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Colorectal cancer से बचाव के लिए स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी? डॉक्टर बता रहे हैं किस उम्र से करानी चाहिए जांच

Colorectal cancer से बचाव के लिए स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी? डॉक्टर बता रहे हैं किस उम्र से करानी चाहिए जांच

Colorectal cancer : मार्च का महीना कोलोरेक्टल कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर डॉ. मनदीप बता रहे हैं कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव के लिए स्क्रीनिंग जरूरी क्यों है?

पेट दर्द, कब्ज या मल में खून? ये हो सकते हैं कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती संकेत; न करें नजरअंदाज

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कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत (कोलन) और मलाशय (रेक्टम) में होने वाला कैंसर है। यह धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआती स्टेज में इस कैंसर के लक्षण सामान्य पेट दर्द और कब्ज की समस्या जैसे लग सकते हैं।

बार-बार कब्ज या खून आना सिर्फ पाचन समस्या नहीं, डॉक्टर ने दिया कोलोरेक्टल कैंसर का संकेत

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Colorectal Cancer Kya Hota Hai: अगर आपको अक्सर कब्ज रहता है या मल में खून निकलता है तो यह कोलोरेक्टल कैंसर का लक्षण हो सकता है। आइए हम इसके बारे में डॉक्टर से जानते हैं।

कोलोरेक्टल कैंसर: आंतों से शुरू हो कर मलाशय तक फैल जाता है ये कैंसर, जानें इसके 7 शुरुआती संकेत

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Colorectal Cancer: कोलोरेक्टल कैंसर 40 के बाद की उम्र वाले लोगों में बढ़ रहा है। आइए जानते हैं इसके पीछे कारण क्या है और इसके लक्षणों को कैसे पहचानें।

Colorectal Cancer Diagnosis: कोरोना के दौरान कोलोरेक्टल कैंसर के निदान में 40% से अधिक गिरावट दर्ज, ये हैं कोलोरेक्टल कैंसर के 10 लक्षण

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कोरोनावायरस महामारी के दौरान कैंसर की जांच और निदान में काफी गिरावट आई है, जिसमें स्पेनिश शोधकर्ताओं ने नए निष्कर्ष पेश किए हैं, जिसमें दिखाया गया है कि कोविड के दौरान एक साल में निदान किए गए कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) के मामलों की संख्या में 40 फीसदी की गिरावट आई है।

क्या होता है कोलोन कैंसर और कब करानी चाहिए इसकी जांच? जानिए कोलोन कैंसर से जुड़ी बड़ी बातें

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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, कोलोन कैंसर दुनिया भर में पुरुषों में तीसरा सबसे आम कैंसर है। भारत में, पुरुषों में कोलन कैंसर और रेक्टल कैंसर की वार्षिक घटना दर क्रमश: 4.4 और 4.1 है। महिलाओं में कोलोन कैंसर के लिए वार्षिक घटनाओं की दर 3.9 प्रति 1,00,000 है।

पुरुषों में होने वाला तीसरा सबसे आम कैंसर है कोलोरेक्टल कैंसर, 40 वर्ष से कम आयु के युवा हो रहे हैं प्रभावित

पुरुषों में होने वाला तीसरा सबसे आम कैंसर है कोलोरेक्टल कैंसर, 40 वर्ष से कम आयु के युवा हो रहे हैं प्रभावित

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के एक अध्ययन के अनुसार, पुरुषों में कोलोरेक्टल कैंसर से मृत्यु दर काफी अधिक है। जहां पुरुषों और महिलाओं दोनों को पेट के कैंसर का खतरा होता है, वहीं पुरुषों में मलाशय का कैंसर होने की आशंका अधिक होती है।

colorectal cancer prevention and treatment

colorectal cancer prevention and treatment

एस्पिरिन दवा से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा (colorectal cancer risk) कम होता है. बुखार, दर्द और सूजन में उपयोग की जाने वाली एस्पिरिन कोलन कैंसर से बचाती है. आप इन खाद्य पदार्थों के सेवन से भी खुद को कैंसर के खतरे से बचा सकते हैं.

colorectal cancer causes symptoms prevention and treatment

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कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) का खतरा हाल के वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है. कोलोरेक्टल कैंसर का मुख्य लक्षण मल त्याग करते समय खून आना है. गैस, अपच और कब्ज की समस्या अगर लगातार रहती है, तो कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer symptoms) का खतरा बढ़ जाता है.

अपोलो के विशेषज्ञों ने ‘डू नाॅट अज्यूम’ अभियान से कोलोरेक्टल कैंसर के बारे में बढ़ाई जागरूकता

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अभियान ‘डू नाॅट अज्यूम ’ के माध्यम से हम लोगों को यह बताना चाहते हैं कि उन्हें सिर्फ यह सोच कर निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए कि अभी उनकी उम्र कम है या उनके परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास नहीं है। ऐसे में वे बीमारी से पूरी तरह से सुरक्षित हैं। लोेगों को अपने स्वास्थ्य के बारे में सतर्क रहना चाहिए और कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

Colorectal cancer से बचाव के लिए स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी? डॉक्टर बता रहे हैं किस उम्र से करानी चाहिए जांच

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Colorectal cancer : मार्च का महीना कोलोरेक्टल कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर डॉ. मनदीप बता रहे हैं कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव के लिए स्क्रीनिंग जरूरी क्यों है?

पेट दर्द, कब्ज या मल में खून? ये हो सकते हैं कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती संकेत; न करें नजरअंदाज

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कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत (कोलन) और मलाशय (रेक्टम) में होने वाला कैंसर है। यह धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआती स्टेज में इस कैंसर के लक्षण सामान्य पेट दर्द और कब्ज की समस्या जैसे लग सकते हैं।

बार-बार कब्ज या खून आना सिर्फ पाचन समस्या नहीं, डॉक्टर ने दिया कोलोरेक्टल कैंसर का संकेत

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Colorectal Cancer Kya Hota Hai: अगर आपको अक्सर कब्ज रहता है या मल में खून निकलता है तो यह कोलोरेक्टल कैंसर का लक्षण हो सकता है। आइए हम इसके बारे में डॉक्टर से जानते हैं।

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Colorectal Cancer: कोलोरेक्टल कैंसर 40 के बाद की उम्र वाले लोगों में बढ़ रहा है। आइए जानते हैं इसके पीछे कारण क्या है और इसके लक्षणों को कैसे पहचानें।

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कोरोनावायरस महामारी के दौरान कैंसर की जांच और निदान में काफी गिरावट आई है, जिसमें स्पेनिश शोधकर्ताओं ने नए निष्कर्ष पेश किए हैं, जिसमें दिखाया गया है कि कोविड के दौरान एक साल में निदान किए गए कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) के मामलों की संख्या में 40 फीसदी की गिरावट आई है।

क्या होता है कोलोन कैंसर और कब करानी चाहिए इसकी जांच? जानिए कोलोन कैंसर से जुड़ी बड़ी बातें

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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, कोलोन कैंसर दुनिया भर में पुरुषों में तीसरा सबसे आम कैंसर है। भारत में, पुरुषों में कोलन कैंसर और रेक्टल कैंसर की वार्षिक घटना दर क्रमश: 4.4 और 4.1 है। महिलाओं में कोलोन कैंसर के लिए वार्षिक घटनाओं की दर 3.9 प्रति 1,00,000 है।

पुरुषों में होने वाला तीसरा सबसे आम कैंसर है कोलोरेक्टल कैंसर, 40 वर्ष से कम आयु के युवा हो रहे हैं प्रभावित

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नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के एक अध्ययन के अनुसार, पुरुषों में कोलोरेक्टल कैंसर से मृत्यु दर काफी अधिक है। जहां पुरुषों और महिलाओं दोनों को पेट के कैंसर का खतरा होता है, वहीं पुरुषों में मलाशय का कैंसर होने की आशंका अधिक होती है।

colorectal cancer prevention and treatment

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एस्पिरिन दवा से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा (colorectal cancer risk) कम होता है. बुखार, दर्द और सूजन में उपयोग की जाने वाली एस्पिरिन कोलन कैंसर से बचाती है. आप इन खाद्य पदार्थों के सेवन से भी खुद को कैंसर के खतरे से बचा सकते हैं.

colorectal cancer causes symptoms prevention and treatment

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कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) का खतरा हाल के वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है. कोलोरेक्टल कैंसर का मुख्य लक्षण मल त्याग करते समय खून आना है. गैस, अपच और कब्ज की समस्या अगर लगातार रहती है, तो कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer symptoms) का खतरा बढ़ जाता है.

अपोलो के विशेषज्ञों ने ‘डू नाॅट अज्यूम’ अभियान से कोलोरेक्टल कैंसर के बारे में बढ़ाई जागरूकता

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अभियान ‘डू नाॅट अज्यूम ’ के माध्यम से हम लोगों को यह बताना चाहते हैं कि उन्हें सिर्फ यह सोच कर निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए कि अभी उनकी उम्र कम है या उनके परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास नहीं है। ऐसे में वे बीमारी से पूरी तरह से सुरक्षित हैं। लोेगों को अपने स्वास्थ्य के बारे में सतर्क रहना चाहिए और कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।