HIV positive मरीजों को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? जानिए पूरा डाइट प्लान
किन चीजों को खाने से HIV मरीजों की हालत और भी बिगड़ सकती है ? और किन चीजों के खाने से सेहत बेहतर बनी रह सकती है. एचआईवी के मरीज को अपनी डाइट का विशेष ध्यान देना चाहिए.
किन चीजों को खाने से HIV मरीजों की हालत और भी बिगड़ सकती है ? और किन चीजों के खाने से सेहत बेहतर बनी रह सकती है. एचआईवी के मरीज को अपनी डाइट का विशेष ध्यान देना चाहिए.
आयुर्वेद की मदद से भी एड्स और एचआईवी इंफेक्शन के लक्षणों से आराम दिलाने की कोशिश की जाती है।
यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2020 में 3 लाख बच्चे एचआईवी/एड्स से संक्रमित हुए थे। आज विश्व एड्स दिवस 2021 के मौके पर बच्चों में किस तरह से पहचानें कि वे एचआईवी संक्रमित हैं, बता रहे हैं द्वारका स्थित आकाश हेल्थकेयर के एचओडी, पिडियाट्रिक्स डॉ. सैयद हसन
आज भी लोगों को एड्स रोग के बारे में सही से पता नहीं है। लोगों के मन में एचआईवी/एड्स को लेकर कई गलत धारणाएं और मिथक (Myths about AIDS) व्याप्त हैं, जिसे दूर करना बहुत जरूरी है। जानें, एड्स से जुड़े कुछ मिथकों (Myths about HIV/AIDS) के बारे में यहां...
आज 'विश्व एड्स वैक्सीन दिवस 2020' (World AIDS Vaccine Day 2020) है। एड्स एक जानलेवा बीमारी है और इससे बचने का सिर्फ एक ही उपाय है कि लोग इसके प्रति जागरूक हों। एड्स से बचाव ही एड्स का बेहतर इलाज है।
वर्ल्ड एड्स डे पर सिर्फ रेड रिबन पहनना काफी नहीं है, एड्स के खिलाफ जंग लड़ने के लिए जरूरी है कि अपने दोस्तों में इस पर ज्यादा से ज्यादा बात करें और सुरक्षात्मक उपायों की ओर कदम बढ़ाएं।
वर्ल्ड एड्स डे 2018 की थीम है ‘’नो योर स्टेटस’’, आपको जानना चाहिए एड्स में अपने देश का भी स्टेटस
ये दक्षिण एशिया के किसी देश में एचआईवी पीड़ितों की सबसे ज्यादा संख्या है। यूनिसेफ ने चेताया है कि अगर इसे रोकने की कोशिशें तेज नहीं की गईं तो 2030 तक हर दिन दुनियाभर में एड्स की वजह से 80 किशोरों की मौत सकती है।
अनसेफ सेक्स के नुकसान पता होते हुए भी बहुत से पुरुष इसमें चूक कर जाते हैं। तो क्या एचआईवी और एड्स के संक्रमण को रोकने में ज्यादा कारगर हैं फीमेल कंडोम?
निजी प्रयासों के अलावा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी एड्स के उपचार की बजाए केवल पहचान और प्रचार के लिए ही बनाई जा रही हैं नीतियां।
वर्ष 1988 में पहली बार 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया गया था, जिसका उद्देश्य लोगों को इस महामारी के प्रति जागरुक करना था पर आज भी लोग इसके दुष्प्रभाव जानते हुए भी टेस्ट करवाने में झिझक महसूस करते हैं।
मां की वजह से पेट में पलने वाला बच्चा भी एचआईवी का शिकार हो सकता है?
किन चीजों को खाने से HIV मरीजों की हालत और भी बिगड़ सकती है ? और किन चीजों के खाने से सेहत बेहतर बनी रह सकती है. एचआईवी के मरीज को अपनी डाइट का विशेष ध्यान देना चाहिए.
आयुर्वेद की मदद से भी एड्स और एचआईवी इंफेक्शन के लक्षणों से आराम दिलाने की कोशिश की जाती है।
यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2020 में 3 लाख बच्चे एचआईवी/एड्स से संक्रमित हुए थे। आज विश्व एड्स दिवस 2021 के मौके पर बच्चों में किस तरह से पहचानें कि वे एचआईवी संक्रमित हैं, बता रहे हैं द्वारका स्थित आकाश हेल्थकेयर के एचओडी, पिडियाट्रिक्स डॉ. सैयद हसन
आज भी लोगों को एड्स रोग के बारे में सही से पता नहीं है। लोगों के मन में एचआईवी/एड्स को लेकर कई गलत धारणाएं और मिथक (Myths about AIDS) व्याप्त हैं, जिसे दूर करना बहुत जरूरी है। जानें, एड्स से जुड़े कुछ मिथकों (Myths about HIV/AIDS) के बारे में यहां...
आज 'विश्व एड्स वैक्सीन दिवस 2020' (World AIDS Vaccine Day 2020) है। एड्स एक जानलेवा बीमारी है और इससे बचने का सिर्फ एक ही उपाय है कि लोग इसके प्रति जागरूक हों। एड्स से बचाव ही एड्स का बेहतर इलाज है।
वर्ल्ड एड्स डे पर सिर्फ रेड रिबन पहनना काफी नहीं है, एड्स के खिलाफ जंग लड़ने के लिए जरूरी है कि अपने दोस्तों में इस पर ज्यादा से ज्यादा बात करें और सुरक्षात्मक उपायों की ओर कदम बढ़ाएं।
ये दक्षिण एशिया के किसी देश में एचआईवी पीड़ितों की सबसे ज्यादा संख्या है। यूनिसेफ ने चेताया है कि अगर इसे रोकने की कोशिशें तेज नहीं की गईं तो 2030 तक हर दिन दुनियाभर में एड्स की वजह से 80 किशोरों की मौत सकती है।
अनसेफ सेक्स के नुकसान पता होते हुए भी बहुत से पुरुष इसमें चूक कर जाते हैं। तो क्या एचआईवी और एड्स के संक्रमण को रोकने में ज्यादा कारगर हैं फीमेल कंडोम?
निजी प्रयासों के अलावा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी एड्स के उपचार की बजाए केवल पहचान और प्रचार के लिए ही बनाई जा रही हैं नीतियां।
वर्ष 1988 में पहली बार 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया गया था, जिसका उद्देश्य लोगों को इस महामारी के प्रति जागरुक करना था पर आज भी लोग इसके दुष्प्रभाव जानते हुए भी टेस्ट करवाने में झिझक महसूस करते हैं।
मां की वजह से पेट में पलने वाला बच्चा भी एचआईवी का शिकार हो सकता है?
वर्ल्ड एड्स डे 2018 की थीम है ‘’नो योर स्टेटस’’, आपको जानना चाहिए एड्स में अपने देश का भी स्टेटस