समय से पहले जन्मे शिशुओं को सता सकती है गुर्दे की बीमारी
समय से पहले जन्मे शिशुओं में आगे चलकर गुर्दे की बीमारी क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) विकसित होने का जोखिम बना रह सकता है, यह बात एक शोध में सामने आई है।
समय से पहले जन्मे शिशुओं में आगे चलकर गुर्दे की बीमारी क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) विकसित होने का जोखिम बना रह सकता है, यह बात एक शोध में सामने आई है।
चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ता वायु प्रदूषण भी क्रोनिक किडनी रोगों के बढ़ते जोखिम का एक कारक है।
इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के जनरल सर्जरी, जीआई सर्जरी एवं ट्रांसप्लान्टेशन के सीनियर कन्सलटेन्ट डॉ. (प्रोफेसर) संदीप गुलेरिया (पद्मश्री विजेता) और उनकी टीम ने इस मुश्किल ट्रंसप्लान्ट को सफलतापूर्वक किया।
लगभग 30 से 40 प्रतिशत भारतीय रोगियों में मधुमेह क्रोनिक किडनी डिजीज का प्रमुख कारण है। 2030 तक भारत में मधुमेह के रोगियों की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा होने की उम्मीद है।
किडनी फेल्योर होने पर मरीज का जीना दुश्वार हो जाता है और मरीज का जीवन हॉस्पिटल के चक्कर लगाने में ही बीतता है।
अंग्रेजी के एस अक्षर से शुरू होने वाली पांच बातों से किडनी को बचाकर रखने की जरूरत है- सॉल्ट, शुगर, स्ट्रेस, स्मोकिंग और सेडेंटरी लाइफ स्टाइल।
किडनी विफलता के लगभग 30-40 फीसदी मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण सिर्फ इसलिए नहीं हो पाता है, क्योंकि परिवार में समान रक्त समूह का दाता नहीं मिल पाता।
प्रदूषित वायु में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे भारी धातु मौजूद होते हैं। जो लोग प्रदूषित वायु में अधिक रहते हैं, उनमें क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के होने का खतरा बढ़ता है।
प्रदूषित वायु में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे भारी धातु मौजूद होते हैं। जो लोग प्रदूषित वायु में अधिक रहते हैं, उनमें क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के होने का खतरा बढ़ता है।