
बच्चों में ऑटिज्म और गट हेल्थ के बीच क्या है कनेक्शन?
बच्चा अचानाक से चिड़चिड़ा हो जाए और रात में बार-बार उठे, तो लोग अक्सर इसे बच्चे का व्यवहार समझ लेते हैं। लेकिन कई बार यह परेशानी उनके पेट से जुड़ी हो सकती है। आइए जानते हैं इस विषय के बारे में-

बच्चा अचानाक से चिड़चिड़ा हो जाए और रात में बार-बार उठे, तो लोग अक्सर इसे बच्चे का व्यवहार समझ लेते हैं। लेकिन कई बार यह परेशानी उनके पेट से जुड़ी हो सकती है। आइए जानते हैं इस विषय के बारे में-

ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चा सही ढंग से अपने व्यवहार और भावनाओं को प्रकट नहीं कर पाता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या यह जन्मजात डिसऑर्डर है? आइए डॉक्टर से जानते हैं इस बारे में-

Autistic Child Ko Parents Kaise Samjhe: पेरेंट्स होने के नाते अगर आपके बच्चे को ऑटिज्म है तो इन कुछ तरीकों से आप उन्हें समझने की कोशिश कर सकते हैं।

ऑटिज्म वाले व्यक्ति को बातचीत करने में कठिनाई हो सकती है और व्यवहार में दोहराव हो सकता है। ऐसे बच्चे एक ही चीज या बात को बार-बार करते हैं।

ऑटिज्म एक न्यूरो डेवलेपमेंट की स्थिति है, जिसका असर बच्चे के व्यवहार पर दिखाई देता है। 1 से 3 साल के बीच में इसके लक्षण दिखाई देते हैं, जिसकी पहचान करके समय पर बच्चे के व्यवहार में सुधार किया जा सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में-

Autism symptoms in children: विश्व ऑटिज्म अवेयरनेस डे के मौके पर हम सभी पेरेंट्स को यह बताना चाहते हैं, कि बच्चे में दिख रहे किसी भी असामान्य लक्षण को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

World Autism Awareness Day: ऑटिज्म एक ऐसा डिसऑर्डर है, जिसके बारे में बात किया जाना बहुत ही ज्यादा जरूरी है, क्योंकि यह 3 साल से पहले ही बच्चों में दिखना शुरू हो जाता है और समय पर ध्यान न देने पर संभालना मुश्किल हो सकता है।

World Autism Awareness Day 2026: इन दिनों जब बच्चों में मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ रहा है, तब यह जानना जरूरी क्या मोबाइल और टीवी स्क्रीन की आदत बच्चों में ऑटिज्म जैसे डिसऑर्डर को जन्म दे सकती है?

ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जबकि डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक कंडीशन है। आज हम आसान भाषा में इन दोनों के बारे में जानेंगे, साथ ही यह भी पढ़ेंगे कि इनका पता कब चलता है।

विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के मौके पर बच्चों में होने वाली इस बीमारी के बारे में हम चाइल्ड साइकोलॉजी स्पेशलिस्ट से कुछ खास जानकारियां लेंगे ताकि ऑटिज्म के शुरुआती लक्षणों को पता लगाया जा सके।

Autism in Children: आजकल बच्चों को मोबाइल की लत इतनी ज्यादा हो चुकी है कि फोन छीनते ही बच्चों को गुस्सा आने लगता है, लेकिन जरूरी नहीं है कि ये लक्षण सामान्य ही हों बल्कि ऑटिज्म का संकेत भी हो सकता है।

नाड़ी परीक्षा आयुर्वेद की एक ऐसी प्राचीन चिकित्सा पद्धति है जो शरीर और मन में रोग या असंतुलन की स्थिति को जल्दी से पहचानने में मदद करती है। आइए जानते हैं नाड़ी पकड़कर कौन सी बीमारियों का पता चलता है।

Autism In Kids: आज हम आपको बच्चों में दिखने वाले शुरुआती लक्षणों के बारे में बताने वाले हैं, जो उनमें ऑटिज्म होने की संभावना को दिखा सकते हैं। कैसे? आइए डॉक्टर जोशी से जानते हैं।

World Autism Awareness Day 2025: ऑटिज्म के बारे में लोगों में जानकारी कम होने के कारण कई तरह की धारणाएं, मिथक और कन्फ्यूजन देखी जाती है। डॉक्टर से जानिए ऑटिज्म क्या है और लोगों को इसके बारे में क्या-क्या पता होना चाहिए।

World Autism Awareness Day: अक्सर कई माता-पिता के मन में यह सवाल आता है कि यदि बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है, तो उसे स्कूल भेजने की सही उम्र क्या है? आइए, एक्सपर्ट से जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

Autism Symptoms During Pregnancy: अक्सर कई माता-पिता के मन में यह सवाल आता है कि क्या प्रेगनेंसी के दौरान ऑटिज्म का पता लगाया जा सकता है? आइए, डॉक्टर से जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है बल्कि इसमें पीड़ित का दिमाग अलग तरह से काम करता है। ऑटिज्म से ग्रसित लोगों को सही रास्ता दिखाया जाए तो ये सामान्य जीवन जी सकते हैं।

Autism Spectrum Disorder ke Lakshan: सभी बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। इस विकार का अभी कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। आइए, जानते हैं बच्चों में ऑटिज्म डिसऑर्डर के लक्षण के बारे में-

Autism risk in kids: बच्चों का स्वास्थ्य काफी नाजुक होता है और इसलिए उन्हें कई तरह की बीमारियां होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऑटिज्म भी ऐसी ही एक बीमारी है, जिका खतरा बच्चों में काफी ज्यादा रहता है।

जितनी जल्दी इसके लक्षणों की पहचान की जाए और इलाज किया जाए तो बच्चे की प्रतिभा को निखारने में मदद हो सकती है।

आज इस लेख में हम जानेंगे कि गर्भ में ऑटिज्म का पता लगाया जा सकता है या नहीं।

ऑटिज्म बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म दिवस मनाया जाता है। यह एक तरह की बीमारी है, जो बच्चों में होती है। इस मौके पर आज हम 3 साल की उम्र के बच्चों में दिखने वाले ऑटिज्म के 5 मुख्य लक्षणों के बारे में बताएंगे।

Autism awareness month: ऑटिज्म एक मानसिक विकार है, जिसमें कई गंभीर समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है। इस लेख में एक्सपर्ट्स से जानें बच्चों में देखी जाने वाली इस गंभीर बीमारी के बारे में।

ऑटिज्म डेवलपमेंट से जुड़ा हुआ डिसॉर्डर है जिसमें लोगों को सीखने, पढ़ने और दूसरे लोगों से बात करने में परेशानी हो सकती है।

बच्चा अचानाक से चिड़चिड़ा हो जाए और रात में बार-बार उठे, तो लोग अक्सर इसे बच्चे का व्यवहार समझ लेते हैं। लेकिन कई बार यह परेशानी उनके पेट से जुड़ी हो सकती है। आइए जानते हैं इस विषय के बारे में-

ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चा सही ढंग से अपने व्यवहार और भावनाओं को प्रकट नहीं कर पाता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या यह जन्मजात डिसऑर्डर है? आइए डॉक्टर से जानते हैं इस बारे में-

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ऑटिज्म एक न्यूरो डेवलेपमेंट की स्थिति है, जिसका असर बच्चे के व्यवहार पर दिखाई देता है। 1 से 3 साल के बीच में इसके लक्षण दिखाई देते हैं, जिसकी पहचान करके समय पर बच्चे के व्यवहार में सुधार किया जा सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में-

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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के मौके पर बच्चों में होने वाली इस बीमारी के बारे में हम चाइल्ड साइकोलॉजी स्पेशलिस्ट से कुछ खास जानकारियां लेंगे ताकि ऑटिज्म के शुरुआती लक्षणों को पता लगाया जा सके।

Autism in Children: आजकल बच्चों को मोबाइल की लत इतनी ज्यादा हो चुकी है कि फोन छीनते ही बच्चों को गुस्सा आने लगता है, लेकिन जरूरी नहीं है कि ये लक्षण सामान्य ही हों बल्कि ऑटिज्म का संकेत भी हो सकता है।

नाड़ी परीक्षा आयुर्वेद की एक ऐसी प्राचीन चिकित्सा पद्धति है जो शरीर और मन में रोग या असंतुलन की स्थिति को जल्दी से पहचानने में मदद करती है। आइए जानते हैं नाड़ी पकड़कर कौन सी बीमारियों का पता चलता है।

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World Autism Awareness Day 2025: ऑटिज्म के बारे में लोगों में जानकारी कम होने के कारण कई तरह की धारणाएं, मिथक और कन्फ्यूजन देखी जाती है। डॉक्टर से जानिए ऑटिज्म क्या है और लोगों को इसके बारे में क्या-क्या पता होना चाहिए।

World Autism Awareness Day: अक्सर कई माता-पिता के मन में यह सवाल आता है कि यदि बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है, तो उसे स्कूल भेजने की सही उम्र क्या है? आइए, एक्सपर्ट से जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

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Autism risk in kids: बच्चों का स्वास्थ्य काफी नाजुक होता है और इसलिए उन्हें कई तरह की बीमारियां होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऑटिज्म भी ऐसी ही एक बीमारी है, जिका खतरा बच्चों में काफी ज्यादा रहता है।

जितनी जल्दी इसके लक्षणों की पहचान की जाए और इलाज किया जाए तो बच्चे की प्रतिभा को निखारने में मदद हो सकती है।

Autism awareness month: ऑटिज्म एक मानसिक विकार है, जिसमें कई गंभीर समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है। इस लेख में एक्सपर्ट्स से जानें बच्चों में देखी जाने वाली इस गंभीर बीमारी के बारे में।

ऑटिज्म डेवलपमेंट से जुड़ा हुआ डिसॉर्डर है जिसमें लोगों को सीखने, पढ़ने और दूसरे लोगों से बात करने में परेशानी हो सकती है।

Autism awareness day: हर साल 2 अप्रैल को ऑटिज्म अवेयरनेस डे के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर हम आपको बताएंगे लड़कियों से ज्यादा लड़कों में इसके मामले क्यों पाए जाते हैं।

World Autism Awareness Day 2024 : लोगों में ऑटिज्म के प्रति जागरुकता फैलने के लिए हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म दिवस मनाया जाता है। आइए जानते हैं ऑटिज्म क्या है और 2 से 3 साल के बच्चों में इसके संकेत क्या हैं?

ऑटिस्टिक लोग जब दर्द या असुविधा का अनुभव कर रहे होते हैं तो उन्हें दूसरों को समझाना मुश्किल हो सकता है।

मोबाइल जिसे लोग काफी हेल्पफुल मानते हैं। अब वो धीरे-धीरे घातक बनता जा रहा है। मां-बाप अपने बच्चों के हाथ मोबाइल तो दे देते हैं लेकिन वह यह नहीं समझ रहे की मोबाइल उनके बच्चों को mentally disabled बनाता जा रहा है.

2 अप्रैल को विश्व भर में ऑटिज़्म जागरूकता दिवस मनाया जाता है. ऑटिज़्म क्या है? और इसके लक्षण, कारण और बचाव के बारे एशियन हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर और पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी डॉ. विजय शर्मा बताएंगे. वीडियो देखें.

ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है बल्कि इसमें पीड़ित का दिमाग अलग तरह से काम करता है। ऑटिज्म से ग्रसित लोगों को सही रास्ता दिखाया जाए तो ये सामान्य जीवन जी सकते हैं।

आज इस लेख में हम जानेंगे कि गर्भ में ऑटिज्म का पता लगाया जा सकता है या नहीं।

ऑटिज्म बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म दिवस मनाया जाता है। यह एक तरह की बीमारी है, जो बच्चों में होती है। इस मौके पर आज हम 3 साल की उम्र के बच्चों में दिखने वाले ऑटिज्म के 5 मुख्य लक्षणों के बारे में बताएंगे।