
पहली बार मां बनी हैं तो ब्रेस्टफीडिंग के दौरान इन बातों का रखें ध्यान, जानें क्यों जरूरी है स्तनपान?
पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को स्तनपान करवाते समय कई चीजों का ध्यान रखना होता है। जानें, इनके बारे में-

पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को स्तनपान करवाते समय कई चीजों का ध्यान रखना होता है। जानें, इनके बारे में-

जन्म से 6 माह तक के शिशुओं को ब्रेस्टफीड कराना बहुत ही जरूरी होता है, लेकिन 1 साल के बाद बच्चों को ठोस पदार्थ खिला भी जरूरी हो जाता है। इसलिए समय पर ब्रेस्टफीड छुड़ाना बहुत ही जरूरी है। आइए जानते हैं ब्रेस्टफीड छुड़ाने के कुछ आसान से टिप्स-

स्तनपान कराना ना सिर्फ बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है बल्कि मां के लिए भी फायदेमंद होता है, शिशु को स्तनपान (Breastfeeding)कराने से नहीं होती महिलाओं को गंभीर बीमारियां

नवजात शिशु को सही पोषण देने के लिए सही आहार देना बहुत जरूरी होता है साथ ही इसकी जानकारी भी होना माता पिता के लिए आवश्यक है।

लीजा ने अपने न्यू बॉर्न बच्चे के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट की जिसमें वह अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड करा रही हैं। लीजा हेडन की ये लेटेस्ट तस्वीरें ऑनलाइन खूब पसंद की जा रही हैं और लोग उनकी हिम्मत और विचारों की तारीफ कर रहे हैं। (Lisa Haydon on breastfeeding)

ब्रेस्टफीडिंग शिशुओं के विकास के लिए बेहद आवश्यक होती है. ब्रेस्टफीडिंग की वजह से शिशु के साथ महिलाओं को भी होते हैं कई फायदे.

सही समय में बच्चे को मां के दूध की आदत छुड़ाना बेहद जरूरी होता है। आप कुछ खाद्य पदार्थों की मदद से अपने इस काम को आसान कर सकती हैं।

ऐश्वर्या ने अपनी प्रेगनेंसी के दौरान और डिलिवरी के बाद अपनी डायट ( Diet After Childbirth) पर काफी ध्यान दिया। ऐश्वर्या राय ने उन चीज़ों का सेवन किया जिससे, अधिक दूध बनता है। ऐसी ही एक चीज़ है गोंद के लड्डू (Gond ke Laddoo) जिसका सेवन ऐश्वर्या राय ने ब्रेस्टफीडिंग फेज में किया। (Diet During Breastfeeding )

मां के दूध में आ रही है कमी, इन नैचुरल तरीकों से बढ़ाएं ब्रेस्ट मिल्क

विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाओं ने बच्चों के 6 महीने तक केवल मां का दूध पिलाने के निर्देश दिए हैं। इससे, बच्चे के विकास में मदद होती है। वहीं, कई स्टडीज़ का दावा है कि मां का दूध बच्चे के दिमाग को विकसित करने का काम करता है।

अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो साबित करें कि कोविड-19 पॉजिटिव माता से बच्चे तक वायरस (Covid-19) का ट्रांसमिशन हो सकता है। इसीलिए, कोविड-पॉजिटिव माता का अपने बच्चे को दूध पिलाना पूरी तरह से सुरक्षित है। एक ग्लोबल मीडिया समिट में पत्रकारों से बात करते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडहॉनम गीब्रिएसुस (Dr Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने बताया कि, कोरोना पॉज़िटिव मांओ से उनके छोटे बच्चे को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने इन मांओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाती रहें।

एक नयी स्टडी में ब्रेस्टफीडिंग के एक नये फायदे के बारे में बताया गया है। इस स्टडी के अनुसार, बच्चे को दूध पिलाने से ब्रेस्टफीडिंग मदर को पोस्टपार्टम डायबिटीज़ (maternal postpartum diabetes) का ख़तरा कम होता है। साउथ कोरियन रिसर्चर्स ने इस स्टडी के दौरान पाया गया कि, लैक्टेशन से इंसुलिन सीक्रेशन करने वाली पैनिक्रिएटिक बीटा सेल्स (insulin-secreting pancreatic beta cells) और सेरोटोनिन (serotonin) के उत्पादन में मदद करता है।

हाल ही में एक स्टडी में दावा किया गया कि दूध पीने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इस स्टडी को इंटरनेशनल जर्नल ऑफएपिडेमिलॉजी में प्रकाशित किया गया।

जब शिशु के शरीर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है, तो पीलिया की समस्या होती है। गर्भावस्था के दौरान सावधानीपूर्वक कदम उठाकर आप अपने नवजात बच्चे को पीलिया (neonatal jaundice) से बचा सकती हैं। कुछ टिप्स अपनाकर पीलिया (neonatal jaundice) को और अधिक गंभीर होने से रोक सकती हैं-

दुनियाभर के डॉक्टर 6 माह तक की आयु के बच्चों को सिर्फ मां का दूध पिलाने की सलाह देते हैं, क्योंकि इससे उन्हें बेहद आसानी से हजम हो जाने वाला प्रोटीन, शुगर और फैट मिलता है, जो नवजात बच्चों के विकास के लिए पूर्ण रूप से उपयुक्त होता है।

पर अगर आप वर्किंग हैं तो मेटरनिटी लीव खत्म होते कई तरह की चिंताएं सताने लगती हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता है ब्रेस्टफीडिंग की। पर घबराइए नहीं अब बाजार में ऐसे कई उत्पाद मौजूद हैं जो ब्रेस्टफीडिंग के साथ ही सेल्फ केयर भी आसान कर रहे हैं।

शिशु के जन्म के पहले घंटे में ही उसे स्तनपान अवश्यक करवाना चाहिए। नई मां भले ही इसके लिए तैयार न हो पर आसपास मौजूद डॉक्टर, नर्स और परिजनों की सहायता से उसे इसके लिए तैयार किया जा सकता है।

मां के दूध में पाया जाने वाला कोलेस्ट्रम शिशु को रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। जिससे शिशु को कई रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है।

पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को स्तनपान करवाते समय कई चीजों का ध्यान रखना होता है। जानें, इनके बारे में-

स्तनपान कराना ना सिर्फ बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है बल्कि मां के लिए भी फायदेमंद होता है, शिशु को स्तनपान (Breastfeeding)कराने से नहीं होती महिलाओं को गंभीर बीमारियां

नवजात शिशु को सही पोषण देने के लिए सही आहार देना बहुत जरूरी होता है साथ ही इसकी जानकारी भी होना माता पिता के लिए आवश्यक है।

लीजा ने अपने न्यू बॉर्न बच्चे के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट की जिसमें वह अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड करा रही हैं। लीजा हेडन की ये लेटेस्ट तस्वीरें ऑनलाइन खूब पसंद की जा रही हैं और लोग उनकी हिम्मत और विचारों की तारीफ कर रहे हैं। (Lisa Haydon on breastfeeding)

सही समय में बच्चे को मां के दूध की आदत छुड़ाना बेहद जरूरी होता है। आप कुछ खाद्य पदार्थों की मदद से अपने इस काम को आसान कर सकती हैं।

ऐश्वर्या ने अपनी प्रेगनेंसी के दौरान और डिलिवरी के बाद अपनी डायट ( Diet After Childbirth) पर काफी ध्यान दिया। ऐश्वर्या राय ने उन चीज़ों का सेवन किया जिससे, अधिक दूध बनता है। ऐसी ही एक चीज़ है गोंद के लड्डू (Gond ke Laddoo) जिसका सेवन ऐश्वर्या राय ने ब्रेस्टफीडिंग फेज में किया। (Diet During Breastfeeding )

मां के दूध में आ रही है कमी, इन नैचुरल तरीकों से बढ़ाएं ब्रेस्ट मिल्क

विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाओं ने बच्चों के 6 महीने तक केवल मां का दूध पिलाने के निर्देश दिए हैं। इससे, बच्चे के विकास में मदद होती है। वहीं, कई स्टडीज़ का दावा है कि मां का दूध बच्चे के दिमाग को विकसित करने का काम करता है।

अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो साबित करें कि कोविड-19 पॉजिटिव माता से बच्चे तक वायरस (Covid-19) का ट्रांसमिशन हो सकता है। इसीलिए, कोविड-पॉजिटिव माता का अपने बच्चे को दूध पिलाना पूरी तरह से सुरक्षित है। एक ग्लोबल मीडिया समिट में पत्रकारों से बात करते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडहॉनम गीब्रिएसुस (Dr Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने बताया कि, कोरोना पॉज़िटिव मांओ से उनके छोटे बच्चे को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने इन मांओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाती रहें।

एक नयी स्टडी में ब्रेस्टफीडिंग के एक नये फायदे के बारे में बताया गया है। इस स्टडी के अनुसार, बच्चे को दूध पिलाने से ब्रेस्टफीडिंग मदर को पोस्टपार्टम डायबिटीज़ (maternal postpartum diabetes) का ख़तरा कम होता है। साउथ कोरियन रिसर्चर्स ने इस स्टडी के दौरान पाया गया कि, लैक्टेशन से इंसुलिन सीक्रेशन करने वाली पैनिक्रिएटिक बीटा सेल्स (insulin-secreting pancreatic beta cells) और सेरोटोनिन (serotonin) के उत्पादन में मदद करता है।

हाल ही में एक स्टडी में दावा किया गया कि दूध पीने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 80 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इस स्टडी को इंटरनेशनल जर्नल ऑफएपिडेमिलॉजी में प्रकाशित किया गया।

दुनियाभर के डॉक्टर 6 माह तक की आयु के बच्चों को सिर्फ मां का दूध पिलाने की सलाह देते हैं, क्योंकि इससे उन्हें बेहद आसानी से हजम हो जाने वाला प्रोटीन, शुगर और फैट मिलता है, जो नवजात बच्चों के विकास के लिए पूर्ण रूप से उपयुक्त होता है।

पर अगर आप वर्किंग हैं तो मेटरनिटी लीव खत्म होते कई तरह की चिंताएं सताने लगती हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता है ब्रेस्टफीडिंग की। पर घबराइए नहीं अब बाजार में ऐसे कई उत्पाद मौजूद हैं जो ब्रेस्टफीडिंग के साथ ही सेल्फ केयर भी आसान कर रहे हैं।

शिशु के जन्म के पहले घंटे में ही उसे स्तनपान अवश्यक करवाना चाहिए। नई मां भले ही इसके लिए तैयार न हो पर आसपास मौजूद डॉक्टर, नर्स और परिजनों की सहायता से उसे इसके लिए तैयार किया जा सकता है।

मां के दूध में पाया जाने वाला कोलेस्ट्रम शिशु को रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। जिससे शिशु को कई रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है।

जन्म से 6 माह तक के शिशुओं को ब्रेस्टफीड कराना बहुत ही जरूरी होता है, लेकिन 1 साल के बाद बच्चों को ठोस पदार्थ खिला भी जरूरी हो जाता है। इसलिए समय पर ब्रेस्टफीड छुड़ाना बहुत ही जरूरी है। आइए जानते हैं ब्रेस्टफीड छुड़ाने के कुछ आसान से टिप्स-

जब शिशु के शरीर में बिलीरुबिन बढ़ जाता है, तो पीलिया की समस्या होती है। गर्भावस्था के दौरान सावधानीपूर्वक कदम उठाकर आप अपने नवजात बच्चे को पीलिया (neonatal jaundice) से बचा सकती हैं। कुछ टिप्स अपनाकर पीलिया (neonatal jaundice) को और अधिक गंभीर होने से रोक सकती हैं-