Breastfeeding provides all these benefits to children!
Breastfeeding सिर्फ बच्चे का पेट भरने का तरीका नहीं, बल्कि उसके बेहतर Growth और मजबूत Immunity के लिए भी बेहद ...
Breastfeeding सिर्फ बच्चे का पेट भरने का तरीका नहीं, बल्कि उसके बेहतर Growth और मजबूत Immunity के लिए भी बेहद ...
ब्रेस्टफीड करवाती मांओं को यह पता होना चाहिए कि बच्चे के शुरुआती 1,000 दिन बच्चे की जिंदगी भर की सेहत को आकार देने का काम करते हैं। इसलिए जन्म से दो साल तक बच्चे को मां का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है।
डिलीवरी के बाद Breastfeeding की वजह से कई महीनों तक Periods का ना आना आम बात हो सकती है। लेकिन क्या Periods ना आने के बावजूद Pregnancy हो सकती है? जानिए Breastfeeding और Periods के इस Connection का पूरा सच।
वैसे तो स्तनपान के दौरान ज्यादातर दवाइयों का सेवन करना सुरक्षित माना जाता है। लेकिन, कुछ दवाइयां शिशु को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है।
Breastfeeding Week 2026: CDC की रिपोर्ट के अनुसार स्तनपान करने वाले बच्चों में अस्थमा, मोटापा, टाइप-1 डायबिटीज, ल्यूकेमिया समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। जानें मां और बच्चे दोनों के लिए इसके फायदे।
सार्वजनिक जगहों पर बच्चे को फीड कराते वक्त झिझक या डर महसूस होता है? भारत में कानूनी रूप से ब्रेस्टफीडिंग आपका अधिकार है, कोई आपको रोक नहीं सकता। लेकिन क्या आप इससे जुड़े अपने अधिकार जानते हैं?
क्या Breastfeeding कराने से सच में Breast की Shape खराब हो जाती है, या यह सिर्फ एक आम Myth है? जानिए Dr. Vaishali Zamre से Breastfeeding, Breast Sagging, Exercise, सही Bra और Breast Health से जुड़े जरूरी फैक्ट्स।
अगर मां और बच्चा दोनों सहज हों, तो 2 साल या उससे ज्यादा समय तक Breastfeeding जारी रखी जा सकती है। एक्सपर्ट से जानिए इससे जुड़े Facts और Common Myths।
कई महिलाएं जब छोटे शिशु को स्तनपान करवाती हैं तो उन्हें दर्द का एहसास होने लगता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसा क्यों होता है और कब आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। इस बारे में जानकारी दे रही हैं डॉ. निधि गुप्ता।
स्तनपान सप्ताह के इस मौके पर हम इस लेख में जानेंगे कि किस तरह से ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ बच्चे के लिए ही नहीं बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है और आयुर्वेद इसे इतना महत्व क्यों देता है।
जब कोई लड़की मां बनती है तो उसके दिमाग में कई तरह के सवाल आते हैं, उन्हीं सवाल में से एक है कि उन्हें अपने छोटे से बेबी को कब स्तनपान छुड़वाना है? अगर आप भी नई मां हैं तो हम आपको इस सवाल का जवाब देने जा रहे हैं।
Smart Toys and Child Development: आज के बच्चे किचन सेट, पिस्तौल या फिर सादी गुड़िया से नहीं खेलते हैं। उनके पास अब तरह-तरह के स्मार्ट टॉयज आ गए हैं। इन स्मार्ट टॉयज को देखकर कई बार पेरेंट्स के मन में सवाल उठता है कि क्या ये बच्चों के सोशस स्किल को बदल रहे हैं? आइए विस्तार से जानते हैं-
अक्सर कुछ बच्चे प्रीमैच्योर पैदा होते हैं, जो कुछ महीनों या सालों तक सही से खाना नहीं पचा पाते हैं, इसलिए उन्हें ब्रेस्टफीड किया जाता है। लेकिन किस उम्र तक सिर्फ स्तनपान से बच्चा हेल्दी रह सकता है?
Newborn feeding every 2 hours : न्यूबॉर्न को हर 2 घंटे में फीड कराना जरूरी होता है। इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं, जिसके बारे में डॉक्टर बता रहे हैं। आइए जानते हैं न्यूबॉर्न को हर 2 घंटे में फीड कराने की क्यों होती है जरूरत?
ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। अगर वे अपने स्वास्थ्य पर अच्छे से ध्यान देती हैं, तो इससे उनकी परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। मुख्य रूप से कुछ फलों के खाने से आपकी जल्दी रिकवरी हो सकती है। आइए जानते हैं ऐसे फलों के बारे में-
How to wean a child from breastfeeding : बच्चे की ब्रेस्टफीडिंग की आदत को छुड़वाना आसान नहीं होता है। ऐसे में अक्सर माताएं परेशान रहती हैं। इस परेशानी को कम करने के लिए आप कुछ टिप्स अपना सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कुछ टिप्स-
Breastfeeding Se Judi Jaruri Baatein: नई मांएं अपने बच्चे को स्तन से दूध पिलाने के बाद कभी-कभी पानी भी पिला देती हैं। लेकिन क्या यह सही है? आइए डॉक्टर से जानते हैं।
Breastfeeding and Mental health: पहली बार ब्रेस्टफीडिंग हर माता के लिए एक नया अनुभव होता है, जो कई बार उसके जीवन को भी बदल देता है। इस दौरान कई महिलाएं मानसिक रूप से बीमार भी पड़ जाती हैं।
पहले साल में शिशु को क्या पिलाना सही है, और कौन-सी गलती उसके लिए खतरनाक हो सकती है? कई पैरेंट्स अनजाने में ये बड़ी भूल कर बैठते हैं। जानिए एक्सपर्ट की राय।
न्यू मदर्स के लिए ब्रेस्टफीडिंग एक महत्वपूर्ण लेकिन थकानेवाला दौर भी है। इस समय महिलाओं को थकान के साथ-साथ कमजोरी और बैक पेन जैसी परेशानियां भी महसूस हो सकती हैं। लेकिन, कुछ महिलाओं को अन्य मदर्स की तुलना में अधिक कमजोरी महसूस हो सकती है। यहां जानें इस कमजोरी के कारण-
Breastfeeding Tips: स्तनपान सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मां और बच्चे के बीच एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी है। एक्सपर्ट से जानिए स्तनपान के दौरान किन बातों का ख्याल रखना चाहिए -
New Born Baby Ka Pet Kab Bharta Hai: वे महिलाएं जो पहली बार मां बनी होती हैं, उन्हें इस बात को लेकर बहुत ही चिंता होती है कि 'क्या मेरे बच्चे का पेट भर रहा है?' आइए डॉक्टर से जानते हैं दूध पीते बच्चे का पेट कब भरता है।
Tips for new mothers-बच्चे की देखभाल करने और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिलाएं कई गलतियां करती हैं जिससे उनकी हेल्थ पर भी असर पड़ता है। ऐसे में आयुर्वेद एक्सपर्ट कुछ टिप्स दे रही हैं जो न्यू मदर्स को हेल्दी रहने में मदद कर सकती हैं।
पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को स्तनपान करवाते समय कई चीजों का ध्यान रखना होता है। जानें, इनके बारे में-
ब्रेस्टफीड करवाती मांओं को यह पता होना चाहिए कि बच्चे के शुरुआती 1,000 दिन बच्चे की जिंदगी भर की सेहत को आकार देने का काम करते हैं। इसलिए जन्म से दो साल तक बच्चे को मां का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है।
वैसे तो स्तनपान के दौरान ज्यादातर दवाइयों का सेवन करना सुरक्षित माना जाता है। लेकिन, कुछ दवाइयां शिशु को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है।
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सार्वजनिक जगहों पर बच्चे को फीड कराते वक्त झिझक या डर महसूस होता है? भारत में कानूनी रूप से ब्रेस्टफीडिंग आपका अधिकार है, कोई आपको रोक नहीं सकता। लेकिन क्या आप इससे जुड़े अपने अधिकार जानते हैं?
कई महिलाएं जब छोटे शिशु को स्तनपान करवाती हैं तो उन्हें दर्द का एहसास होने लगता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसा क्यों होता है और कब आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। इस बारे में जानकारी दे रही हैं डॉ. निधि गुप्ता।
स्तनपान सप्ताह के इस मौके पर हम इस लेख में जानेंगे कि किस तरह से ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ बच्चे के लिए ही नहीं बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है और आयुर्वेद इसे इतना महत्व क्यों देता है।
जब कोई लड़की मां बनती है तो उसके दिमाग में कई तरह के सवाल आते हैं, उन्हीं सवाल में से एक है कि उन्हें अपने छोटे से बेबी को कब स्तनपान छुड़वाना है? अगर आप भी नई मां हैं तो हम आपको इस सवाल का जवाब देने जा रहे हैं।
Smart Toys and Child Development: आज के बच्चे किचन सेट, पिस्तौल या फिर सादी गुड़िया से नहीं खेलते हैं। उनके पास अब तरह-तरह के स्मार्ट टॉयज आ गए हैं। इन स्मार्ट टॉयज को देखकर कई बार पेरेंट्स के मन में सवाल उठता है कि क्या ये बच्चों के सोशस स्किल को बदल रहे हैं? आइए विस्तार से जानते हैं-
अक्सर कुछ बच्चे प्रीमैच्योर पैदा होते हैं, जो कुछ महीनों या सालों तक सही से खाना नहीं पचा पाते हैं, इसलिए उन्हें ब्रेस्टफीड किया जाता है। लेकिन किस उम्र तक सिर्फ स्तनपान से बच्चा हेल्दी रह सकता है?
Newborn feeding every 2 hours : न्यूबॉर्न को हर 2 घंटे में फीड कराना जरूरी होता है। इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं, जिसके बारे में डॉक्टर बता रहे हैं। आइए जानते हैं न्यूबॉर्न को हर 2 घंटे में फीड कराने की क्यों होती है जरूरत?
ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। अगर वे अपने स्वास्थ्य पर अच्छे से ध्यान देती हैं, तो इससे उनकी परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। मुख्य रूप से कुछ फलों के खाने से आपकी जल्दी रिकवरी हो सकती है। आइए जानते हैं ऐसे फलों के बारे में-
How to wean a child from breastfeeding : बच्चे की ब्रेस्टफीडिंग की आदत को छुड़वाना आसान नहीं होता है। ऐसे में अक्सर माताएं परेशान रहती हैं। इस परेशानी को कम करने के लिए आप कुछ टिप्स अपना सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कुछ टिप्स-
Breastfeeding Se Judi Jaruri Baatein: नई मांएं अपने बच्चे को स्तन से दूध पिलाने के बाद कभी-कभी पानी भी पिला देती हैं। लेकिन क्या यह सही है? आइए डॉक्टर से जानते हैं।
Breastfeeding and Mental health: पहली बार ब्रेस्टफीडिंग हर माता के लिए एक नया अनुभव होता है, जो कई बार उसके जीवन को भी बदल देता है। इस दौरान कई महिलाएं मानसिक रूप से बीमार भी पड़ जाती हैं।
न्यू मदर्स के लिए ब्रेस्टफीडिंग एक महत्वपूर्ण लेकिन थकानेवाला दौर भी है। इस समय महिलाओं को थकान के साथ-साथ कमजोरी और बैक पेन जैसी परेशानियां भी महसूस हो सकती हैं। लेकिन, कुछ महिलाओं को अन्य मदर्स की तुलना में अधिक कमजोरी महसूस हो सकती है। यहां जानें इस कमजोरी के कारण-
Breastfeeding Tips: स्तनपान सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मां और बच्चे के बीच एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी है। एक्सपर्ट से जानिए स्तनपान के दौरान किन बातों का ख्याल रखना चाहिए -
New Born Baby Ka Pet Kab Bharta Hai: वे महिलाएं जो पहली बार मां बनी होती हैं, उन्हें इस बात को लेकर बहुत ही चिंता होती है कि 'क्या मेरे बच्चे का पेट भर रहा है?' आइए डॉक्टर से जानते हैं दूध पीते बच्चे का पेट कब भरता है।
Tips for new mothers-बच्चे की देखभाल करने और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिलाएं कई गलतियां करती हैं जिससे उनकी हेल्थ पर भी असर पड़ता है। ऐसे में आयुर्वेद एक्सपर्ट कुछ टिप्स दे रही हैं जो न्यू मदर्स को हेल्दी रहने में मदद कर सकती हैं।
पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को स्तनपान करवाते समय कई चीजों का ध्यान रखना होता है। जानें, इनके बारे में-
Maa Ka Dudh Jyada Banne Par Kya Kare: कई महिलाएं मां बनने के बाद एक्सेसिव मिल्क प्रोडक्शन को मैनेज नहीं कर पाती हैं। इसके लिए आप गाइनेकोलॉजिस्ट और ऑब्सटेट्रिशियन डॉ. रुजुल झावेरी की सलाह मान सकते हैं।
Breastfeeding karne ka sahi tarika। स्तनपान कराते समय भी महिलाएं कई ऐसी गलतियां कर देती हैं, जो न सिर्फ उनके लिए हानिकारक होती हैं बल्कि स्तनपान कर रहे बच्चे को भी उससे नुकसान पहुंच सकता है।
Breastfeeding Benefits for Baby and Mother: ब्रेस्टफीडिंग कराने से मां और बच्चे दोनों को ही फायदा पहुंचता है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से-
जुडवां या उससे अधिक बच्चों (Twins and Triplets) को दूध पिलाना और उनकी देखभाल न्यू मदर्स के लिए मुश्किल हो सकता है। ऐसे में सभी बच्चों को दूध पिलाने और उन्हें पोषण दिलाने के लिए सही तरीके की जानकारी होनी चाहिए।
शिशु को स्तनपान से छुड़ाना एक प्राकृतिक और सहज प्रक्रिया होनी चाहिए। इसे धीरे-धीरे करने से शिशु और माँ दोनों के लिए इसे अपनाना आसान हो जाता है।
Mahilaon ke liye gulkand ke fayde- प्रेगनेंसी के बाद महिलाओं की डाइट में गुलकंद शामिल करने के जहां अनेकों फायदे हैं वहीं, गुलकंद का सेवन करने से पहले कुछ बातों का ध्यान भी रखना चाहिए।
जन्म से 6 माह तक के शिशुओं को ब्रेस्टफीड कराना बहुत ही जरूरी होता है, लेकिन 1 साल के बाद बच्चों को ठोस पदार्थ खिला भी जरूरी हो जाता है। इसलिए समय पर ब्रेस्टफीड छुड़ाना बहुत ही जरूरी है। आइए जानते हैं ब्रेस्टफीड छुड़ाने के कुछ आसान से टिप्स-
Fasting Advices For Breastfeeding Mothers: यहां आप पढ़ें कुछ ऐसी टिप्स जो न्यू मदर्स या बच्चों को अपना दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए नवरात्री व्रत के दौरान काम आ सकती हैं। आप इन बातों का ख्याल रख के ना केवल अपना व्रत भी कर सकेंगी बल्कि, अपना और अपने बच्चे का ख्याल भी रख सकेंगी।
Breastfeeding tips for new mothers : डॉ. ज्योति मिश्रा आपको ऐसे कुछ सुझाव के बारे में बता रही हैं, जिन्हें अपनाकर नई मां और शिशु के लिए स्तनपान बेहद सुखद अनुभव बन जाएगा।
Best foods for breastfeeding : न्यूट्रिशिनिस्ट लवनीत बत्रा ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए कुछ ऐसे सुपरफूड्स के बारे में बताया है, जो आपकी सेहत को दुरुस्त रखते हैं। आइए जानते हैं कौन से हैं ये फूड्स।
Ways to Increase Breast Milk Naturally: आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर ऐश्वर्या संतोष ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए 3 घरेलू औषधियों के बारे में बताया है जिसके माध्यम से ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाया जा सकता है।
ब्रेस्ट के ढीले होने से संबंधित कुछ मिथक भी व्याप्त हैं, जिसे अक्सर महिलाएं सच मान लेती हैं। कुछ ऐसे ही मिथक पर डालें नजर, जिन्हें महिलाएं सच मानकर करती हैं फॉलो (myths facts about breast sagging)....
ब्रेस्टफीडिंग कराते समय ब्रेस्ट को टाइट रखने के टिप्स
टीवी एक्ट्रेस अनिता हसनंदानी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर नारियल पानी पीते दिखीं। अनिता ने अपनी पोस्ट में नारियल पानी को ड्रिंक ऑफ द ईयर 2021 भी बताया। आइए जानें प्रेगनेंसी के बाद और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान नारियल पानी पीने के फायदे। (Benefits of Drinking Coconut Water during Breastfeeding)
जब शिशु के शरीर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है, तो पीलिया की समस्या होती है। गर्भावस्था के दौरान सावधानीपूर्वक कदम उठाकर आप अपने नवजात बच्चे को पीलिया (neonatal jaundice) से बचा सकती हैं। कुछ टिप्स अपनाकर पीलिया (neonatal jaundice) को और अधिक गंभीर होने से रोक सकती हैं-
स्तनपान कराने वाली महिला अगर गंभीर बीमारियों जैसे - कैंसर, एचआईवी से ग्रस्त हो तो यह खतरनाक हो सकती है. धूम्रपान, अल्कोहल या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने वाली महिला से बच्चे को वेट नर्सिंग या ब्रेस्ट फीडिंग नहीं कराना चाहिए. इसके अलावा किसी तरह की रेगुलर दवा का सेवन अगर महिला करती है तो स्तनपान खतरनाक हो सकता है.
ब्रेस्टफीडिंग कराते समय अचानक क्यों रोता है बच्चा, जानने के लिए जरूर पढ़ें
मां और बच्चे के बीच की बॉन्डिंग बढ़ाने का सबसे बढि़या तरीका है यह।
ब्रेस्टफीड करानेवाली महिलाओं को ऐसी सब्जियां नहीं खानी चाहिए जिनसे पेट फूलने या गैस बनने की शिकायत होती है।
कैनोला का तेल नवजात शिशुओं में ब्राउन फैट के उत्पादन को बढ़ावा देता है।
दूध पिलाने से ठीक पहले क्रीम न लगाएं, इससे बच्चे को पाचन संबंधी समस्याएं या उल्टी हो सकती है।
डिलीवरी के बाद Breastfeeding की वजह से कई महीनों तक Periods का ना आना आम बात हो सकती है। लेकिन क्या Periods ना आने के बावजूद Pregnancy हो सकती है? जानिए Breastfeeding और Periods के इस Connection का पूरा सच।
क्या Breastfeeding कराने से सच में Breast की Shape खराब हो जाती है, या यह सिर्फ एक आम Myth है? जानिए Dr. Vaishali Zamre से Breastfeeding, Breast Sagging, Exercise, सही Bra और Breast Health से जुड़े जरूरी फैक्ट्स।
अगर मां और बच्चा दोनों सहज हों, तो 2 साल या उससे ज्यादा समय तक Breastfeeding जारी रखी जा सकती है। एक्सपर्ट से जानिए इससे जुड़े Facts और Common Myths।
पहले साल में शिशु को क्या पिलाना सही है, और कौन-सी गलती उसके लिए खतरनाक हो सकती है? कई पैरेंट्स अनजाने में ये बड़ी भूल कर बैठते हैं। जानिए एक्सपर्ट की राय।
Breastfeeding Position: नवजात को दूध पिलाने के दौरान सही पोज़िशन मां और बच्चे दोनों के लिए आरामदायक हो सकती है। जानें लेटकर फीडिंग के फायदे और एक्सपर्ट की सलाह।
सही खानपान से न सिर्फ दूध का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि आपको और आपके बच्चे को भी पोषण मिलेगा। वीडियो में आपको ऐसे टिप्स मिलेंगे जो आपकी मदद करेंगे, जिससे आप अपने बच्चे को पर्याप्त और अच्छे पोषण के साथ दूध पिला सकें।
ऐसे में एक्सपर्ट्स भी कहते हैं की जिस दिन आपके बच्चे का जन्म हो, तब से लेकर 1 हफ्ते तक उसे हर एक से तीन घंटे में भूख लग सकती है. ऐसे में आपको हर एक, दो या तीन घंटे के गैप के बीच बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग जरूर करना चाहिए.
मां के दूध को पीकर ही बच्चा मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनता है और शायद इसीलिए डॉक्टर पहले छह माह बच्चे को आहार के रूप में मां का दूध प्रेफर करते हैं.
वैसे तो ब्रेस्टफीडिंग के ऐसे कोई साइड इफेक्ट नहीं होते हैं लेकिन ब्रेस्ट में दर्द, फटे निपल्स, ब्रेस्ट में सूजन और ब्रेस्ट फोड़े का सामना करना पड़ सकता है।
मां बनना एक बेहद ही खास अहसास होता है लेकिन इस समय में तरह-तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। वहीं अगर आप भी पहली बार मां बनी हैं और ब्रेस्टफीडिंग कराने में दिक्कतों का सामना कर रही है तो इस वीडियो में हम आपको आपकी परेशानी का हल देगें। जब भी आप बच्चें को ब्रेस्टफीड कराने के लिए बैठें तब एक आरामदायक कुर्सी पर बैठें और बच्चे के सिर को आपने हाथ से सहारा दें।
मांस, डेयरी उत्पाद, फल और सब्जियां शामिल करें। अपनी कैलोरी की मात्रा बढ़ाएं, ढेर सारा पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें और एक स्वस्थ जीवन शैली बनाएं।
अगर हम सैगिंग ब्रेस्ट के कारणों की बात करें तो इसमें अत्यधिक वजन कम होना, मेनोपॉज, स्मोकिंग और मल्टीपल प्रेग्नेंसी शामिल हैं।
ब्रेस्टफीडिंग शिशुओं के विकास के लिए बेहद आवश्यक होती है. ब्रेस्टफीडिंग की वजह से शिशु के साथ महिलाओं को भी होते हैं कई फायदे.
सुबह खाली पेट कुछ चीजों का सेवन हानिकारक हो सकता है। ऐसी चीजों को खाने से बचना चाहिए। चलिए जानते हैं खाली पेट क्या नहीं खाना चाहिए।
जानिए ऐसे खाद्य पदार्थ जो स्तनपान करा रही महिलाओं को नहीं खाने चाहिए।