Depression symptoms: डिप्रेशन की शुरूआत में ही दिख जाते हैं ये 6 लक्षण, ना करें इग्नोर
मेंटल हेल्थ से जुड़ी एक गम्भीर समस्या है डिप्रेशन और युवाओं से लेकर बुजुर्गों में तेजी से बढ़ रही है।
मेंटल हेल्थ से जुड़ी एक गम्भीर समस्या है डिप्रेशन और युवाओं से लेकर बुजुर्गों में तेजी से बढ़ रही है।
बच्चों में सोमेटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर (SSD) के लक्षणों को अनदेखा करने से बच्चों में यह समस्या गम्भीर बन सकती है।
स्कूली बच्चों या स्टुडेंट्स के मन में दूसरों से पीछे रह जाने का डर, एकाग्रता और फोकस की कमी के साथ-साथ पढ़ाई में मन न लगने जैसी समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं।
अपने कामकाज के बीच जब भी आप बहुत अधिक तनाव महसूस करें तो आप 2 मिनट की यह ब्रीदिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं।
यूनिसेफ ने 21 देशों में एक सर्वेक्षण किया, जिसमें यह बात सामने आई है कि भारत में सिर्फ 41 % युवा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए समर्थन लेने के इच्छुक थे, वहीं 21 देशों के लिए यह औसत 83 % था।
कोरोनावायरस के चलते चिंतित होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें मैनेज करना भी बहुत जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर नहीं बनाकर रखेंगे, तो आपके लिए ही नुकसानदायक होगा।
कोरोना संकट के इस दौर में बच्चों में भी तनाव, एंग्जाइटी और अकेलेपन (Stress and Anxiety in children in hindi) की समस्या बढ़ रही है। इसलिए आज हम आपको 5 ऐसी फिल्मों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें देखने से बच्चों को एक खास मैसेज मिलेगा जो उनके भविष्य को और उनकी सोच को बेहतर करने में मदद करेगा।
छात्रों के इस मानसिक तनाव का मुद्दा शनिवार को लोकसभा में उठाया गया। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए छात्रों को ऑनलाइन चैट के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। शनिवार को लोकसभा में इस विषय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री से प्रश्न पूछा गया। जिसके जवाब में कहा गया कि शिक्षा मंत्रालय इस दिशा में ऑनलाइन हेल्प उबलब्ध कराएगी।(Mental Stress During Covid-19)
अमिताभ बच्चन ने कोरोनावायरस से पीड़ित मरीजों की मानसिक स्वास्थ्य (Mental health of covid-19 patient) पर होने वाले खतरनाक प्रभावों के बारे में अपने ब्लॉग पर बात की। जानिए, क्या लिखा है बिग बी ने इस ब्लॉग में...
हम और आप घर बैठकर इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते कि डॉक्टर्स जब अपनी ड्यूटी पर होते हैं, तो किन शारीरिक और मानसिक परिस्थितियों से वो गुजरते हैं। किन समस्याओं, चुनौतियों का सामना उन्हें करना पड़ता है। यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर, स्ट्रैटजी एंड कोविड-19 मैनेजमेंट डॉ. आर के मनी आज हमारे साथ फेसबुक पर लाइव जुड़ रहे हैं। इस लाइव सेशन के दौरान वो कोविड-19 मरीजों के इलाज के दौरान डॉक्टर्स के सामने आने वाली चुनौतियों और समस्याओं पर बात करने वाले हैं, आप भी जुड़िए हमारे साथ लाइव....
तनाव या स्ट्रेस का सीधा असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है। इससे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ सकती हैं। इसी तरह पेट और इंस्टेटाइनल प्रॉब्लम्स भी नींद की कमी के कारण बहुत अधिक बढ़ सकती हैं। तो वहीं इंसोमेनिया यानि अनिद्रा की समस्या भी तनाव का एक साइड-इफेक्ट है। जिसे, नज़रअंदाज़ करने से हेल्थ पूरी तरह से बिगड़ सकती है।
घर-दफ्तर के कामों और लगातार कोरोना वायरस से जुड़ी डरावनी ख़बरें सुनकर लोग बहुत अधिक तनाव महसूस कर रहे हैं। खासकर, बैचलर्स या ऐसे लोग जो अपने घरों से दूर नौकरी करने निकले हैं, और लॉकडाउन के दौरान अकेले ही घर में बंद हैं। उन्हें, बहुत अधिक, उदासी, अकेलापन और स्ट्रेस महसूस हो सकता है। इस तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग और एक्सरसाइज़ करें। खुश रहने की कोशिश करें, किताबें पढ़ें और बच्चों के साथ खेलें। इसके अलावा अपनी डायट में इन चीज़ों को भी शामिल करें। जिनके सेवन को स्ट्रेस कम करने वाला माना जाता है।
जैसा कि पूरी दुनिया लॉकडाउन के माहौल से गुज़र रही है। ऐसे में लोग बहुत सारा समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं। इसीलिए, अगर आप ऐसे में तनाव से बचना चाहते हैं। तो, इन टिप्स को करें फॉलो-
विभिन्न शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि हमारी सेहत की ही तरह हमारे मूड पर भी हमारे आहार का बहुत असर पड़ता है।
काम के बढ़ते लोड में कई बार ऐसा होता है कि आप क्या करें और क्या न करें के फेर में ही परेशान हो जाते हैं। यह असल में काम का मन पर बोझ बन जाने की स्थिति है। यहीं से होती है चिंता और अवसाद की शुरूआत। अगर आप भी काम के बढ़ते बोझ से परेशान हैं तो करें ध्यान योग। निश्चित रूप से इसके बाद आप स्वयं महसूस करेंगे कि आपकी कार्यक्षमता में सुधार हो रहा है।
अब तो ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो सिंगल पेरेंट होते हुए भी बच्चा गोद लेते हैं। पर बच्चा गोद लेने के बाद उस बच्चे की भावनाओं और मानसिक कम्फर्ट का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
गर्भावस्था पर पहली बार हुए इस तरह के शोध में यह बात सामने आई कि अपनी गर्भावस्था का खुलासा करने पर जहां महिलाओं ने कार्यस्थल पर हतोत्साहित करने वाले माहौल का सामना किया वहीं पुरुषों के लिए यह प्रोन्नति का माहौल बनाने में सफल रहा।
हाथ में मोबाइल आ जाने से बहुत सारी चीजें हथेली में सिमट आईं हैं। सोशल कनैक्टिविटी से लेकर घर-बाहर की जिम्मेदारियां भी आप इसके माध्यम से पूरी कर रहे हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इस एक छोटी सी चीज ने दुनिया भर की रचनात्मकता पर ग्रहण लगा दिया है।
हर बच्चे को गुस्सा आता है पर जब उस गुस्से के जवाब में आप उन्हें पीटना शुरू कर देते हैं तो यह गुस्सा हिंसक हो सकता है।
हो सकता है आप गलत जगह हों या गलत तरीके से हों। तन और मन को एकाग्रचित कर अपने आप से सवाल करने का अवसर देता है मेडिटेशन।
विशेषज्ञ बताते हैं कि नींद की कमी से तनाव के हार्मोन रिलीज होते हैं। यह टेस्टोस्टेरोन कम करता है। कम नींद से हृदय रोग और मोटोपे बढ़ने का खतरा बना रहता है। कम नींद की वजह से शरीर को और भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में वसा का संचय होता है, जिससे डायबीटिज का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।
हालांकि होना तो यह चाहिए था कि सूचना क्रांति आपकी जिंदगी को खुशियों से भर देती, पर क्योंं हुआ ऐसा कि इसके साथ तनाव पैर पसारता चला गया। कहीं गलती आप से तो नहीं हुई ?
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हर कोई आगे निकल जाना चाहता है और जो पीछे रह जाता है, उसके मन में निराशा, कुंठा और चिंताएं घर कर जाती हैं। इन्हीं सब वजहों से व्यक्ति तनाव का शिकार होने लगता है।
एक शोध में यह सामने आया है कि मोबाइल पर खेली जाने वाली गेम्स तनाव को दूर कर डिप्रेशन से बचने में मददगार होती हैं, साथ ही इससे फोकस बढ़ाने में भी कुछ हद तक मदद मिलती है।
बच्चों में सोमेटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर (SSD) के लक्षणों को अनदेखा करने से बच्चों में यह समस्या गम्भीर बन सकती है।
स्कूली बच्चों या स्टुडेंट्स के मन में दूसरों से पीछे रह जाने का डर, एकाग्रता और फोकस की कमी के साथ-साथ पढ़ाई में मन न लगने जैसी समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं।
अपने कामकाज के बीच जब भी आप बहुत अधिक तनाव महसूस करें तो आप 2 मिनट की यह ब्रीदिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं।
यूनिसेफ ने 21 देशों में एक सर्वेक्षण किया, जिसमें यह बात सामने आई है कि भारत में सिर्फ 41 % युवा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए समर्थन लेने के इच्छुक थे, वहीं 21 देशों के लिए यह औसत 83 % था।
कोरोनावायरस के चलते चिंतित होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें मैनेज करना भी बहुत जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर नहीं बनाकर रखेंगे, तो आपके लिए ही नुकसानदायक होगा।
छात्रों के इस मानसिक तनाव का मुद्दा शनिवार को लोकसभा में उठाया गया। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए छात्रों को ऑनलाइन चैट के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। शनिवार को लोकसभा में इस विषय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री से प्रश्न पूछा गया। जिसके जवाब में कहा गया कि शिक्षा मंत्रालय इस दिशा में ऑनलाइन हेल्प उबलब्ध कराएगी।(Mental Stress During Covid-19)
अमिताभ बच्चन ने कोरोनावायरस से पीड़ित मरीजों की मानसिक स्वास्थ्य (Mental health of covid-19 patient) पर होने वाले खतरनाक प्रभावों के बारे में अपने ब्लॉग पर बात की। जानिए, क्या लिखा है बिग बी ने इस ब्लॉग में...
हम और आप घर बैठकर इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते कि डॉक्टर्स जब अपनी ड्यूटी पर होते हैं, तो किन शारीरिक और मानसिक परिस्थितियों से वो गुजरते हैं। किन समस्याओं, चुनौतियों का सामना उन्हें करना पड़ता है। यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर, स्ट्रैटजी एंड कोविड-19 मैनेजमेंट डॉ. आर के मनी आज हमारे साथ फेसबुक पर लाइव जुड़ रहे हैं। इस लाइव सेशन के दौरान वो कोविड-19 मरीजों के इलाज के दौरान डॉक्टर्स के सामने आने वाली चुनौतियों और समस्याओं पर बात करने वाले हैं, आप भी जुड़िए हमारे साथ लाइव....
तनाव या स्ट्रेस का सीधा असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है। इससे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ सकती हैं। इसी तरह पेट और इंस्टेटाइनल प्रॉब्लम्स भी नींद की कमी के कारण बहुत अधिक बढ़ सकती हैं। तो वहीं इंसोमेनिया यानि अनिद्रा की समस्या भी तनाव का एक साइड-इफेक्ट है। जिसे, नज़रअंदाज़ करने से हेल्थ पूरी तरह से बिगड़ सकती है।
घर-दफ्तर के कामों और लगातार कोरोना वायरस से जुड़ी डरावनी ख़बरें सुनकर लोग बहुत अधिक तनाव महसूस कर रहे हैं। खासकर, बैचलर्स या ऐसे लोग जो अपने घरों से दूर नौकरी करने निकले हैं, और लॉकडाउन के दौरान अकेले ही घर में बंद हैं। उन्हें, बहुत अधिक, उदासी, अकेलापन और स्ट्रेस महसूस हो सकता है। इस तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग और एक्सरसाइज़ करें। खुश रहने की कोशिश करें, किताबें पढ़ें और बच्चों के साथ खेलें। इसके अलावा अपनी डायट में इन चीज़ों को भी शामिल करें। जिनके सेवन को स्ट्रेस कम करने वाला माना जाता है।
जैसा कि पूरी दुनिया लॉकडाउन के माहौल से गुज़र रही है। ऐसे में लोग बहुत सारा समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं। इसीलिए, अगर आप ऐसे में तनाव से बचना चाहते हैं। तो, इन टिप्स को करें फॉलो-
काम के बढ़ते लोड में कई बार ऐसा होता है कि आप क्या करें और क्या न करें के फेर में ही परेशान हो जाते हैं। यह असल में काम का मन पर बोझ बन जाने की स्थिति है। यहीं से होती है चिंता और अवसाद की शुरूआत। अगर आप भी काम के बढ़ते बोझ से परेशान हैं तो करें ध्यान योग। निश्चित रूप से इसके बाद आप स्वयं महसूस करेंगे कि आपकी कार्यक्षमता में सुधार हो रहा है।
अब तो ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो सिंगल पेरेंट होते हुए भी बच्चा गोद लेते हैं। पर बच्चा गोद लेने के बाद उस बच्चे की भावनाओं और मानसिक कम्फर्ट का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
गर्भावस्था पर पहली बार हुए इस तरह के शोध में यह बात सामने आई कि अपनी गर्भावस्था का खुलासा करने पर जहां महिलाओं ने कार्यस्थल पर हतोत्साहित करने वाले माहौल का सामना किया वहीं पुरुषों के लिए यह प्रोन्नति का माहौल बनाने में सफल रहा।
हाथ में मोबाइल आ जाने से बहुत सारी चीजें हथेली में सिमट आईं हैं। सोशल कनैक्टिविटी से लेकर घर-बाहर की जिम्मेदारियां भी आप इसके माध्यम से पूरी कर रहे हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इस एक छोटी सी चीज ने दुनिया भर की रचनात्मकता पर ग्रहण लगा दिया है।
हर बच्चे को गुस्सा आता है पर जब उस गुस्से के जवाब में आप उन्हें पीटना शुरू कर देते हैं तो यह गुस्सा हिंसक हो सकता है।
हो सकता है आप गलत जगह हों या गलत तरीके से हों। तन और मन को एकाग्रचित कर अपने आप से सवाल करने का अवसर देता है मेडिटेशन।
विशेषज्ञ बताते हैं कि नींद की कमी से तनाव के हार्मोन रिलीज होते हैं। यह टेस्टोस्टेरोन कम करता है। कम नींद से हृदय रोग और मोटोपे बढ़ने का खतरा बना रहता है। कम नींद की वजह से शरीर को और भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में वसा का संचय होता है, जिससे डायबीटिज का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।
हालांकि होना तो यह चाहिए था कि सूचना क्रांति आपकी जिंदगी को खुशियों से भर देती, पर क्योंं हुआ ऐसा कि इसके साथ तनाव पैर पसारता चला गया। कहीं गलती आप से तो नहीं हुई ?
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हर कोई आगे निकल जाना चाहता है और जो पीछे रह जाता है, उसके मन में निराशा, कुंठा और चिंताएं घर कर जाती हैं। इन्हीं सब वजहों से व्यक्ति तनाव का शिकार होने लगता है।
एक शोध में यह सामने आया है कि मोबाइल पर खेली जाने वाली गेम्स तनाव को दूर कर डिप्रेशन से बचने में मददगार होती हैं, साथ ही इससे फोकस बढ़ाने में भी कुछ हद तक मदद मिलती है।
एक अध्ययन में पाया गया है कि व्यक्ति की आंखों से उनके दिमाग को पढ़ा और समझा जा सकता है। इससे व्यक्ति की तनावपूर्ण स्थिति को समझकर उसका हल निकलाने में मदद मिलेगी।
अनेक मित्रों और परिजन को खोने के बावजूद उम्रदराज दंपति अपेक्षाकृत प्रसन्न होते हैं और उनमें अवसाद तथा उद्विग्नता के लक्षण कम होते है। विवाह उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा साबित हुआ है।
मकर संक्रांति पर तो इसका उपयोग होता ही है , लेकिन इसके खास गुणों के कारण लोग सर्दियों की डायट में भी करते हैं इसे शामिल।
कोरोना संकट के इस दौर में बच्चों में भी तनाव, एंग्जाइटी और अकेलेपन (Stress and Anxiety in children in hindi) की समस्या बढ़ रही है। इसलिए आज हम आपको 5 ऐसी फिल्मों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें देखने से बच्चों को एक खास मैसेज मिलेगा जो उनके भविष्य को और उनकी सोच को बेहतर करने में मदद करेगा।
विभिन्न शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि हमारी सेहत की ही तरह हमारे मूड पर भी हमारे आहार का बहुत असर पड़ता है।
अमूमन पुरुष तनाव नहीं लेते पर जब मामला बिगड़ जाए तो उन पर तनाव इतना ज्या दा हावी हो जाता है कि वह प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।
पहले यह समझने की जरूरत है कि आप खुद से प्यार करना चाहते हैं कि दूसरों से नफरत। यह नजरिया ही आपको जीवन के प्रति सुख या दुख से भर सकता है।
ये लाभ जानिए और अपनी डायट में शामिल कीजिए प्रोबायोटिक्स
मेंटल हेल्थ से जुड़ी एक गम्भीर समस्या है डिप्रेशन और युवाओं से लेकर बुजुर्गों में तेजी से बढ़ रही है।