, बीन्स जैसी चीज़ों के सेवन के बाद हल्का नशा-जैसा महसूस होता है। यह समस्या भी फूड पॉयजनिंग का ही एक प्रकार है। दरअसल, अनाज में मौजूद कुछ सूक्ष्म बैक्टेरिया भोजन को जहरीला बना देते हैं। क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम और बैकिल्लुस सेरेउस नामक सूक्ष्म जीव आमतौर पर फूड पॉयजनिंग की समस्या को बढ़ाते हैं। ऐसे में, खुद को सुरक्षित रखने और इस समस्या से बचने के लिए आप कुछ उपाय खुद भी कर सकते हैं।
इस साल मानसून के साथ ही कोरोनोवायरस भी चरम पर है। एक ओर जहां मानसून के मौसम में कई तरह के संक्रमण होने का खतरा रहता है वहीं वर्तमान में कोरोना मामलों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। बरसात के मौसम में साफ सफाई के अभाव और गंदगी के संपर्क में आने से व्यक्ति कई तरह के संक्रमण का शिकार हो सकता है। आज हम आपको 5 ऐसे मुख्य संक्रमण बता रहे हैं जिनके होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
बरसात के मौसम में फ्लू की समस्या काफी आम है। इस बरसात में कोरोना वायरस की वजह से फ्लू होने पर सावधान रहने की ज़्यादा ज़रूरत है। क्योंकि, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक फ्लू कोविड-19 इंफेक्शन का एक प्रमुख लक्षण (Symptoms of Common Flu) हो सकता है। ऐसे में खुद को फ्लू से बचाने और फ्लू होने पर जल्द से जल्द ठीक होने के लिए आप घरेलू स्तर पर ये उपाय कर सकते हैं।
बरसात के मौसम में कई तरह का स्किन इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। जिसमें शरीर में दाने, खुजली, फोड़े-फंसी और स्कैल्प का रुखापन शामिल है। लेकिन इन सब से परे बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण सर्वाधिक परेशानी का सबब बनते हैं।
Do's and Don'ts in Rainy Season: बारिश के सीजन में वायरल फीवर, खांसी-जुकाम होना बहुत कॉमन है। आप हेल्दी रहकर इस मौसम का मजा लेना चाहते हैं, तो कुछ मॉनसून टिप्स (tips for monsoon season) को फॉलो करें। ये टिप्स और 10 डूज एंड डोंट्स आपको रेनी सीजन में फिट और हेल्दी रखने के लिए काफी हैं।
आपने जिमिकंद या सूरन तो खूब खाया होगा, लेकिन कभी बैंगनी रंग का जिमिकंद खाया है? बारिश के मौसम में पर्पल जिमिकंद खाना काफी हेल्दी होता है। इसके सेवन से आप मानसून में होने वाली बीमारियों के साथ-साथ कई अन्य रोगों से भी बचे रह सकते हैं।
मानसून में बढ़ जाता है डायरिया का खतरा
मौसम विभाग द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को कोलाबा में 13 सेमी बरसात रिकॉर्ड की गयी, तो वहीं सांताक्रूज़ में 21.01 सेमी वर्षा रिकॉर्ड की गयी। इतनी भारी बारिश से शहर में जलभराव की स्थिति बन गयी है। इस पानी के जमाव से ना केवल असुविधा होती है। बल्कि, कई तरह की बीमारियों का ख़तरा भी उत्पन्न होता है।
मानसून यानि कि बरसात के मौसम में कई तरह की बीमारियां जन्म लेती हैं जिनका मुख्य स्त्रोत मच्छर, मकड़ियों और मक्खियों समेत अन्य अन्य कीड़े होते हैं। इसलिए, वेक्टर जनित बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि के खतरे को दूर करने के लिए प्रभावी तरीकों की तलाश करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
अभिनेत्री पायल घोष ने 'सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर' पर कुछ बातें शेयर की हैं। वह कहती हैं कि मानसून सीजन के दौरान अधिकतर लोग उदास और चिंतित महसूस करने लगते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है और क्या है सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर, जानें यहां...
दिल्ली में इस साल मलेरिया के 83 और डेंगू के 34 मामले दर्ज हुए और 48,039 घरों में मच्छर पाए गए।
Vitamin C का सेवन हेल्दी होता है. इसके अलावा हेल्दी शरीर के लिए विटामिन सी जरूरी होती है. Vitamin C वाले फूड बरसात के मौसम ज्यादा जरूरी होते हैं.
मॉनसूनी बीमारियों से बचाने में तुलसी के पत्तों को लाभदायक माना जाता है। पर अगर आप अपनी इम्यूनिटी बढ़ाना चाहत हैं, तो आपको तुलसी के पत्तों के सेवन में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
मानसून के मौसम में नमी अधिक होती है, जिसमें बैक्टीरिया को तेजी से पनपने का मौका मिल जाता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में मूत्रमार्ग (UTI in Women) संबंधित संक्रमण यानी यूटीआई अधिक होता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि महिलाओं का मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में छोटा होता है।
बरसात में कीड़े-मकोड़ों का भी ब्रीडिंग सीजन होता है। वे जानबूझ कर किसी को नहीं काटते, बल्कि हाथ या पांव गलती से उन पर पड़ जाने पर वे अपनी रक्षा में दूसरों पर हमला करते हैं। बरसाती कीड़ों का डंक अंदर रह जाए तो खुजली, जलन या सूजन हो जाती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार महामारी विज्ञान की मानें तो एक साल पहले की तुलना में डेंगू के मामलों में 55% का इजाफा हुआ है। इससे अब तक 720 लोग मारे गए हैं।
कुछ बीमारियां तो ऐसी हैं, जिनका तुरंत पता भी नहीं चलता है। जबकि कुछ जानलेवा भी साबित होती हैं। डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बचना है तो आपको इन स्मार्ट टिप्स को फॉलो करना चाहिए।
मानसून के दिनों में पानी से फैलने वाली बीमारियों के इलाज के लिए अक्सर लोग डाॅक्टर की सलाह के बिना एंटी-बायोटिक दवाओं का गलत इस्तेमाल करते हैं। ऐसा करने से आप अन्य बीमारियों के लिए अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, क्योंकि इससे शरीर में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में पानी से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों को पहचान कर उनका उचित इलाज जरूरी है।
इस साल मानसून के साथ ही कोरोनोवायरस भी चरम पर है। एक ओर जहां मानसून के मौसम में कई तरह के संक्रमण होने का खतरा रहता है वहीं वर्तमान में कोरोना मामलों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। बरसात के मौसम में साफ सफाई के अभाव और गंदगी के संपर्क में आने से व्यक्ति कई तरह के संक्रमण का शिकार हो सकता है। आज हम आपको 5 ऐसे मुख्य संक्रमण बता रहे हैं जिनके होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
बरसात के मौसम में फ्लू की समस्या काफी आम है। इस बरसात में कोरोना वायरस की वजह से फ्लू होने पर सावधान रहने की ज़्यादा ज़रूरत है। क्योंकि, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक फ्लू कोविड-19 इंफेक्शन का एक प्रमुख लक्षण (Symptoms of Common Flu) हो सकता है। ऐसे में खुद को फ्लू से बचाने और फ्लू होने पर जल्द से जल्द ठीक होने के लिए आप घरेलू स्तर पर ये उपाय कर सकते हैं।
बरसात के मौसम में कई तरह का स्किन इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। जिसमें शरीर में दाने, खुजली, फोड़े-फंसी और स्कैल्प का रुखापन शामिल है। लेकिन इन सब से परे बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण सर्वाधिक परेशानी का सबब बनते हैं।
Do's and Don'ts in Rainy Season: बारिश के सीजन में वायरल फीवर, खांसी-जुकाम होना बहुत कॉमन है। आप हेल्दी रहकर इस मौसम का मजा लेना चाहते हैं, तो कुछ मॉनसून टिप्स (tips for monsoon season) को फॉलो करें। ये टिप्स और 10 डूज एंड डोंट्स आपको रेनी सीजन में फिट और हेल्दी रखने के लिए काफी हैं।
आपने जिमिकंद या सूरन तो खूब खाया होगा, लेकिन कभी बैंगनी रंग का जिमिकंद खाया है? बारिश के मौसम में पर्पल जिमिकंद खाना काफी हेल्दी होता है। इसके सेवन से आप मानसून में होने वाली बीमारियों के साथ-साथ कई अन्य रोगों से भी बचे रह सकते हैं।
मानसून में बढ़ जाता है डायरिया का खतरा
मौसम विभाग द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को कोलाबा में 13 सेमी बरसात रिकॉर्ड की गयी, तो वहीं सांताक्रूज़ में 21.01 सेमी वर्षा रिकॉर्ड की गयी। इतनी भारी बारिश से शहर में जलभराव की स्थिति बन गयी है। इस पानी के जमाव से ना केवल असुविधा होती है। बल्कि, कई तरह की बीमारियों का ख़तरा भी उत्पन्न होता है।
मानसून यानि कि बरसात के मौसम में कई तरह की बीमारियां जन्म लेती हैं जिनका मुख्य स्त्रोत मच्छर, मकड़ियों और मक्खियों समेत अन्य अन्य कीड़े होते हैं। इसलिए, वेक्टर जनित बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि के खतरे को दूर करने के लिए प्रभावी तरीकों की तलाश करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
अभिनेत्री पायल घोष ने 'सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर' पर कुछ बातें शेयर की हैं। वह कहती हैं कि मानसून सीजन के दौरान अधिकतर लोग उदास और चिंतित महसूस करने लगते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है और क्या है सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर, जानें यहां...
दिल्ली में इस साल मलेरिया के 83 और डेंगू के 34 मामले दर्ज हुए और 48,039 घरों में मच्छर पाए गए।
Vitamin C का सेवन हेल्दी होता है. इसके अलावा हेल्दी शरीर के लिए विटामिन सी जरूरी होती है. Vitamin C वाले फूड बरसात के मौसम ज्यादा जरूरी होते हैं.
मॉनसूनी बीमारियों से बचाने में तुलसी के पत्तों को लाभदायक माना जाता है। पर अगर आप अपनी इम्यूनिटी बढ़ाना चाहत हैं, तो आपको तुलसी के पत्तों के सेवन में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
मानसून के मौसम में नमी अधिक होती है, जिसमें बैक्टीरिया को तेजी से पनपने का मौका मिल जाता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में मूत्रमार्ग (UTI in Women) संबंधित संक्रमण यानी यूटीआई अधिक होता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि महिलाओं का मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में छोटा होता है।
बरसात में कीड़े-मकोड़ों का भी ब्रीडिंग सीजन होता है। वे जानबूझ कर किसी को नहीं काटते, बल्कि हाथ या पांव गलती से उन पर पड़ जाने पर वे अपनी रक्षा में दूसरों पर हमला करते हैं। बरसाती कीड़ों का डंक अंदर रह जाए तो खुजली, जलन या सूजन हो जाती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार महामारी विज्ञान की मानें तो एक साल पहले की तुलना में डेंगू के मामलों में 55% का इजाफा हुआ है। इससे अब तक 720 लोग मारे गए हैं।
कुछ बीमारियां तो ऐसी हैं, जिनका तुरंत पता भी नहीं चलता है। जबकि कुछ जानलेवा भी साबित होती हैं। डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बचना है तो आपको इन स्मार्ट टिप्स को फॉलो करना चाहिए।
मानसून के दिनों में पानी से फैलने वाली बीमारियों के इलाज के लिए अक्सर लोग डाॅक्टर की सलाह के बिना एंटी-बायोटिक दवाओं का गलत इस्तेमाल करते हैं। ऐसा करने से आप अन्य बीमारियों के लिए अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, क्योंकि इससे शरीर में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में पानी से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों को पहचान कर उनका उचित इलाज जरूरी है।
मानसून में इम्यून सिस्टम धीमी गति में काम करता है, इसलिए इस मौसम में लोगों को बुखार सबसे ज्यादा होता है। कुछ बुखार तो आसानी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ को ठीक करने के लिए उचित मेडिकल टेस्ट करना पड़ता है। यहां हम कुछ ऐसी बीमारियों के बारे में बता रहे हैं जो मॉनसून (Monsoon Diseases) में सबसे ज्यादा होती हैं और उनसे संबंधित जरूरी (Test of monsoon diseases) टेस्ट क्या हैं, उसे भी जानें।
खान-पान में उचित परिवर्तन तथा सतर्कता से मानसून के मौसम में होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है. बारिश में इन Diet Tips को अपना कर आप कई बीमारियों से भी बच सकते हैं.
कान में दर्द कई बार कान के इंफेक्शन की वजह से भी हो सकता है। बरसात में यह बच्चों में होने वाली बहुत आम समस्या है। इसके लिए आप ये घरेलू उपाय भी अपना कर देख सकते हैं।
बरसात का मौसम जितना सुहावना होता है, उतना ही ज्यादा होता है इस दौरान बीमारियों का खतरा। मानसून में होने वाली बीमारियों (Monsoon diseases) से बचने के लिए जरूरी है कि हम उनके बारे में जानें।
रिएक्टिव गठिया जोड़ों के दर्द का सम्मिश्रण है, क्योंकि वायरल के साथ-साथ बैक्टीरियल संक्रमण भी शरीर में कहीं भी हो सकता है सिवाए घुटने को छोड़कर। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर क्यों रिएक्टिव के लक्षण शरीर के उन क्षेत्रों में बढ़ रहे हैं जो संक्रमित नहीं हैं।
अगर बुखार के साथ-साथ आपको सिरदर्द, खांसी और गले में इन्फेक्शन जैसी परेशानियां भी हों तो नज़रअंदाज़ किए बगैर अपने डॉक्टर से मिलें।
खांसी-जुकाम होने पर दवा लेने की बजाए करें ये घरेलू उपाय।