प्रेग्नेंसी प्लानिंग के दौरान इन बातों का रखें ख्याल, जल्दी कंसीव करने में मिलेगी मदद
Pregnancy Planning: अगर आप प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें। इनसे आपको गर्भधारण में आसानी हो सकती है।
Pregnancy Planning: अगर आप प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें। इनसे आपको गर्भधारण में आसानी हो सकती है।
6 danger signs in pregnancy: प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में अगर किसी तरह की परेशानी नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आइए जानते हैं इन गंभीर संकेतो के बारे में-
How many ultrasounds do you get during pregnancy : प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ अल्ट्रासाउंड बहुत ही जरूरी होते हैं। ताकि बच्चे की ग्रोथ का सही पता लगाया जा सके। आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी में कब-कब सोनोग्राफी की जरूरत होती है?
Causes Weird Cravings in pregnancy : प्रेग्नेंसी में कुछ महिलाओं को अजीब-अजीब सी चीजें खाने की इच्छा होती है। इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं, जिसपर ध्यान देने की जरूरत होती है। आइए डॉक्टर से जानते हैं प्रेग्नेंसी में अजीब से खाने की क्रेविंग क्यों होती है?
प्रेग्नेंसी में देर रात में सोना मां और बच्चा, दोनों के लिए नुकसानदायकक हो सकता है। इस दौरान आपको रात में समय पर सोना चाहिए।
What is the purpose of an echo test during pregnancy : प्रेग्नेंसी में इको टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे कई वजह हो सकती है। यह एक सुरक्षित अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया है। आइए जानते हैं इस टेस्ट के बारे में विस्तार से-
Stress during pregnancy : प्रेग्नेंसी में तनाव हो सकता है, लेकिन यह तनाव होने वाले बच्चे की दिल की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। आइए आपको बताते हैं।
डॉ. सुनीता चौहान बताती हैं कि हेल्दी प्रेग्नेंसी न केवल मां के लिए, बल्कि बच्चे के भविष्य के लिए भी बेहद अहम होती है। प्रेग्नेंसी के 9 महीने बच्चे के शारीरिक, मानसिक और इम्यून सिस्टम की नींव रखते हैं।
How long does it take to heal after giving birth with stitches : डिलीवरी के बाद एक महिला के शरीर के बहुत से बदलाव होते हैं। ऐसे में रिकवरी में काफी समय लग जाता है। आइए आपको बताते हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का मूड बहुत तेजी से बदल सकता है और कुछ महीनों में उन्हें चिड़चिड़ापन और भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना भी करना पड़ सकता है।
Kya sugar mein mahila pregnant ho sakti hai: एक्सपर्ट से जानिए कि जिन महिलाओं को लम्बे समय से डायबिटीज की बीमारी है उनके लिए गर्भधारण और सेफ प्रेगनेंसी संभव है या नहीं।
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Pregnancy Sleeping Position : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सही पोजीशन में सोना चाहिए, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। आइए जानते हैं इस बारे में-
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यदि आप प्रेग्नेंट हैं और चाहती हैं कि आप होने वाला बेबी हेल्दी हो। तो आपको कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखना चाहिए। गर्भावस्था में की गई जरा सी लापरवाही आपके बच्चे के लिए बड़ा खतरा हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के हार्मोन्स तेजी से बदलते हैं। ऐसे में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है और खाने की पसंद बदलने लगती है।
गर्भावस्था में महिलाओं की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे वे कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो सकती हैं. ऐसे में बचाव करना जरूरी है.
कई बार प्रेग्नेंसी में डायबिटीज की वजह से प्रीमैच्योर बर्थ या मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है।
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प्रेग्नेंसी में देर रात में सोना मां और बच्चा, दोनों के लिए नुकसानदायकक हो सकता है। इस दौरान आपको रात में समय पर सोना चाहिए।
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डॉ. सुनीता चौहान बताती हैं कि हेल्दी प्रेग्नेंसी न केवल मां के लिए, बल्कि बच्चे के भविष्य के लिए भी बेहद अहम होती है। प्रेग्नेंसी के 9 महीने बच्चे के शारीरिक, मानसिक और इम्यून सिस्टम की नींव रखते हैं।
How long does it take to heal after giving birth with stitches : डिलीवरी के बाद एक महिला के शरीर के बहुत से बदलाव होते हैं। ऐसे में रिकवरी में काफी समय लग जाता है। आइए आपको बताते हैं।
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गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के हार्मोन्स तेजी से बदलते हैं। ऐसे में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है और खाने की पसंद बदलने लगती है।
वे महिलाएं, जो दिन में बहुत ज्यादा मात्रा में प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन करती हैं उनमें कम इनटेक वाली महिलाओं के मुकाबले 26 फीसदी ज्यादा खतरा पाया गया है।
वे महिलाएं, जो इस समस्या का शिकार होती हैं उनके मन में पहला सवाल यही उठता है कि आखिर इसे कैसे रोका जा सकता है। जानिए ऐसे टिप्स, जो बच्चे के लिए भी हैं सेफ।
अमेरिका के मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध वैक्सीन लेनी चाहिए।
आमतौर पर यह समझा जाता है कि महिलाओं के लिए महीने में कुछ विशेष दिनों में ही प्रेगनेंट हो पाना संभव हो पाता है।
भारतीय भोजन में प्रोटीन की कमी होती है इसी को ध्यान में रखते हुए सूक्ष्म पोषक तत्वों का सेवन करना महत्वपूर्ण होता है। हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए डाइट में ये न्यूट्रिएंट शामिल करें।
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प्रेग्नेंसी में सभी पोषक तत्वों से भरपूर चीजे खानी चाहिए। जो आपके बच्चे के बेहतर विकास में मदद करे। तो आइए जानते हैं। प्रेग्नेंसी में कौन फूड्स खाने चाहिए।
प्रेग्नेंसी में गैस की परेशानी होना सामान्य है। अगर आपको इस दौरान काफी ज्यादा गैस की परेशानी रहती है, तो आप कुछ असरदार नुस्खों का सहारा ले सकते हैं।
गर्भावस्था में महिलाओं की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे वे कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो सकती हैं. ऐसे में बचाव करना जरूरी है.
कई बार प्रेग्नेंसी में डायबिटीज की वजह से प्रीमैच्योर बर्थ या मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है।
कुछ खास बाते हैं जिनका ध्यान रखा जाए तो प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला हर प्रॉब्लम से सुरक्षित रह सकती हैं.आइए जानते हैं कुछ खास टिप्स हैं जिनको आप फॉलो कर अपनी प्रेग्नेंसी को सेफ रख सकती हैं.
भोजन का ध्यान रखें, गर्भवती बनने के लिए हेल्दी डाइट लें, नियमित रूप से खाना खाए, ज़्यादा खाना न खाएं, आपके खाने में पोषक तत्वों का धयान रखें। इसके साथ ही कसरत करें प्रेग्नेंसी के दौरान व्यायाम ज़रूर करें, कम से कम दिन में आधा घंटा वॉक जरूर करें।
इस डाइट को फॉलो करने से अपनी प्रेग्नेंसी को रख सकते है स्वस्थ.
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