क्या है शॉकवेव कोरोनरी लिथोट्रिप्सी प्रक्रिया
विशेषज्ञों की एक पूरी टीम ने साथ मिलकर हार्ट ब्लॉकेज के साथ हार्ट अटैक के 67 वर्षीय मरीज पर भारत के पहले लीथोट्रिप्सी ट्रीटमेंट का उपयोग किया। जानें, क्या है यह लीथोट्रिप्सी ट्रीटमेंट प्रक्रिया...
विशेषज्ञों की एक पूरी टीम ने साथ मिलकर हार्ट ब्लॉकेज के साथ हार्ट अटैक के 67 वर्षीय मरीज पर भारत के पहले लीथोट्रिप्सी ट्रीटमेंट का उपयोग किया। जानें, क्या है यह लीथोट्रिप्सी ट्रीटमेंट प्रक्रिया...
कोई ठोस लक्षण नहीं नजर आने के कारण महिलाओं में दिल की बीमारी का निदान देर से होता है या हो ही नहीं पाता है, जिसके कारण बीमारी गंभीर होती जाती है। आमतौर पर 5 में से एक महिला किसी एक प्रकार के सीवीडी से पीड़ित होती हैं और हार्ट अटैक वाली एक-तिहाई महिलाएं 1 साल के अंदर ही दम तोड़ देती हैं।
भारतीयों में समय से पहले सीएडी होना एक अनुवांशिक गड़बड़ी के कारण हो सकता है, जिसमें लो-डेंसिटी के लिपोप्रोटीन (एलडीएल-सी) या बैड-कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा और मेटाबोलिक सिंड्रोम शामिल हैं। ऐसे में यदि किसी की लाइफस्टाइल अनहेल्दी हो तो दिल की बीमारी जल्दी लगती है और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
बीते 26 वर्षों में ही हृदय रोग में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसकी मुख्य वजह आर्टरीज ब्लॉकेज है।
दिल की जांच कराने से पहले यह आर्टिकल पढ़ें।
विशेषज्ञों की एक पूरी टीम ने साथ मिलकर हार्ट ब्लॉकेज के साथ हार्ट अटैक के 67 वर्षीय मरीज पर भारत के पहले लीथोट्रिप्सी ट्रीटमेंट का उपयोग किया। जानें, क्या है यह लीथोट्रिप्सी ट्रीटमेंट प्रक्रिया...
कोई ठोस लक्षण नहीं नजर आने के कारण महिलाओं में दिल की बीमारी का निदान देर से होता है या हो ही नहीं पाता है, जिसके कारण बीमारी गंभीर होती जाती है। आमतौर पर 5 में से एक महिला किसी एक प्रकार के सीवीडी से पीड़ित होती हैं और हार्ट अटैक वाली एक-तिहाई महिलाएं 1 साल के अंदर ही दम तोड़ देती हैं।
भारतीयों में समय से पहले सीएडी होना एक अनुवांशिक गड़बड़ी के कारण हो सकता है, जिसमें लो-डेंसिटी के लिपोप्रोटीन (एलडीएल-सी) या बैड-कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा और मेटाबोलिक सिंड्रोम शामिल हैं। ऐसे में यदि किसी की लाइफस्टाइल अनहेल्दी हो तो दिल की बीमारी जल्दी लगती है और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
बीते 26 वर्षों में ही हृदय रोग में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसकी मुख्य वजह आर्टरीज ब्लॉकेज है।
दिल की जांच कराने से पहले यह आर्टिकल पढ़ें।