ब्रेस्टफीड कराने से शिशुओं की इम्यूनिटी होती है बूस्ट, बार-बार होने वाली बीमारियों के खतरे से रहते हैं दूर
Breastfeeding : शिशुओं को ब्रेस्टफीडिंग कराने से कई तरह के लाभ हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके लाभ क्या हैं?
Breastfeeding : शिशुओं को ब्रेस्टफीडिंग कराने से कई तरह के लाभ हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके लाभ क्या हैं?
ब्रेस्ट को अकार में लाने के लिए अच्छी खुराक लें। सही खाना खाने से शरीर को सही मात्रा में पोषक तत्व मिलता हैं जिससे शरीर में अपने आप कसाव आ जाता है पर कुछ महिलाएं प्रसव होने के बाद कमज़ोर हो जाती हैं और अपने खान-पान का ध्यान नहीं रखती है।
अगर कोरोनावायरस से संक्रमित महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग कराने को लेकर कन्फ्यूजन में हैं तो इस पर एक रिसर्च सामने आई है।
स्तनों में कई कारणों से दूध का निर्माण कम हो जाता है। इन कारणों को जानकर सही समय पर कुछ ऐसे उपायों को अपनाना जरूरी है, जिससे दूध अधिक बने और शिशु का पेट भी भर जाए, उसे सारे पौष्टिक तत्व भी प्राप्त हो सकें।
ब्रेस्टफीडिंग कराने से शिशुओं का स्वास्थ्य अच्छा होता है, इससे तमाम बीमारियां शिशुओं से दूर रहती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग करान से महिलाओं को भी बहुत से लाभ होते हैं। कई स्टडी में इस बात का खुलासा भी हुआ है। आइए जानते हैं-
कई महिलाएं इस डर से ब्रेस्टफीडिंग (World Breastfeeding Week) कराना बंद कर देती हैं कि कहीं फीडिंग कराने से उनके ब्रेस्ट का आकार खराब ना हो जाए या फिर कहीं उन्हें किसी तरह की परेशानी ना हो जाए। अगर आपको भी इस बात का डर है, तो घबराएं नहीं आज हम आपको इस लेख के जरिए कुछ उपाय बताएंगे, जिससे आपके ब्रेस्ट का आकार सही रहेगा।
मां का दूध नवजात का पहला आहार है, जिस पर उसका संपूर्ण विकास निर्भर करता है। मां के दूध से बच्चे की मांसपेशियों का निर्माण होता है, लेकिन कुछ मामलों में बच्चों को मिल्क पाउडर या पाउडर वाला दूध पिलाया जाता है। क्या मिल्क पाउडर का कोई नुकसान (Milk Powder Side Effects) भी होता है?
अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो साबित करें कि कोविड-19 पॉजिटिव माता से बच्चे तक वायरस (Covid-19) का ट्रांसमिशन हो सकता है। इसीलिए, कोविड-पॉजिटिव माता का अपने बच्चे को दूध पिलाना पूरी तरह से सुरक्षित है। एक ग्लोबल मीडिया समिट में पत्रकारों से बात करते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडहॉनम गीब्रिएसुस (Dr Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने बताया कि, कोरोना पॉज़िटिव मांओ से उनके छोटे बच्चे को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने इन मांओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाती रहें।
शुरुआत में बच्चों को ब्रेस्ट फीडिंग कराई जाती है, जिससे उन्हें ब्रेस्ट से दूध पीने की आदत हो जाती है। वहीं, जब उन्हें प्लास्टिक का बोतल दिया जाता है, तो उन्हें बोतल का स्पर्श बहुत ही अलग लगता है।
ब्रेस्टफीडिंग को एक बहुत ही पर्सनल विषय मानते हुए लोग उम्मीद करते हैं कि मांएं अपने बच्चे को दूध पिलाते समय किसी के सामने ना पड़े। लेकिन, अब महिलाओं ने मॉल, रेल्वे स्टेशन और ऑफिस जैसे सार्वजनिक स्थानों पर ब्रेस्टफीडिंग स्पॉट बनाने की मांग करने लगी हैं।
चाहती हैं कि आपका फिगर पहले जैसा हो जाए, तो इसके लिए ब्रेस्ट फीड जरूर कराएं। अगर आप सोचती हैं कि ब्रेस्ट फीड कराने से आपके ब्रेस्ट का शेप खराब हो जाएगा, तो ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। दूध पिलाने से शरीर पर जमी चर्बी को कम करने में मदद मिलती है।
यह चिंता डिलीवरी के बाद अधिकांश महिलाओं को रहती है डिलीवरी के बाद पेट कम करना उतना मुश्किल काम नहीं है जितना लगता है। अगर आप भी अपना लटका हुआ पेट कम करना चाहती हैं तो आपको थोड़े से धैर्य और बहुत सारी लगन की जरूरत है।
यह चिंता डिलीवरी के बाद अधिकांश महिलाओं को रहती है डिलीवरी के बाद पेट कम करना उतना मुश्किल काम नहीं है जितना लगता है। अगर आप भी अपना लटका हुआ पेट कम करना चाहती हैं तो आपको थोड़े से धैर्य और बहुत सारी लगन की जरूरत है।
ब्रेस्टफीडिंग की आदत कई बार बच्चे जल्दी नहीं छोड़ पाते। ऐसे में आपको ही कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर बच्चे की इस आदत को छुड़वाना होगा।
स्तनपान कराने से बच्चों में ब्लड कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है। इसके साथ ही स्तनपान से शिशु की बौद्धिक क्षमता का भी विकास होता है।
छोटे बच्चे अकसर दूध पीते वक्त सांस लेना भूल जाते हैं, ये एक सामान्य बात है पर अगर वे फीड लेते वक्त यानी दूध पीते वक्त हांफने लगें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
पोस्ट प्रेगनेंसी यू करें बेली फैट कम
अक्तूबर को दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है।
समय पूर्व पैदा हुए बच्चों को मां का दूध पिलाने से कुछ ही हफ्तों में उनके दिमाग के विकास पर असर होता है।
पुशअप ब्रेस्ट को मजबूत और टाइट करता है। ऐसे में पुशअप हर दिन करें।
जब दिन में बच्चा सोए, तब आप भी सो जाएं। सोने के किसी भी मौके को न गंवाएं, क्योंकि नींद आपके लिए महत्वपूर्ण है। अपर्याप्त नींद और आराम दूध की आपूर्ति को प्रभावित करता है जो मां और शिशु दोनों के लिए ही अच्छा नहीं है।
मॉम्सप्रेसो और मेडेला द्वारा किए गए ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, 70 प्रतिशत भारतीय मांओं को स्तनपान एक चुनौतीपूर्ण अनुभव लगता है।
नींद आपके बच्चे के व्यक्तित्व और सोने के पैटर्न पर निर्भर करती है। अगर आपका बच्चा पर्याप्त स्तनपान कर रहा है, तो वह अच्छी तरह सोएगा।
क्या आप अपने बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं, और क्या आपने भी सुन रखी हैं ब्रेस्टफीड से जुड़ी कुछ अजीब बातें? पढ़ें यह आर्टिकल
अगर कोरोनावायरस से संक्रमित महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग कराने को लेकर कन्फ्यूजन में हैं तो इस पर एक रिसर्च सामने आई है।
स्तनों में कई कारणों से दूध का निर्माण कम हो जाता है। इन कारणों को जानकर सही समय पर कुछ ऐसे उपायों को अपनाना जरूरी है, जिससे दूध अधिक बने और शिशु का पेट भी भर जाए, उसे सारे पौष्टिक तत्व भी प्राप्त हो सकें।
ब्रेस्टफीडिंग कराने से शिशुओं का स्वास्थ्य अच्छा होता है, इससे तमाम बीमारियां शिशुओं से दूर रहती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग करान से महिलाओं को भी बहुत से लाभ होते हैं। कई स्टडी में इस बात का खुलासा भी हुआ है। आइए जानते हैं-
कई महिलाएं इस डर से ब्रेस्टफीडिंग (World Breastfeeding Week) कराना बंद कर देती हैं कि कहीं फीडिंग कराने से उनके ब्रेस्ट का आकार खराब ना हो जाए या फिर कहीं उन्हें किसी तरह की परेशानी ना हो जाए। अगर आपको भी इस बात का डर है, तो घबराएं नहीं आज हम आपको इस लेख के जरिए कुछ उपाय बताएंगे, जिससे आपके ब्रेस्ट का आकार सही रहेगा।
मां का दूध नवजात का पहला आहार है, जिस पर उसका संपूर्ण विकास निर्भर करता है। मां के दूध से बच्चे की मांसपेशियों का निर्माण होता है, लेकिन कुछ मामलों में बच्चों को मिल्क पाउडर या पाउडर वाला दूध पिलाया जाता है। क्या मिल्क पाउडर का कोई नुकसान (Milk Powder Side Effects) भी होता है?
अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो साबित करें कि कोविड-19 पॉजिटिव माता से बच्चे तक वायरस (Covid-19) का ट्रांसमिशन हो सकता है। इसीलिए, कोविड-पॉजिटिव माता का अपने बच्चे को दूध पिलाना पूरी तरह से सुरक्षित है। एक ग्लोबल मीडिया समिट में पत्रकारों से बात करते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडहॉनम गीब्रिएसुस (Dr Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने बताया कि, कोरोना पॉज़िटिव मांओ से उनके छोटे बच्चे को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने इन मांओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाती रहें।
शुरुआत में बच्चों को ब्रेस्ट फीडिंग कराई जाती है, जिससे उन्हें ब्रेस्ट से दूध पीने की आदत हो जाती है। वहीं, जब उन्हें प्लास्टिक का बोतल दिया जाता है, तो उन्हें बोतल का स्पर्श बहुत ही अलग लगता है।
ब्रेस्टफीडिंग को एक बहुत ही पर्सनल विषय मानते हुए लोग उम्मीद करते हैं कि मांएं अपने बच्चे को दूध पिलाते समय किसी के सामने ना पड़े। लेकिन, अब महिलाओं ने मॉल, रेल्वे स्टेशन और ऑफिस जैसे सार्वजनिक स्थानों पर ब्रेस्टफीडिंग स्पॉट बनाने की मांग करने लगी हैं।
यह चिंता डिलीवरी के बाद अधिकांश महिलाओं को रहती है डिलीवरी के बाद पेट कम करना उतना मुश्किल काम नहीं है जितना लगता है। अगर आप भी अपना लटका हुआ पेट कम करना चाहती हैं तो आपको थोड़े से धैर्य और बहुत सारी लगन की जरूरत है।
स्तनपान कराने से बच्चों में ब्लड कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है। इसके साथ ही स्तनपान से शिशु की बौद्धिक क्षमता का भी विकास होता है।
छोटे बच्चे अकसर दूध पीते वक्त सांस लेना भूल जाते हैं, ये एक सामान्य बात है पर अगर वे फीड लेते वक्त यानी दूध पीते वक्त हांफने लगें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
समय पूर्व पैदा हुए बच्चों को मां का दूध पिलाने से कुछ ही हफ्तों में उनके दिमाग के विकास पर असर होता है।
पुशअप ब्रेस्ट को मजबूत और टाइट करता है। ऐसे में पुशअप हर दिन करें।
जब दिन में बच्चा सोए, तब आप भी सो जाएं। सोने के किसी भी मौके को न गंवाएं, क्योंकि नींद आपके लिए महत्वपूर्ण है। अपर्याप्त नींद और आराम दूध की आपूर्ति को प्रभावित करता है जो मां और शिशु दोनों के लिए ही अच्छा नहीं है।
मॉम्सप्रेसो और मेडेला द्वारा किए गए ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, 70 प्रतिशत भारतीय मांओं को स्तनपान एक चुनौतीपूर्ण अनुभव लगता है।
नींद आपके बच्चे के व्यक्तित्व और सोने के पैटर्न पर निर्भर करती है। अगर आपका बच्चा पर्याप्त स्तनपान कर रहा है, तो वह अच्छी तरह सोएगा।
क्या आप अपने बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं, और क्या आपने भी सुन रखी हैं ब्रेस्टफीड से जुड़ी कुछ अजीब बातें? पढ़ें यह आर्टिकल
जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने की प्रक्रिया भारत में लगभग दोगुनी हो गई है, जो 2005 में 23.1 प्रतिशत थी और बढ़कर 2015 में 41.5 प्रतिशत हो गई।
मां का दूध जब बच्चा पर्याप्त रूप से पीता है, तो उसे एलर्जी, गैस, कब्ज आदि की समस्याएं नहीं होती हैं।
बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं, तो अपने खानपान पर भी विशेष ध्यान रखना होगा, ताकि बच्चे का पेट खराब न हो सके।
ब्रेस्टफीडिंग से जुड़ी कुछ अहम टिप्स जानने के लिए पढ़ें यह आर्टिकल।
जिन महिलाओं ने ब्रेस्टफीडिंग के दौरान अधिक एल्कोहल का सेवन किया था, उनके बच्चों के स्कोर्स बहुत ज्यादा बुरे थे।
शरीर से बिलीरुबिन को बाहर निकालने के लिए हाइड्रेशन जरूरी है। इस स्थिति में शिशु को अधिक स्तनपान कराना जरूरी है।
पीठ ने कहा कि जब पूरी दुनिया में बच्चों को दूध पिलाने के लिए अलग से कमरे बनाए गए हैं, तो भारत में ऐसा क्यों नहीं किया गया?
Breastfeeding : शिशुओं को ब्रेस्टफीडिंग कराने से कई तरह के लाभ हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके लाभ क्या हैं?
चाहती हैं कि आपका फिगर पहले जैसा हो जाए, तो इसके लिए ब्रेस्ट फीड जरूर कराएं। अगर आप सोचती हैं कि ब्रेस्ट फीड कराने से आपके ब्रेस्ट का शेप खराब हो जाएगा, तो ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। दूध पिलाने से शरीर पर जमी चर्बी को कम करने में मदद मिलती है।
ब्रेस्टफीडिंग की आदत कई बार बच्चे जल्दी नहीं छोड़ पाते। ऐसे में आपको ही कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर बच्चे की इस आदत को छुड़वाना होगा।
पोस्ट प्रेगनेंसी यू करें बेली फैट कम
अक्तूबर को दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है।
ब्रेस्ट को अकार में लाने के लिए अच्छी खुराक लें। सही खाना खाने से शरीर को सही मात्रा में पोषक तत्व मिलता हैं जिससे शरीर में अपने आप कसाव आ जाता है पर कुछ महिलाएं प्रसव होने के बाद कमज़ोर हो जाती हैं और अपने खान-पान का ध्यान नहीं रखती है।
यह चिंता डिलीवरी के बाद अधिकांश महिलाओं को रहती है डिलीवरी के बाद पेट कम करना उतना मुश्किल काम नहीं है जितना लगता है। अगर आप भी अपना लटका हुआ पेट कम करना चाहती हैं तो आपको थोड़े से धैर्य और बहुत सारी लगन की जरूरत है।