कोरोना की वैक्सीन लगाने से ना केवल बढ़ती है इम्यूनिटी बल्कि बूस्ट होती है मेंटल हेल्थ भी
एक नयी स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों को कोविड वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिली है, उनमें मनोवैज्ञानिक समस्याओं से राहत मिलते देखी गयी।
एक नयी स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों को कोविड वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिली है, उनमें मनोवैज्ञानिक समस्याओं से राहत मिलते देखी गयी।
एमपावर द सेंटर (कोलकाता) की मनोचिकित्सक और प्रमुख डॉ. प्रीति पारख बता रही हैं किस तरह से कोरोना महामारी में युवा पीढ़ी मानसिक सेहत से संबंधित समस्याओं से परेशान है और उनमें इसके क्या-क्या लक्षण नजर आ रहे हैं...
एक नयी स्टडी का दावा है कि लॉकडाउन में लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर ना केवल नकारात्मक प्रभाव पड़े बल्कि कुछ लोगों के लए लॉकडाउन पॉजिटिव भी साबित हुआ। (Positive effects of isolation)
महामारी के दौरान तनाव और असुरक्षा की भावनाओं के चलते लोगों में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में बहुत अधिक बढ़ोतरी देखी गयी।
दुनिया 2020 के अधिकांश मानसिक स्वास्थ्य लक्ष्यों से चूक गई है और लोगों को उनकी जरूरत की मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में विफल रही है। डब्लूएचओ की ये रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की गई।
यूनिसेफ ने 21 देशों में एक सर्वेक्षण किया, जिसमें यह बात सामने आई है कि भारत में सिर्फ 41 % युवा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए समर्थन लेने के इच्छुक थे, वहीं 21 देशों के लिए यह औसत 83 % था।
Anxiety Vs Stress: देखिये ये वीडियो जान ने के लिए की एंग्जायटी आखिर होती क्या है और कैसे इसे ट्रीट किआ जा सकता है !
'डॉक्टर्स डे 2021' पर जानें, किस तरह कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर्स खुद की फिटनेस का ख्याल रखते हैं...
कोरोनावायरस के चलते चिंतित होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें मैनेज करना भी बहुत जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर नहीं बनाकर रखेंगे, तो आपके लिए ही नुकसानदायक होगा।
एक्सपर्ट्स का दावा है कि अगर लोग अपने बॉडी क्लॉक के खिलाफ ना जाते हुए अपने स्लीपिंग पैटर्न में सुधार करते हैं तो उनके लिए डिप्रेशन से बच पाना आसान हो जाता है। (Tips for Beating Depression)
एक नयी स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों को कोविड वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिली है, उनमें मनोवैज्ञानिक समस्याओं से राहत मिलते देखी गयी।
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यूनिसेफ ने 21 देशों में एक सर्वेक्षण किया, जिसमें यह बात सामने आई है कि भारत में सिर्फ 41 % युवा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए समर्थन लेने के इच्छुक थे, वहीं 21 देशों के लिए यह औसत 83 % था।
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