दूध में मिला कर लें ये 5 जड़ी बूटियां, स्टैमिना बढ़ाने के साथ कई समस्याओं से दिलाएगा निजात
आयुर्वेद में कुछ जड़ी बूटियां ऐसी हैं जिन्हें आप दूध में मिला कर ले सकते हैं। इससे आपके शरीर को एक साथ कई फायदे मिल पाएंगे।
आयुर्वेद में कुछ जड़ी बूटियां ऐसी हैं जिन्हें आप दूध में मिला कर ले सकते हैं। इससे आपके शरीर को एक साथ कई फायदे मिल पाएंगे।
अतिबला (Atibala) के फायदे व नुकसान- अतिबला पीले रंग के सुंदर फूलों वाला एक पौधा है, जिसका इस्तेमाल अनेक प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है।
एक मशहूर आयुर्वेदिक औषधि होने के कारण पत्थरचट्टा कई स्वास्थ्य समस्याओं में इलाज के लिए काम आ सकती है।
अश्वगंधा कमजोरी से छुटकारा दिलाने के लिए भारत में एक बहुत अधिक इस्तेमाल की जाने वाली हर्ब है। इसे आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली में काफी महत्वपूर्ण स्थान मिला है।
अदरक (Ginger) के फायदे व नुकसान- अदरक को एक विशेष विधि के अनुसार सुखाकर सोंठ बनाई जाती है। भारत में यह जड़ी-बूटी बेहद प्रचलित है और अनेक रोगों का इलाज करने के लिए इससे आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जाती हैं। इसे आमतौर पर सूखी अदरक के नाम से भी जाना जाता है।
नागकेसर (Mesua ferrea) के फायदे व नुकसान- नागकेसर एक खास जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद में हजारों सालों से अनेक प्रकार की दवाएं व अन्य उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है।
अंकोल (Ankol) के फायदे व नुकसान- अंकोल अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुणों वाली एक खास जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद में हजारों सालों से कई स्वास्थ्य रोगों का इलाज करने के लिए किया जा रहा है।
वज्रदंती (Barleria prionitis) के फायदे व नुकसान- वज्रदंती अनेक औषधीय गुण वाला पौधा है, जिसके फूल, पत्तों व जड़ों आदि के इस्तेमाल से अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जाती हैं।
भारंगी (Bharangi) के फायदे व नुकसान- भारंगी अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर एक झाड़ीदार पौधा है, जिसका इस्तेमाल अनेक प्रकार की हर्बल दवाएं बनाने के लिए भी किया जाता है।
खदिर (Acacia catechu) के फायदे व नुकसान- खदिर को सबसे पुरानी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक माना जाता है, जिसका इस्तेमाल अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है।
कालमेघ (Green chiretta) फायदे व नुकसान- कालमेघ एक विशेष प्रकार का पौधा है, जिसमें मौजूद स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण इसे एक प्राचीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है।
कूठ (Kuth) के फायदे व नुकसान- कूठ एक विशेष प्रकार की जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल अनेक आयुर्वेदिक दवाएं बनाने के लिए किया जाता है। कूठ व उससे बने प्रोडक्ट आसानी से मार्केट में मिल जाते हैं।
अर्जुन की छाल (Arjun bark) के फायदे व नुकसान- अर्जुन की छाल एक खास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसे अर्जुन नामक एक सदाबहार पेड़ से प्राप्त किया जाता है।
सुपारी (Betel nut) के फायदे व नुकसान- सुपारी को बीटल नट व एरिका नट के नाम से भी जाना जाता है, जो अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर एक खास काष्ठफल है। इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में हजारों सालों से रोगों का इलाज करने के लिए किया जा रहा है।
मखाने (Lotus seed) के फायदे व नुकसान- मखाने में अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं और यह पौधे से एक फल के रूप में प्राप्त होता है। इसका इस्तेमाल अनेक हर्बल दवाएं बनाने के लिए भी किया जाता है।
गुड़मार (Gymnema Sylvestre) के फायदे व नुकसान- गुड़मार एक खास प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसमें कई प्रकार के स्वास्थ्यवर्धक गुण पाए जाते हैं। कई स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने के लिए गुड़मार का इस्तेमाल एक घरेलू उपचार के रूप में भी किया जाता है।
मेहंदी (Henna) के फायदे व नुकसान- मेहंदी एक खास प्रकार का पौधा है, जिसके पत्तों का पाउडर बनाकर उसका इस्तेमाल किया जाता है। मेहंदी के पौधे में अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुण भी पाए जाते हैं और यह कई स्वास्थ्य समस्याओं के घरेलू उपचार में भी काम आ सकता है।
लेमन ग्रास (Lemongrass) के फायदे व नुकसान- नींबू घास एक खास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल अनेक स्वास्थ्य समस्याओं की दवाएं बनाने के लिए किया जाता है। लेमन ग्रास का इस्तेमाल भारत में कई व्यंजन बनाने के लिए भी किया जाता है।
आयुर्वेद में कुछ जड़ी बूटियां ऐसी हैं जिन्हें आप दूध में मिला कर ले सकते हैं। इससे आपके शरीर को एक साथ कई फायदे मिल पाएंगे।
अतिबला (Atibala) के फायदे व नुकसान- अतिबला पीले रंग के सुंदर फूलों वाला एक पौधा है, जिसका इस्तेमाल अनेक प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है।
एक मशहूर आयुर्वेदिक औषधि होने के कारण पत्थरचट्टा कई स्वास्थ्य समस्याओं में इलाज के लिए काम आ सकती है।
अश्वगंधा कमजोरी से छुटकारा दिलाने के लिए भारत में एक बहुत अधिक इस्तेमाल की जाने वाली हर्ब है। इसे आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली में काफी महत्वपूर्ण स्थान मिला है।
अदरक (Ginger) के फायदे व नुकसान- अदरक को एक विशेष विधि के अनुसार सुखाकर सोंठ बनाई जाती है। भारत में यह जड़ी-बूटी बेहद प्रचलित है और अनेक रोगों का इलाज करने के लिए इससे आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जाती हैं। इसे आमतौर पर सूखी अदरक के नाम से भी जाना जाता है।
नागकेसर (Mesua ferrea) के फायदे व नुकसान- नागकेसर एक खास जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद में हजारों सालों से अनेक प्रकार की दवाएं व अन्य उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है।
अंकोल (Ankol) के फायदे व नुकसान- अंकोल अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुणों वाली एक खास जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद में हजारों सालों से कई स्वास्थ्य रोगों का इलाज करने के लिए किया जा रहा है।
वज्रदंती (Barleria prionitis) के फायदे व नुकसान- वज्रदंती अनेक औषधीय गुण वाला पौधा है, जिसके फूल, पत्तों व जड़ों आदि के इस्तेमाल से अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जाती हैं।
भारंगी (Bharangi) के फायदे व नुकसान- भारंगी अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर एक झाड़ीदार पौधा है, जिसका इस्तेमाल अनेक प्रकार की हर्बल दवाएं बनाने के लिए भी किया जाता है।
खदिर (Acacia catechu) के फायदे व नुकसान- खदिर को सबसे पुरानी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक माना जाता है, जिसका इस्तेमाल अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है।
कालमेघ (Green chiretta) फायदे व नुकसान- कालमेघ एक विशेष प्रकार का पौधा है, जिसमें मौजूद स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण इसे एक प्राचीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है।
कूठ (Kuth) के फायदे व नुकसान- कूठ एक विशेष प्रकार की जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल अनेक आयुर्वेदिक दवाएं बनाने के लिए किया जाता है। कूठ व उससे बने प्रोडक्ट आसानी से मार्केट में मिल जाते हैं।
अर्जुन की छाल (Arjun bark) के फायदे व नुकसान- अर्जुन की छाल एक खास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसे अर्जुन नामक एक सदाबहार पेड़ से प्राप्त किया जाता है।
सुपारी (Betel nut) के फायदे व नुकसान- सुपारी को बीटल नट व एरिका नट के नाम से भी जाना जाता है, जो अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर एक खास काष्ठफल है। इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में हजारों सालों से रोगों का इलाज करने के लिए किया जा रहा है।
मखाने (Lotus seed) के फायदे व नुकसान- मखाने में अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं और यह पौधे से एक फल के रूप में प्राप्त होता है। इसका इस्तेमाल अनेक हर्बल दवाएं बनाने के लिए भी किया जाता है।
गुड़मार (Gymnema Sylvestre) के फायदे व नुकसान- गुड़मार एक खास प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसमें कई प्रकार के स्वास्थ्यवर्धक गुण पाए जाते हैं। कई स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने के लिए गुड़मार का इस्तेमाल एक घरेलू उपचार के रूप में भी किया जाता है।
मेहंदी (Henna) के फायदे व नुकसान- मेहंदी एक खास प्रकार का पौधा है, जिसके पत्तों का पाउडर बनाकर उसका इस्तेमाल किया जाता है। मेहंदी के पौधे में अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुण भी पाए जाते हैं और यह कई स्वास्थ्य समस्याओं के घरेलू उपचार में भी काम आ सकता है।
लेमन ग्रास (Lemongrass) के फायदे व नुकसान- नींबू घास एक खास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल अनेक स्वास्थ्य समस्याओं की दवाएं बनाने के लिए किया जाता है। लेमन ग्रास का इस्तेमाल भारत में कई व्यंजन बनाने के लिए भी किया जाता है।