एक कपल को IVF कराने का कब सोचना चाहिए? जानें कितने साल तक करना चाहिए नेचुरली ट्राई
कई बार कपल प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई करता है, लेकिन नेचुरल तरीके से नहीं हो पाता है, तो ऐसे में कपल को आईवीएफ का ऑप्शन कब चुनना चाहिए? आइए, जानते हैं-
कई बार कपल प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई करता है, लेकिन नेचुरल तरीके से नहीं हो पाता है, तो ऐसे में कपल को आईवीएफ का ऑप्शन कब चुनना चाहिए? आइए, जानते हैं-
डॉ. प्रज्ञा रश्मि कहती हैं कि बहुत से मरीज जरूरत के इलाज सिर्फ इसलिए टाल देते हैं क्योंकि वे बीमारी से ज्यादा पैसों के खर्च और तनाव से डरते हैं।
आईवीएफ ऐसे कपल्स के लिए वरदान है, जो प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण नहीं कर पाते हैं। हालांकि, आज भी लोग इस टर्म के बारे में ज्यादा जागरूक नहीं है। आइए, जानते हैं आईवीएफ से जुड़ी छोटी-बड़ी सारी जानकारियां-
क्या आईवीएफ से जन्मे बच्चे वाकई बार-बार बीमार पड़ते हैं? जानें इस सवाल की सच्चाई और आम भ्रांतियों के बारे में। वीडियो में एक्सपर्ट बताएंगे आईवीएफ से जुड़ी हकीकत।
IVF से भी आगे है आयुर्वेद! संतान की चाह में जब साइंस हार मान जाए, तब आयुर्वेद दिखाता है राह। महाभारत काल से लेकर आज तक, कैसे आयुर्वेद ने मां-बाप बनने का रास्ता दिखाया, जानिए डॉ. चंचल शर्मा से।
आईवीएफ की प्रक्रिया में माता और पिता दोनों की समान भूमिका होती है। हालांकि, आमतौर पर पुरुषों की फर्टिलिटी से जुड़े विषयों को आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
IVF Treatment in Hindi: जो कपल्स नेचुरल तरीके से कंसीव नहीं कर पाते हैं, उनके लिए आईवीएफ एक बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकता है। जानें, क्या है इसकी प्रक्रिया, सफलता दर और खर्चा-
अगर आप आईवीएफ करवाना चाहते हैं, तो इससे पहले कुछ टेस्ट जरूर करवाएं। इससे सेहत की सही जानकारी मिलेगी और आईवीएफ के सफल होने की संभावना बढ़ेगी।
IVF Stages: आईवीएफ ट्रीटमेंट उन कपल्स के लिए वरदान साबित हो सकता है, जो नेचुरल तरीके से कंसीव नहीं कर पा रहे हैं। आइए, जानते हैं आईवीएफ के चरणों के बारे में -
देखा जाता है कि ज्यादातर महिलाएं आईवीएफ के दौरान अपने मानसिक स्वास्थ्य को खराब कर लेती हैं, जो बाद में उनकी गर्भावस्था पर भी असर डालता है। इस लेख में एक्सपर्ट्स से जानें इस दौरान कैसे रखें अपनी मेंटल हेल्थ को सही।
IVF एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें महिला के एग और पुरुष के स्पर्म को लैब में फर्टिलाइज करके गर्भधारण कराया जाता है। यह उन कपल्स के लिए फायदेमंद है, जिन्हें नेचुरली कंसीव करने में दिक्कत हो रही होती है।
How Many Injections For IVF: आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान महिला को कई तरह की हार्मोनल दवाएं और इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिससे ओव्यूलेशन को बढ़ावा मिलता है।
इस तकनीक में महिला की अंडेदानी से अंडे निकालकर उनका पुरुष के Female Eggs को Male Sperm के साथ फैलोपियन ट्यूब में फर्टिलाइज है. फिर फर्टिलाइजेशन से बनने वाले एम्ब्रायो को महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है
आईवीएफ एक फर्टिलिटी इलाज हैं जिसमें महिलाओं के अंडों को पुरूषों के शुक्राणु से अप्राकृतिक तरीके से मिलाया जाता है। यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए हैं जिनको बच्चा करने में समस्या आ रही हो या फिर आनुवंशिक कारणों के चलते वो बच्चा करने में असफल हो रहे हो।
क्या आप जानते हैं कि आईवीएफ प्रेगनेंसी फेल होने के बाद भी आप दोबारा से मां बन सकती हैं। आइए जानते हैं कैसे।
IVF को लेकर बहुत सी महिलाओं के मन में डर रहता है। अगर आपके जहन में भी आईवीएफ को लेकर कई सवाल है तो एक्सपर्ट आपकी इस दुविधा को दूर कर सकते हैं।
Pregnancy after Menopause: मेनोपॉज के बाद गर्भावस्था एआरटी के जरिए प्राप्त की जा सकती है, लेकिन यह केवल दुर्लभ मामलों में ही संभव है। गर्भाशय को तैयार करने के लिए दो से तीन महीने के लिए हार्मोनल टैबलेट्स दिए जाते हैं, क्योंकि मेनोपॉज के कारण गर्भाशय सिकुड़ जाता है। इस तरह से मासिक धर्म को फिर से शुरू किया जा सकता है।
आइए जानते हैं क्या कोरोनावायरस के इस दौर में IVF कराना सही रहेगा? साथ ही ये भी जानते हैं कि इस दोरान क्या Dos And Don'ts अपनाने चाहिए.
TV Actress माही विज ने एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार आईवीएफ कराया और वह बार-बार फेल होता रहा।
देबीना बैनर्जी के लिए मुश्किल था कंसीव कर पाना, IVF की मदद से बन सकीं मां, हाल ही में अभिनेत्री ने प्रेगनेंसी और आईवीएफ मेथक में आए खर्च के बारे में बात की।
सफल गर्भावस्था हासिल करने के लिए एक या दो आईवीएफ ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। यह शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक रूप से काफी थकाने वाला हो सकता है, लेकिन आपको यह जानना चाहिए कि आप इस संघर्ष में अकेले नहीं है।
गुजरात एक महिला ने 70 वर्ष की आयु में आईवीएफ तकनीक की मदद से एक बेटे को जन्म दिया है जो इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है।
आप कुछ साधारण जीवनशैली की आदतों में बदलाव कर प्रजनन क्षमता की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। जानिए कौन से हैं ये आसान टिप्स।
जर्नल फर्टिलिटी एंड स्टर्लिटी (Fertility and Sterility) में प्रकाशित इस स्टडी में प्रीमैच्योर बर्थ (Premature birth) और आईवीएफ तकनीक (IVF) के बीच संबंध समझने की कोशिश की गयी। रिसर्चर्स ने पाया है कि ऐसे बच्चों (Infant Mortality Risk) के लिए एक वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले मृत्यु का डर 45 फीसदी अधिक होता है। जबकि, नैचुरली गर्भधारण की वजह से जन्म लेने वाले बच्चों में यह खतरा कम होता है।
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डॉ. प्रज्ञा रश्मि कहती हैं कि बहुत से मरीज जरूरत के इलाज सिर्फ इसलिए टाल देते हैं क्योंकि वे बीमारी से ज्यादा पैसों के खर्च और तनाव से डरते हैं।
आईवीएफ ऐसे कपल्स के लिए वरदान है, जो प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण नहीं कर पाते हैं। हालांकि, आज भी लोग इस टर्म के बारे में ज्यादा जागरूक नहीं है। आइए, जानते हैं आईवीएफ से जुड़ी छोटी-बड़ी सारी जानकारियां-
आईवीएफ की प्रक्रिया में माता और पिता दोनों की समान भूमिका होती है। हालांकि, आमतौर पर पुरुषों की फर्टिलिटी से जुड़े विषयों को आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
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अगर आप आईवीएफ करवाना चाहते हैं, तो इससे पहले कुछ टेस्ट जरूर करवाएं। इससे सेहत की सही जानकारी मिलेगी और आईवीएफ के सफल होने की संभावना बढ़ेगी।
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देखा जाता है कि ज्यादातर महिलाएं आईवीएफ के दौरान अपने मानसिक स्वास्थ्य को खराब कर लेती हैं, जो बाद में उनकी गर्भावस्था पर भी असर डालता है। इस लेख में एक्सपर्ट्स से जानें इस दौरान कैसे रखें अपनी मेंटल हेल्थ को सही।
How Many Injections For IVF: आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान महिला को कई तरह की हार्मोनल दवाएं और इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिससे ओव्यूलेशन को बढ़ावा मिलता है।
क्या आप जानते हैं कि आईवीएफ प्रेगनेंसी फेल होने के बाद भी आप दोबारा से मां बन सकती हैं। आइए जानते हैं कैसे।
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Pregnancy after Menopause: मेनोपॉज के बाद गर्भावस्था एआरटी के जरिए प्राप्त की जा सकती है, लेकिन यह केवल दुर्लभ मामलों में ही संभव है। गर्भाशय को तैयार करने के लिए दो से तीन महीने के लिए हार्मोनल टैबलेट्स दिए जाते हैं, क्योंकि मेनोपॉज के कारण गर्भाशय सिकुड़ जाता है। इस तरह से मासिक धर्म को फिर से शुरू किया जा सकता है।
आइए जानते हैं क्या कोरोनावायरस के इस दौर में IVF कराना सही रहेगा? साथ ही ये भी जानते हैं कि इस दोरान क्या Dos And Don'ts अपनाने चाहिए.
TV Actress माही विज ने एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार आईवीएफ कराया और वह बार-बार फेल होता रहा।
देबीना बैनर्जी के लिए मुश्किल था कंसीव कर पाना, IVF की मदद से बन सकीं मां, हाल ही में अभिनेत्री ने प्रेगनेंसी और आईवीएफ मेथक में आए खर्च के बारे में बात की।
सफल गर्भावस्था हासिल करने के लिए एक या दो आईवीएफ ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। यह शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक रूप से काफी थकाने वाला हो सकता है, लेकिन आपको यह जानना चाहिए कि आप इस संघर्ष में अकेले नहीं है।
गुजरात एक महिला ने 70 वर्ष की आयु में आईवीएफ तकनीक की मदद से एक बेटे को जन्म दिया है जो इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है।
आप कुछ साधारण जीवनशैली की आदतों में बदलाव कर प्रजनन क्षमता की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। जानिए कौन से हैं ये आसान टिप्स।
जर्नल फर्टिलिटी एंड स्टर्लिटी (Fertility and Sterility) में प्रकाशित इस स्टडी में प्रीमैच्योर बर्थ (Premature birth) और आईवीएफ तकनीक (IVF) के बीच संबंध समझने की कोशिश की गयी। रिसर्चर्स ने पाया है कि ऐसे बच्चों (Infant Mortality Risk) के लिए एक वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले मृत्यु का डर 45 फीसदी अधिक होता है। जबकि, नैचुरली गर्भधारण की वजह से जन्म लेने वाले बच्चों में यह खतरा कम होता है।
इस तकनीक में दवाइयों और सर्जिकल तरीकों की मदद से स्पर्म द्वारा एग को फर्टिलाइज़ करने की कोशिश की जाती है और फिर फर्टिलाइज एग को यूटरस में इम्प्लांट किया जाता है।
पीआरपी एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मरीज के शरीर से ब्लड निकाल कर उसे विशेष तकनीक की मदद से ब्लड कंपोनेंट को अलग किया गया, जिसमें प्लेटलेट्स रिच पदार्थ काफी मात्रा में होते हैं। इसमें ग्रोथ फैक्टर और हार्मोन में सुधार की क्षमता होती है।
आए दिन कई दंपतियों को बार-बार इन व्रिटो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ करवाने के बावजूद विफलता हाथ लगने की शिकायतें रहती हैं।
शोध बताता है कि गर्मियों के दौरान महिलाओं में आईवीएफ के इलाज से गर्भधारण की संभावनाएं दोगुनी बढ़ जाती है।
आईवीएफ तकनीक बेहद खर्चीली है, इसलिए अधिकांश दंपति चाहते हैं कि एक बार में ही उनका परिवार पूरा हो जाए।
क्या आईवीएफ से जन्मे बच्चे वाकई बार-बार बीमार पड़ते हैं? जानें इस सवाल की सच्चाई और आम भ्रांतियों के बारे में। वीडियो में एक्सपर्ट बताएंगे आईवीएफ से जुड़ी हकीकत।
IVF से भी आगे है आयुर्वेद! संतान की चाह में जब साइंस हार मान जाए, तब आयुर्वेद दिखाता है राह। महाभारत काल से लेकर आज तक, कैसे आयुर्वेद ने मां-बाप बनने का रास्ता दिखाया, जानिए डॉ. चंचल शर्मा से।
IVF एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें महिला के एग और पुरुष के स्पर्म को लैब में फर्टिलाइज करके गर्भधारण कराया जाता है। यह उन कपल्स के लिए फायदेमंद है, जिन्हें नेचुरली कंसीव करने में दिक्कत हो रही होती है।
इस तकनीक में महिला की अंडेदानी से अंडे निकालकर उनका पुरुष के Female Eggs को Male Sperm के साथ फैलोपियन ट्यूब में फर्टिलाइज है. फिर फर्टिलाइजेशन से बनने वाले एम्ब्रायो को महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है
आईवीएफ एक फर्टिलिटी इलाज हैं जिसमें महिलाओं के अंडों को पुरूषों के शुक्राणु से अप्राकृतिक तरीके से मिलाया जाता है। यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए हैं जिनको बच्चा करने में समस्या आ रही हो या फिर आनुवंशिक कारणों के चलते वो बच्चा करने में असफल हो रहे हो।