बच्चों को तेजी से अपनी चपेट में लेता है मंकीपॉक्स, इन कारणों से भारतीय बच्चों में मंकीपॉक्स का खतरा अधिक
मंकीपॉक्स संक्रमण बच्चों को बहुत ही तेजी से अपनी चपेट में लेता है। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए एक्सपर्ट द्वारा सुझाए ये उपाय करें।
मंकीपॉक्स संक्रमण बच्चों को बहुत ही तेजी से अपनी चपेट में लेता है। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए एक्सपर्ट द्वारा सुझाए ये उपाय करें।
मंकीपॉक्स के कारण दुनियाभर के कई देश प्रभावित हो रहे हैं। भारत में भी अलर्ट जारी किया गया है।
वैक्सीन पर डेटा से ये मालूम हुआ कि शुरुआत में टीका स्मॉलपॉक्स से लड़ने के लिए बनाया गया था, जिसका इस मौजूदा वक्त में इस्तेमाल बहुत ही सीमित है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च -नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (ICMR-NIV) के शोधकर्ताओं ने एक नई स्टडी में मामलों का पता लगाने के संदिग्धता की ज्यादा से ज्यादा जांच करने की जरूरत पर जोर दिया है।
अब तक मंकीपॉक्स में रैशेज और फ्लू जैसे लक्षणों के सामने आने की ही बात कही जा रही थी। लेकिन अब इस घातक वायरस की वजह से न्यूरोलॉजिक्ल और साइकेट्रिक समस्याएं भी होती है।
देश में अभी तक मंकीपॉक्स के कुल 9 मामले सामने आए हैं और एक व्यक्ति की मौत हुई है। केंद्र सरकार ने इस संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए सतर्क रहने के साथ-साथ कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
मंकीपॉक्स फैलने का मुख्य कारण संक्रमित व्यक्ति और उसके सामान के साथ सीधे व करीबी संपर्क में आना है। आप चाहे किसी भी आयु वर्ग के हो, ये खतरा आपके लिए फिर बना रहता है।
नेशनल कोविड टास्क फोर्स के को-चेयरमैन राजीव जयदेवन ने कहा है कि, देश में मंकीपॉक्स के और भी केसेस का पता चल सकता है लेकिन, लोग इसका टेस्ट कराने से कतरा रहे हैं।
ICMR-NIV की टीम ने केरल में पाए गए मंकीपॉक्स के दो मामलों में मरीजों के सैम्पल्स की जेनेटिक सीक्वेंसिंग करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है।
मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति से दूसरों तक आसानी से यह संक्रमण फैल सकता है।इसीलिए एक्सपर्ट्स के अनुसार कुछ लक्षण दिखने के बाद पीड़ित व्यक्ति को खुद ही आइसोलेशन में चले जाना चाहिए।
भारत में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामले चिंता का विषय है. जहां अब तक मिले चार मरीजों के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गयी है वहीं भारत ने भी इसकी रोकथाम की तैयारियां शुरू कर दी हैं.
मंकीपॉक्स वायरस को फैलने से रोकने के लिए केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जार्ज का कहना है कि राज्य हर मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए है और हालात की निगरानी की जा रही है।
Monkeypox India: मंकीपॉक्स को लेकर देश और दुनिया में एक डर का माहौल है। ऐसे में भारत में इस तरह से मंकीपॉक्स के लक्षणों वाले व्यक्ति का मिलना, इस बात का संकेत तो नहीं कि क्या भारत में भी इस वायरस ने दस्तक दे दी है।
अभी तक दुनियाभर के 20 से ज्यादा देशों में मंकीपॉक्स वायरस के 700 से ज्यादा मामले सामने आए हैं और बहुत से मामलें अभी भी संदिग्ध हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, यह संदिग्ध केस एक लड़की का है जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव पायी गयी है।
WHO के अनुसार मंकीपॉक्स एक-व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है जिसके वायरस छूने से फैल सकते हैं।
Monkeypox in kids: मंकीपॉक्स दुनियाभर के देशों के सामने एक नई चुनौती के रूप में उभर रहा है। ऐसे में गाजियाबाद की इस बच्ची में इसके लक्षणों का दिखना, एक डर पैदा करता है कि कहीं बच्चों को ये वायरस अपना शिकार ना बना लें।
Monkeypox Virus: मंकीपॉक्स वायरस तेजी से दूसरे देशों में फैल रहा है। ऐसी स्थिति में सीडीसी (CDC) और डब्ल्यूएचओ (WHO) ने तमाम देशों को सतर्क रहने को कहा है। ऐसे में केंद्र सरकार ने इसे लेकर कुछ सख्त निर्देश दिए हैं।
मंकीपॉक्स संक्रमण बच्चों को बहुत ही तेजी से अपनी चपेट में लेता है। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए एक्सपर्ट द्वारा सुझाए ये उपाय करें।
मंकीपॉक्स के कारण दुनियाभर के कई देश प्रभावित हो रहे हैं। भारत में भी अलर्ट जारी किया गया है।
वैक्सीन पर डेटा से ये मालूम हुआ कि शुरुआत में टीका स्मॉलपॉक्स से लड़ने के लिए बनाया गया था, जिसका इस मौजूदा वक्त में इस्तेमाल बहुत ही सीमित है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च -नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (ICMR-NIV) के शोधकर्ताओं ने एक नई स्टडी में मामलों का पता लगाने के संदिग्धता की ज्यादा से ज्यादा जांच करने की जरूरत पर जोर दिया है।
अब तक मंकीपॉक्स में रैशेज और फ्लू जैसे लक्षणों के सामने आने की ही बात कही जा रही थी। लेकिन अब इस घातक वायरस की वजह से न्यूरोलॉजिक्ल और साइकेट्रिक समस्याएं भी होती है।
देश में अभी तक मंकीपॉक्स के कुल 9 मामले सामने आए हैं और एक व्यक्ति की मौत हुई है। केंद्र सरकार ने इस संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए सतर्क रहने के साथ-साथ कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
मंकीपॉक्स फैलने का मुख्य कारण संक्रमित व्यक्ति और उसके सामान के साथ सीधे व करीबी संपर्क में आना है। आप चाहे किसी भी आयु वर्ग के हो, ये खतरा आपके लिए फिर बना रहता है।
नेशनल कोविड टास्क फोर्स के को-चेयरमैन राजीव जयदेवन ने कहा है कि, देश में मंकीपॉक्स के और भी केसेस का पता चल सकता है लेकिन, लोग इसका टेस्ट कराने से कतरा रहे हैं।
ICMR-NIV की टीम ने केरल में पाए गए मंकीपॉक्स के दो मामलों में मरीजों के सैम्पल्स की जेनेटिक सीक्वेंसिंग करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है।
मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति से दूसरों तक आसानी से यह संक्रमण फैल सकता है।इसीलिए एक्सपर्ट्स के अनुसार कुछ लक्षण दिखने के बाद पीड़ित व्यक्ति को खुद ही आइसोलेशन में चले जाना चाहिए।
भारत में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामले चिंता का विषय है. जहां अब तक मिले चार मरीजों के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गयी है वहीं भारत ने भी इसकी रोकथाम की तैयारियां शुरू कर दी हैं.
मंकीपॉक्स वायरस को फैलने से रोकने के लिए केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जार्ज का कहना है कि राज्य हर मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए है और हालात की निगरानी की जा रही है।
Monkeypox India: मंकीपॉक्स को लेकर देश और दुनिया में एक डर का माहौल है। ऐसे में भारत में इस तरह से मंकीपॉक्स के लक्षणों वाले व्यक्ति का मिलना, इस बात का संकेत तो नहीं कि क्या भारत में भी इस वायरस ने दस्तक दे दी है।
अभी तक दुनियाभर के 20 से ज्यादा देशों में मंकीपॉक्स वायरस के 700 से ज्यादा मामले सामने आए हैं और बहुत से मामलें अभी भी संदिग्ध हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, यह संदिग्ध केस एक लड़की का है जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव पायी गयी है।
WHO के अनुसार मंकीपॉक्स एक-व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है जिसके वायरस छूने से फैल सकते हैं।
Monkeypox in kids: मंकीपॉक्स दुनियाभर के देशों के सामने एक नई चुनौती के रूप में उभर रहा है। ऐसे में गाजियाबाद की इस बच्ची में इसके लक्षणों का दिखना, एक डर पैदा करता है कि कहीं बच्चों को ये वायरस अपना शिकार ना बना लें।
Monkeypox Virus: मंकीपॉक्स वायरस तेजी से दूसरे देशों में फैल रहा है। ऐसी स्थिति में सीडीसी (CDC) और डब्ल्यूएचओ (WHO) ने तमाम देशों को सतर्क रहने को कहा है। ऐसे में केंद्र सरकार ने इसे लेकर कुछ सख्त निर्देश दिए हैं।