Ebola : जानिए WHO को क्यों करनी पड़ी मेडिकल इमरजेंसी की घोषणा
इबोला (Ebola) एक खतरनाक वायरस है। जिसकी मृत्यु दर 90 फीसदी है। कांगो के गोमा इलाके में इबोला (Ebola) का मरीज पाया जाने के बाद डब्ल्यूएचओ ने इसे मेडिकल इमरजेंसी घोषित किया है।
इबोला (Ebola) एक खतरनाक वायरस है। जिसकी मृत्यु दर 90 फीसदी है। कांगो के गोमा इलाके में इबोला (Ebola) का मरीज पाया जाने के बाद डब्ल्यूएचओ ने इसे मेडिकल इमरजेंसी घोषित किया है।
अधिकतर मामलों में इबोला पीड़ितों की मृत्यु हो जाती है। बीमारी बढ़ने के साथ ये समस्याएं उभर सकती हैं- शरीर के अंगों का काम करना बंद हो जाना, अत्यधिक रक्तस्राव, पीलिया, दौरा पड़ना, कोमा और सदमा आदि। इसके लक्षणों को पहचान कर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
इबोला वायरस बहुत ही खतरनाक है। अभी तक इसका कोई इलाज नहीं मिल पाया है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, थूक और पसीने से भी फैल सकता है। WHO ने युगांडा में अभी एक पांच साल के बच्चे में इबोला वायरस से पीडि़त होने की पुष्टि की है। हालांकि पिछले दस महीनों में कांगो में दो हजार से ज्यादा मामले देखने में आए हैं। इसलिए सावधान होने की जरूरत है।
इबोला के शुरुआती लक्षणों में उल्टी, दस्त, बुखार, सिरदर्द, रक्तस्राव, आंखें लाल होना और गले में कफ आदि शामिल हैं।
इबोला (Ebola) एक खतरनाक वायरस है। जिसकी मृत्यु दर 90 फीसदी है। कांगो के गोमा इलाके में इबोला (Ebola) का मरीज पाया जाने के बाद डब्ल्यूएचओ ने इसे मेडिकल इमरजेंसी घोषित किया है।
अधिकतर मामलों में इबोला पीड़ितों की मृत्यु हो जाती है। बीमारी बढ़ने के साथ ये समस्याएं उभर सकती हैं- शरीर के अंगों का काम करना बंद हो जाना, अत्यधिक रक्तस्राव, पीलिया, दौरा पड़ना, कोमा और सदमा आदि। इसके लक्षणों को पहचान कर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
इबोला वायरस बहुत ही खतरनाक है। अभी तक इसका कोई इलाज नहीं मिल पाया है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, थूक और पसीने से भी फैल सकता है। WHO ने युगांडा में अभी एक पांच साल के बच्चे में इबोला वायरस से पीडि़त होने की पुष्टि की है। हालांकि पिछले दस महीनों में कांगो में दो हजार से ज्यादा मामले देखने में आए हैं। इसलिए सावधान होने की जरूरत है।
इबोला के शुरुआती लक्षणों में उल्टी, दस्त, बुखार, सिरदर्द, रक्तस्राव, आंखें लाल होना और गले में कफ आदि शामिल हैं।