क्या डायबिटीज जेनेटिक होता है? जानें यह माता-पिता से बच्चों तक कैसे पहुंचता है
Is Diabetes Genetic: डायबिटीज एक जेनेटिक बीमारी है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों को माता-पिता से बच्चों डायबिटीज विरासत में मिले।
Is Diabetes Genetic: डायबिटीज एक जेनेटिक बीमारी है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों को माता-पिता से बच्चों डायबिटीज विरासत में मिले।
Causes of Type 2 Diabetes in children : बच्चों में भी टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा रहता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की क्या है वजह और कैसे करें इसकी पहचान?
डायबिटीज अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा और टीनएजर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। बार-बार प्यास लगना और अचानक वजन घटने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज ना करें – ये बढ़ते शुगर लेवल का संकेत हो सकते हैं।
Bachchon mein diabetes ke karan: बच्चों को पोषण देने के लिए खिलाए जाने वाले कुछ हेल्दी फूड्स को उनके लिए नुकसानदायक पाया गया है। कुछ स्टडीज के अनुसार ये हेल्दी फूड्स भी बच्चों में डायबिटीज का रिस्क बढ़ा सकते हैं।
Type 1.5 Diabetes : टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज काफी कॉमन है। लेकिन क्या आप टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानते हैं? आइए जानते हैं क्या हैं इसके लक्षण और कारण?
डायबिटीज एक दीर्घकालिक स्थिति है जो आपके शरीर द्वारा भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने के तरीके को प्रभावित करती है। डायबिटीज के दो मुख्य प्रकार हैं यानी टाइप 1 और टाइप 2।
Diabetes in Children in Hindi: आजकल बच्चों में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आइए, जानते हैं बच्चों में डायबिटीज के लक्षण बचाव के उपाय -
पढ़ें कुछ ऐसी ही डाइट टिप्स जो डायबिटीज से पीड़ित बच्चों को उनकी कंडीशन को मैनेज करने में मददगार साबित हो सकती हैं।
type 1 diabetes: टाइप 2 डायबिटीज के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज के बारे में अभी भी काफी लोगों को पता नहीं है। यह बीमारी उस से भी ज्यादा खतरनाक है, जो बड़ों ज्यादा बच्चों को प्रभावित करती है।
ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के अलावा, बच्चों को कुछ और भी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। ऐसी ही कुछ टिप्स के बारे में पढ़ें यहां।
गर्भवती महिलाओं द्वारा मारिजुआना और नशीली दवाओं के सेवन से गर्भस्थ शिशु हो सकता है मोटापे और डायबिटीज का शिकार।
बचपन में लो ब्लड शुगर की स्थिति या हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) का इलाज कराने से छोटे बच्चों में आगे चलक उनके दिमाग को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद हो सकती है।
हाल ही में एसोचैम द्वारा सार्वजनिक की गयी एक रिपोर्ट में सामने आया कि भारत में दो तिहाई लोगों में गैर-संचारी बीमारियों की संभावना अधिक है।
एक ऐसी अनोखी तकनीक का पता लगाया है। जिससे, जन्म लेने के बाद भी इस बात का पता लगाया जा सकेगा कि नवजात बच्चे को भविष्य में टाइप 1 डायबिटीज़ (Type 1 Diabetes) हो सकता है। जर्नल नेचर मेडिसिन (journal Nature Medicine) में छपे इस शोध के बारे में ऐसा कहा जा रहा है कि, यह नवजात शिशुओं में आजीवन रहने वाली इस परेशानी का पता लगना ज्यादा आसान हो जाता है। एक अमेरिकी एनजीओ जेडीआरएफ से जुड़े और इस स्टडी में हिस्सा ले रहे संजोय दत्ता ने कहा कि, टाइप 1 डायबिटीज़ की स्थिति बनने के लिए जेनेटिक या अनुवांशिक कारण ज़िम्मेदार होते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से नवजात बच्चों में इस बीमारी का पता नहीं लगाया जा सकता।
डायबिटीज दो तरह (Types of Diabetes) की होती है। डायबिटीज टाइप-1 और डायबिटीज टाइप-2 (Type-1 Diabetes and Type-2 Diabetes) । इन दोनों तरह की डायबिटीज में काफी अंतर होता है। जानिए, आखिर दोनों डायबिटीज के बीच क्या होता है खास अंतर...
मौसमी चटर्जी की बेटी पायल सिन्हा जुवेनाइल डाइटबिटीज (Juvenile Diabetes) की मरीज थीं. जवेनाइल डायबिटीज को टाइप 1 डायबिटीज भी कहते हैं. टाइप 1 डायबिटीज में विशेष देखभाल और इलाज की जरूरत होती है. टाइप 1 डायबिटीज रोगी इंसुलिन पर पूरी तरह से निर्भर होता है. जुवेनाइल डायबिटीज की वजह से मौसमी चटर्जी की बेटी पायल एक बार कोमा में भी जा चुकी थीं.
छोटे बच्चों के आहार की शुरूआत अकसर गेहूं से बने व्यंजनों से की जाती है, पर डेनमार्क में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि बचपन में ग्लूटेन का अतिरिक्त सेवन शिशुओं में टाइप 1 डायबिटीज का जोखिम बढ़ा देता है।
एक खास बात और ध्यान में रखनी चाहिए कि बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children) माता-पिता के डायबिटीक होने की वजह से नहीं होती है. बच्चों में डायबिटीज होने का मुख्य कारण ऑटोइम्यून की बीमारी मानी जाती है.
Is Diabetes Genetic: डायबिटीज एक जेनेटिक बीमारी है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों को माता-पिता से बच्चों डायबिटीज विरासत में मिले।
Causes of Type 2 Diabetes in children : बच्चों में भी टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा रहता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की क्या है वजह और कैसे करें इसकी पहचान?
Type 1.5 Diabetes : टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज काफी कॉमन है। लेकिन क्या आप टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानते हैं? आइए जानते हैं क्या हैं इसके लक्षण और कारण?
डायबिटीज एक दीर्घकालिक स्थिति है जो आपके शरीर द्वारा भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने के तरीके को प्रभावित करती है। डायबिटीज के दो मुख्य प्रकार हैं यानी टाइप 1 और टाइप 2।
Diabetes in Children in Hindi: आजकल बच्चों में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आइए, जानते हैं बच्चों में डायबिटीज के लक्षण बचाव के उपाय -
पढ़ें कुछ ऐसी ही डाइट टिप्स जो डायबिटीज से पीड़ित बच्चों को उनकी कंडीशन को मैनेज करने में मददगार साबित हो सकती हैं।
type 1 diabetes: टाइप 2 डायबिटीज के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज के बारे में अभी भी काफी लोगों को पता नहीं है। यह बीमारी उस से भी ज्यादा खतरनाक है, जो बड़ों ज्यादा बच्चों को प्रभावित करती है।
ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के अलावा, बच्चों को कुछ और भी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। ऐसी ही कुछ टिप्स के बारे में पढ़ें यहां।
गर्भवती महिलाओं द्वारा मारिजुआना और नशीली दवाओं के सेवन से गर्भस्थ शिशु हो सकता है मोटापे और डायबिटीज का शिकार।
बचपन में लो ब्लड शुगर की स्थिति या हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) का इलाज कराने से छोटे बच्चों में आगे चलक उनके दिमाग को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद हो सकती है।
हाल ही में एसोचैम द्वारा सार्वजनिक की गयी एक रिपोर्ट में सामने आया कि भारत में दो तिहाई लोगों में गैर-संचारी बीमारियों की संभावना अधिक है।
एक ऐसी अनोखी तकनीक का पता लगाया है। जिससे, जन्म लेने के बाद भी इस बात का पता लगाया जा सकेगा कि नवजात बच्चे को भविष्य में टाइप 1 डायबिटीज़ (Type 1 Diabetes) हो सकता है। जर्नल नेचर मेडिसिन (journal Nature Medicine) में छपे इस शोध के बारे में ऐसा कहा जा रहा है कि, यह नवजात शिशुओं में आजीवन रहने वाली इस परेशानी का पता लगना ज्यादा आसान हो जाता है। एक अमेरिकी एनजीओ जेडीआरएफ से जुड़े और इस स्टडी में हिस्सा ले रहे संजोय दत्ता ने कहा कि, टाइप 1 डायबिटीज़ की स्थिति बनने के लिए जेनेटिक या अनुवांशिक कारण ज़िम्मेदार होते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से नवजात बच्चों में इस बीमारी का पता नहीं लगाया जा सकता।
डायबिटीज दो तरह (Types of Diabetes) की होती है। डायबिटीज टाइप-1 और डायबिटीज टाइप-2 (Type-1 Diabetes and Type-2 Diabetes) । इन दोनों तरह की डायबिटीज में काफी अंतर होता है। जानिए, आखिर दोनों डायबिटीज के बीच क्या होता है खास अंतर...
मौसमी चटर्जी की बेटी पायल सिन्हा जुवेनाइल डाइटबिटीज (Juvenile Diabetes) की मरीज थीं. जवेनाइल डायबिटीज को टाइप 1 डायबिटीज भी कहते हैं. टाइप 1 डायबिटीज में विशेष देखभाल और इलाज की जरूरत होती है. टाइप 1 डायबिटीज रोगी इंसुलिन पर पूरी तरह से निर्भर होता है. जुवेनाइल डायबिटीज की वजह से मौसमी चटर्जी की बेटी पायल एक बार कोमा में भी जा चुकी थीं.
छोटे बच्चों के आहार की शुरूआत अकसर गेहूं से बने व्यंजनों से की जाती है, पर डेनमार्क में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि बचपन में ग्लूटेन का अतिरिक्त सेवन शिशुओं में टाइप 1 डायबिटीज का जोखिम बढ़ा देता है।
एक खास बात और ध्यान में रखनी चाहिए कि बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children) माता-पिता के डायबिटीक होने की वजह से नहीं होती है. बच्चों में डायबिटीज होने का मुख्य कारण ऑटोइम्यून की बीमारी मानी जाती है.
इन्सुलिन की कमी से बच्चों में भी मधुमेह का खतरा
मधुमेह के दो मुख्य प्रकार हैं -टाईप 1 और टाईप 2। दोनों तरह का मधुमेह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों में टाईप 1 मधुमेह की संभावना अधिक होती है।
Bachchon mein diabetes ke karan: बच्चों को पोषण देने के लिए खिलाए जाने वाले कुछ हेल्दी फूड्स को उनके लिए नुकसानदायक पाया गया है। कुछ स्टडीज के अनुसार ये हेल्दी फूड्स भी बच्चों में डायबिटीज का रिस्क बढ़ा सकते हैं।
डायबिटीज अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा और टीनएजर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। बार-बार प्यास लगना और अचानक वजन घटने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज ना करें – ये बढ़ते शुगर लेवल का संकेत हो सकते हैं।