एल्कोहल के अधिक सेवन से सेहत पर होने वाले दुष्प्रभाव
यदि आपको भी हर दिन एल्कोहल के सेवन की लत लगी हुई है, तो साइंस के अनुसार, इसके शरीर पर होने वाले इन 5 बड़े नुकसानों (Side Effects of Alchohol) को भी जरूर जान लें....
यदि आपको भी हर दिन एल्कोहल के सेवन की लत लगी हुई है, तो साइंस के अनुसार, इसके शरीर पर होने वाले इन 5 बड़े नुकसानों (Side Effects of Alchohol) को भी जरूर जान लें....
नि:संतानता की समस्या के लिए केवल महिला या केवल पुरुष इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इस समस्या का प्रभाव महिला एवं पुरुष दोनों पर ही समान स्तर पर पड़ता है आमतौर पर 40% यह समस्या महिलाओं में होती है और 40% ही यह समस्या पुरुषों में पाई जाती है
इनफर्टिलिटी या नि:संतानता (बांझपन) यह सब एक ही है। यह एक ऐसी समस्या है जिसमें पति पत्नी संतान प्राप्ति के लिए प्रयास करते हैं लेकिन कुछ समस्याओं के चलते संतान सुख नहीं मिल पाता है।
क्या आप इनफर्टिलिटी का सामना कर रहे हैं? अगर हां तो आप अकेले नहीं हैं। बता दें कि करीब 15 प्रतिशत कपल ऐसे हैं जो इनफर्टिलिटी की समस्या का सामना कर रहे हैं। इनफर्टिलिटी उस स्थिति को कहते हैं जब लंबे समय तक सेक्स करने के बाद भी कोई कपल कंसीव नहीं कर पाता है। बार बार मिसकैरेज होना और गर्भ में ही शिशु का मर जाना भी इनफर्टिलिटी कहलाता है।
35 साल की उम्र में या इसके बाद प्रेग्नेंट होने में महिलाओं को कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। इस उम्र में कई बार महिलाओं को इनफर्टिलिटी का सामना भी करना पड़ता है। हर महिला कुछ तय एग्स के साथ पैदा होती है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वह एग्स अपने आप घटने लगते हैं। साथ ही जो एग्स बचते हैं उनके साथ प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आने लगती है। इस उम्र में यदि 6 महीने के प्रयास बाद भी आप गर्भवती नहीं होती हैं तो आपको डॉक्टर से कन्सल्ट करना चाहिए। इसके साथ ही आज हम आपको कुछ ऐसी टिप्स बता रहे हैं जिन्हें फॉलो कर आपको गर्भवती होने में मदद मिल सकती है।
इनफर्टिलिटी हमारी जीवनशैली की आदतों पर निर्भर करती है। सही आहार के साथ प्रजनन क्षमता को बेहतर किया जा सकता है। आपको बस यह पता होना चाहिए कि प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाए रखने के लिए क्या खाना चाहिए (Foods to boost Fertility) और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।
बांझपन या इनफर्टिलिटी की समस्या (Infertility problem) आज एक आम बात हो गई है। दिनों-दिन बढ़ती जा रही इस समस्या से ग्रस्त लोगों के तनाव को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों की कोशिशों ने काफी सफलता प्राप्त की है। अब कई तकनीक ऐसे आ गए हैं, जो आपको मां-बाप बनने की खुशी देने के लिए काफी हैं।
सिगरेट में मौजूद रसायन अंडाशय के भीतर एंटीऑक्सीडेंट स्तर में असंतुलन पैदा कर सकते हैं। यह असंतुलन निषेचन को प्रभावित कर सकता है और स्पष्ट है कि इसके बाद इम्प्लांटेशन में कमी आ जाएगी।
जानें, यदि आप तीस वर्ष के बाद (women's health problem after 30s) अपने शरीर के प्रति लापरवाही बरतेंगी, तो किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
कार्डी ने लिखा, "15 साल की कार्डी..प्रिय छोटी लड़कियों सीनियर्स के लिए कूल दिखने के चक्कर में सिगरेट या वीड का सेवन नहीं करें, क्योंकि आप वास्तव में बड़ी होंगी और फिर देखेंगी कि आप कैसी बेवकूफी कर रही हैं।" जानें, स्मोकिंग करने के साइड इफेक्ट्स क्या-क्या होते हैं...
मोबाइल और उनके टॉवर से निकलने वाली रेडिएशन प्रजनन क्षमता को पहुंचा रहेे हैंं नुकसान।
टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस महिलाओं के गर्भाशय को भी प्रभावित कर सकती है। जानें, क्या है यूटरस ट्यूबरकुलोसिस, इसके लक्षण और बचाव के उपाय...
आप योग में चक्रासन के जरिए बांझपन की समस्या को दूर कर सकती हैं।
बहुत सी महिलाओं की बच्चेदानी में गांठ होती है, जिसे मेडिकल भाषा में रसौली कहा जाता है। यह भी कई बार मां बनने में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।
महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, मूड स्विंग, वजाइना में सूखापन, जल्दी रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज, गर्भ धारण करने में असमर्थता, हार्ट रोग, सर्वाइकल कैंसर जैसी परेशानी सामान्यतया देखने को मिलती हैं.
महिलाओं में प्रजनन की उम्र में पेल्विक या जेनाइटल टीबी होने का खतरा ज्यादा होता है, जिसके कारण महिलाओं में बांझपन की आशंका बढ़ जाती है।
पीआरपी एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मरीज के शरीर से ब्लड निकाल कर उसे विशेष तकनीक की मदद से ब्लड कंपोनेंट को अलग किया गया, जिसमें प्लेटलेट्स रिच पदार्थ काफी मात्रा में होते हैं। इसमें ग्रोथ फैक्टर और हार्मोन में सुधार की क्षमता होती है।
एक आम धारणा यह भी है कि ज्यादा उम्र में शादी करने से इनफर्टिलिटी का जोखिम बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे बढ़ती हुई उम्र बढ़ा देती है बांझपन का जोखिम।
नि:संतानता की समस्या के लिए केवल महिला या केवल पुरुष इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इस समस्या का प्रभाव महिला एवं पुरुष दोनों पर ही समान स्तर पर पड़ता है आमतौर पर 40% यह समस्या महिलाओं में होती है और 40% ही यह समस्या पुरुषों में पाई जाती है
इनफर्टिलिटी या नि:संतानता (बांझपन) यह सब एक ही है। यह एक ऐसी समस्या है जिसमें पति पत्नी संतान प्राप्ति के लिए प्रयास करते हैं लेकिन कुछ समस्याओं के चलते संतान सुख नहीं मिल पाता है।
क्या आप इनफर्टिलिटी का सामना कर रहे हैं? अगर हां तो आप अकेले नहीं हैं। बता दें कि करीब 15 प्रतिशत कपल ऐसे हैं जो इनफर्टिलिटी की समस्या का सामना कर रहे हैं। इनफर्टिलिटी उस स्थिति को कहते हैं जब लंबे समय तक सेक्स करने के बाद भी कोई कपल कंसीव नहीं कर पाता है। बार बार मिसकैरेज होना और गर्भ में ही शिशु का मर जाना भी इनफर्टिलिटी कहलाता है।
35 साल की उम्र में या इसके बाद प्रेग्नेंट होने में महिलाओं को कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। इस उम्र में कई बार महिलाओं को इनफर्टिलिटी का सामना भी करना पड़ता है। हर महिला कुछ तय एग्स के साथ पैदा होती है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वह एग्स अपने आप घटने लगते हैं। साथ ही जो एग्स बचते हैं उनके साथ प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आने लगती है। इस उम्र में यदि 6 महीने के प्रयास बाद भी आप गर्भवती नहीं होती हैं तो आपको डॉक्टर से कन्सल्ट करना चाहिए। इसके साथ ही आज हम आपको कुछ ऐसी टिप्स बता रहे हैं जिन्हें फॉलो कर आपको गर्भवती होने में मदद मिल सकती है।
इनफर्टिलिटी हमारी जीवनशैली की आदतों पर निर्भर करती है। सही आहार के साथ प्रजनन क्षमता को बेहतर किया जा सकता है। आपको बस यह पता होना चाहिए कि प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाए रखने के लिए क्या खाना चाहिए (Foods to boost Fertility) और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।
बांझपन या इनफर्टिलिटी की समस्या (Infertility problem) आज एक आम बात हो गई है। दिनों-दिन बढ़ती जा रही इस समस्या से ग्रस्त लोगों के तनाव को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों की कोशिशों ने काफी सफलता प्राप्त की है। अब कई तकनीक ऐसे आ गए हैं, जो आपको मां-बाप बनने की खुशी देने के लिए काफी हैं।
सिगरेट में मौजूद रसायन अंडाशय के भीतर एंटीऑक्सीडेंट स्तर में असंतुलन पैदा कर सकते हैं। यह असंतुलन निषेचन को प्रभावित कर सकता है और स्पष्ट है कि इसके बाद इम्प्लांटेशन में कमी आ जाएगी।
जानें, यदि आप तीस वर्ष के बाद (women's health problem after 30s) अपने शरीर के प्रति लापरवाही बरतेंगी, तो किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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बहुत सी महिलाओं की बच्चेदानी में गांठ होती है, जिसे मेडिकल भाषा में रसौली कहा जाता है। यह भी कई बार मां बनने में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।
महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, मूड स्विंग, वजाइना में सूखापन, जल्दी रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज, गर्भ धारण करने में असमर्थता, हार्ट रोग, सर्वाइकल कैंसर जैसी परेशानी सामान्यतया देखने को मिलती हैं.
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पीआरपी एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मरीज के शरीर से ब्लड निकाल कर उसे विशेष तकनीक की मदद से ब्लड कंपोनेंट को अलग किया गया, जिसमें प्लेटलेट्स रिच पदार्थ काफी मात्रा में होते हैं। इसमें ग्रोथ फैक्टर और हार्मोन में सुधार की क्षमता होती है।
एक आम धारणा यह भी है कि ज्यादा उम्र में शादी करने से इनफर्टिलिटी का जोखिम बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे बढ़ती हुई उम्र बढ़ा देती है बांझपन का जोखिम।
पीआरपी एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मरीज के शरीर से ब्लड निकाल कर उसे विशेष तकनीक की मदद से ब्लड कंपोनेंट को अलग किया गया, जिसमें प्लेटलेट्स रिच पदार्थ काफी मात्रा में होते हैं।