दिल की बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों में कीहोल सर्जरी के जरिए मल्टीपल स्टेंटिंग हो रही है कारगर
दिल की बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों में कीहोल सर्जरी के जरिए मल्टीपल स्टेंटिंग हो रही है कारगर।
दिल की बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों में कीहोल सर्जरी के जरिए मल्टीपल स्टेंटिंग हो रही है कारगर।
एएलसीएपीए दिल की जन्मजात बीमारी है, जिसमें कार्डियक मसल्स (दिल की मांसपेशियां) को ब्लड सप्लाई (खून की आपूर्ति) करने वाली बाईं कोरोनरी आर्टरी आर्योटा की बजाय पल्मोनरी आर्टरी से जुड़ी होती है। इस वजह से दिल की बाईं ओर की मांसपेशियों (कार्डियक मसल्स) को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और इस हिस्से में बिना ऑक्सीजन वाला खून ही पहुंचता है।
11वें ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' के मौके पर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइन्सेज इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने स्ट्रोक पर 11वें सीएमई (कन्टीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) सेमिनार का आयोजन किया।
बच्चे में नहीं था दायां फेफड़ा, चिकित्सा की भाषा में इसे हेमीट्रंकस कहा जाता है।
स्ट्रोक के बाद तकरीबन चार घंटे की अवधि को ''गोल्डेन पीरियड'' कहते हैं। इस अवधि के अंदर सही इलाज मिलने पर मरीज के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
दिल की बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों में कीहोल सर्जरी के जरिए मल्टीपल स्टेंटिंग हो रही है कारगर।
एएलसीएपीए दिल की जन्मजात बीमारी है, जिसमें कार्डियक मसल्स (दिल की मांसपेशियां) को ब्लड सप्लाई (खून की आपूर्ति) करने वाली बाईं कोरोनरी आर्टरी आर्योटा की बजाय पल्मोनरी आर्टरी से जुड़ी होती है। इस वजह से दिल की बाईं ओर की मांसपेशियों (कार्डियक मसल्स) को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और इस हिस्से में बिना ऑक्सीजन वाला खून ही पहुंचता है।
11वें ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' के मौके पर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइन्सेज इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने स्ट्रोक पर 11वें सीएमई (कन्टीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) सेमिनार का आयोजन किया।
बच्चे में नहीं था दायां फेफड़ा, चिकित्सा की भाषा में इसे हेमीट्रंकस कहा जाता है।
स्ट्रोक के बाद तकरीबन चार घंटे की अवधि को ''गोल्डेन पीरियड'' कहते हैं। इस अवधि के अंदर सही इलाज मिलने पर मरीज के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।