
प्रेगनेंसी में कौन से फल खाने चाहिए?
प्रेगनेंसी में फल का सेवन फायदेमंद होता है, लेकिन क्या आपको पता है गर्भावस्था के दौरान कौन सा फल खाना चाहिए, चलिए जानते हैं।

प्रेगनेंसी में फल का सेवन फायदेमंद होता है, लेकिन क्या आपको पता है गर्भावस्था के दौरान कौन सा फल खाना चाहिए, चलिए जानते हैं।

कुछ खास बाते हैं जिनका ध्यान रखा जाए तो प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला हर प्रॉब्लम से सुरक्षित रह सकती हैं.आइए जानते हैं कुछ खास टिप्स हैं जिनको आप फॉलो कर अपनी प्रेग्नेंसी को सेफ रख सकती हैं.

प्रेगनेंसी के कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जो कंसीव करते ही दिख जाते हैं। आइए जानते हैं प्रेगनेंसी के एकदम शुरुआती लक्षण (Early Sign of Pregnancy in hindi)

प्रेगनेंसी में एक्टिव रहने के लिए आप हल्की-फुल्की कसरत करनी चाहिए। लेकिन, अगर आपको यह समझ नहीं आ रहा कि कहां से और कैसे शुरू करें तो, पढ़ें यह लेख। ( Exercising during Pregnancy)

Cough and Cold in Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान शरीर में इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है। इसलिए आसानी से इंफेक्शन होने का खतरा होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को सर्दी-जुकाम की समस्या (Cough and Cold in Pregnancy) जल्दी होने लगती है, लेकिन इस दौरान ज्यादा दवाई लेने से बचना चाहिए।

कुछ योग के अभ्यास से आपको प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है। जानें, प्रेग्नेंसी के दौरान कौन से योगासन का अभ्यास (Yogasana For Pregnant Women in Hindi) करने से आप रह सकती हैं स्वस्थ ...

प्रेगनेंसी में एक्टिव रहने से ना केवल फिजिकली बल्कि, मेंटली भी फिट और स्ट्रॉन्ग रहने में मदद होती है। इससे, बच्चे की सेहत को भी बेहतर बनाने में रखना होता है। जैसा कि, प्रेगनेंसी में वेट बहुत अधिक बढ़ जाता है। इसी तरह फिटनेस की कमी के कारण प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में दर्द और तकलीफें होती रहती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान एक्टिव रहने की कोशिश करें।

कुछ घरेलू उपायों से आप प्रेग्नेंसी में होने वाली उल्टी की समस्या को कम कर सकती हैं।

भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करने में सहायक है क्योंकि इसमें विटामिन सी, कैरोटिनॉइड और बायोफ्लेविनॉइड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढने से बचाता है और शरीर में खून के फ्लो को भी बढाता है।

मां बनने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है एक स्त्री का स्वस्थ होना। इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य शामिल हैं। कितने ही मामलों में ऐसा देखने में आया है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद स्त्री मां नहीं बन पाती।

इस खबर से वो बहुत ज्यादा खुश हैं। इस गुड न्यूज को उन्होंने अपने फैंस के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

इस समय यूटरस का साइज बढ़ने से लेटने में काफी असहजता महसूस होती है। इसको कम करने के लिए आप अपने कमर के पीछे या पेट के नीचे और चाहे तो अपनी टांगो के बीच में तकिये का इस्तेमाल कर सकती हैं।

स्तन कैंसर के मरीजों के लिए गर्भावस्था संभव है। फिलहाल ऐसा कोई कारण या सबूत नहीं है, जिससे माना जाए कि स्तन कैंसर के इलाज के बाद गर्भवती होने से मां या शिशु को किसी प्रकार का जोखिम हो सकता है।

इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं इस पर भी बहस होती रही है। ऐसा ही एक तथ्य है पीरियड्स में बाल धोना या नहीं धोना। आइए जानते हैं क्या है सच्चाई।

सप्ताह में एक बार काले चने खाने से शरीर को एनर्जी और फ्रेशनेस मिलती है। साथ ही बढ़ते बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है।

। इसमें मौजूद विटामिन सी अतिरिक्ता वसा को कम करने में मदद करता है। इसमें फोलेट की मौजूदगी भी मोटापे से निजात दिलाने में मददगार है।

इस अवस्था में इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जो बेबी के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

गर्भावस्था के समय बच्चे के सही विकास के लिए कई पोषक तत्वों वाले खाद्य पदार्थो का सेवन करना लाभकारी होता है।

जेस्टेशनल डायबिटीज़ वाली महिलाओं के बच्चों में मोटापे, दिल से जुड़ी गड़बड़ियों और टाइप 2 डायबिटीज़ का ख़तरा जीवनभर के लिए होता है।

प्रेगनेंसी को आसान बनाना है, तो हर दिन लीजिए गहरी सांस

इसके पीछे का कारण यह होता है कि महिलाओं का गर्भ खिसकने का डर रहता है।

बारिश का सही तरह से आप लुत्फ उठा पाएं, इसके लिए प्रेगनेंट महिलाओं को खास ध्यान रखना जरूरी हो जाता है, ताकि उनके पेट में पल रहे बच्चे को कोई नुकसान न पहुंचे।

गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर होने का पता चले तो इस स्थिति को प्रेगनेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है।

नई IUI तकनीक महिलाओं में प्रेगनेंसी के लिए सबसे बेहतर

Cough and Cold in Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान शरीर में इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है। इसलिए आसानी से इंफेक्शन होने का खतरा होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को सर्दी-जुकाम की समस्या (Cough and Cold in Pregnancy) जल्दी होने लगती है, लेकिन इस दौरान ज्यादा दवाई लेने से बचना चाहिए।

कुछ योग के अभ्यास से आपको प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है। जानें, प्रेग्नेंसी के दौरान कौन से योगासन का अभ्यास (Yogasana For Pregnant Women in Hindi) करने से आप रह सकती हैं स्वस्थ ...

प्रेगनेंसी में एक्टिव रहने से ना केवल फिजिकली बल्कि, मेंटली भी फिट और स्ट्रॉन्ग रहने में मदद होती है। इससे, बच्चे की सेहत को भी बेहतर बनाने में रखना होता है। जैसा कि, प्रेगनेंसी में वेट बहुत अधिक बढ़ जाता है। इसी तरह फिटनेस की कमी के कारण प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में दर्द और तकलीफें होती रहती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान एक्टिव रहने की कोशिश करें।

कुछ घरेलू उपायों से आप प्रेग्नेंसी में होने वाली उल्टी की समस्या को कम कर सकती हैं।

भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करने में सहायक है क्योंकि इसमें विटामिन सी, कैरोटिनॉइड और बायोफ्लेविनॉइड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढने से बचाता है और शरीर में खून के फ्लो को भी बढाता है।

मां बनने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है एक स्त्री का स्वस्थ होना। इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य शामिल हैं। कितने ही मामलों में ऐसा देखने में आया है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद स्त्री मां नहीं बन पाती।

इस खबर से वो बहुत ज्यादा खुश हैं। इस गुड न्यूज को उन्होंने अपने फैंस के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

इस समय यूटरस का साइज बढ़ने से लेटने में काफी असहजता महसूस होती है। इसको कम करने के लिए आप अपने कमर के पीछे या पेट के नीचे और चाहे तो अपनी टांगो के बीच में तकिये का इस्तेमाल कर सकती हैं।

स्तन कैंसर के मरीजों के लिए गर्भावस्था संभव है। फिलहाल ऐसा कोई कारण या सबूत नहीं है, जिससे माना जाए कि स्तन कैंसर के इलाज के बाद गर्भवती होने से मां या शिशु को किसी प्रकार का जोखिम हो सकता है।

इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं इस पर भी बहस होती रही है। ऐसा ही एक तथ्य है पीरियड्स में बाल धोना या नहीं धोना। आइए जानते हैं क्या है सच्चाई।

इस अवस्था में इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जो बेबी के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

गर्भावस्था के समय बच्चे के सही विकास के लिए कई पोषक तत्वों वाले खाद्य पदार्थो का सेवन करना लाभकारी होता है।

जेस्टेशनल डायबिटीज़ वाली महिलाओं के बच्चों में मोटापे, दिल से जुड़ी गड़बड़ियों और टाइप 2 डायबिटीज़ का ख़तरा जीवनभर के लिए होता है।

इसके पीछे का कारण यह होता है कि महिलाओं का गर्भ खिसकने का डर रहता है।

बारिश का सही तरह से आप लुत्फ उठा पाएं, इसके लिए प्रेगनेंट महिलाओं को खास ध्यान रखना जरूरी हो जाता है, ताकि उनके पेट में पल रहे बच्चे को कोई नुकसान न पहुंचे।

गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर होने का पता चले तो इस स्थिति को प्रेगनेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है।

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सप्ताह में एक बार काले चने खाने से शरीर को एनर्जी और फ्रेशनेस मिलती है। साथ ही बढ़ते बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है।

। इसमें मौजूद विटामिन सी अतिरिक्ता वसा को कम करने में मदद करता है। इसमें फोलेट की मौजूदगी भी मोटापे से निजात दिलाने में मददगार है।

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