
अस्थमा मरीजों को क्या नहीं खाना चाहिए?
अस्थमा होने पर सांस लेने में परेशानी होती है। समय-समय पर इनहेलर की मदद से सांस लेना पड़ता है। ऐसे में जानते हैं अस्थमा होने पर क्या नहीं खाना चाहिए।

अस्थमा होने पर सांस लेने में परेशानी होती है। समय-समय पर इनहेलर की मदद से सांस लेना पड़ता है। ऐसे में जानते हैं अस्थमा होने पर क्या नहीं खाना चाहिए।

सर्दियों में बच्चों को अस्थमा होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। श्वसन संबंधी से बीमारी न सिर्फ मासूमों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर देती है, बल्कि पेरेंट्स के लिए भी इससे उभर पाना चुनौतीपूर्ण होता है।

चाहे गर्मियों के दौरान धूल, प्रदूषण की बात हो, बसंत के समय एलर्जी बढ़ने का खतरा हो , सर्दी या बारिश के वक्त तापमान में गिरावट हो, इन सभी से सांस की नली में दिक्कत हो सकती है और घरघराहट या फिर सांस फूलने की समस्या हो सकती है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 3 करोड़ 43 लाख लोग अस्थमा से जूझ रहे हैं. अस्थमा को दमा भी कहा जाता है. इस बीमारी में सांस की नलियों में सूजन आ जाता है. अस्थमा के क्या लक्षण होते हैं जानिए इस वीडियो में.

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जो रह-रह हो सकती है। ऐसे में आपको अपने खान-पान को लेकर सर्तक रहना चाहिए। इसलिए जानते हैं अस्थमा में क्या खाएं और किन चीजों को खाने से परहेज करें।

एक शोध में ये पाया गया है कि अगर अस्थमा से पीड़ित लोग हल्का और नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं जैसे रनिंग तो ऐसा करने से उनके फेफड़ों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थमा से पीड़ित लोगों को रनिंग करने से पहले इन तीन बातों पर जरूर विचार करना चाहिए।

आंखों में परेशानी का सामना हर किसी को करना पड़ रहा है। आज के समय में बहुत ही कम उम्र में लोगों की आंखें खराब हो रही हैं। ऐसे में सिंघाड़ा आपकी मदद कर सकता है। सिंघाड़े में विटामिन बी-6 भरपूर रूप से होता है। यह हमारे शरीर में विटामिन बी 6 की कमी नहीं होने देता है। विटामिन बी 6 का सेवन करने से आंखों से जुड़ी सारी समस्याएं चुटकियों में गायब हो जाती हैं।

तुलसी के पत्तों को दूध में उबालकर पीने से सेहत को बहुत ही लाभ होते हैं। इससे हम खुद को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं, जिसके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा। आइए जानते हैं तुलसी के पत्तों को दूध में उबालकर पीने से होने वाले फायदों (Milk and Tulsi Leaves) के बारे में-

प्रेग्नेंसी, अस्थमा, डायबिटीज (Diabetes) औऱ ह्रदय रोगियों (Blood pressure) के लिए शरीफा रामबाण की तरह काम करता है। इसमें विटामिन सी (Vitamin-c) और एंटी-ऑक्सीडेंट्स काफी मात्रा में मौजूद है। इससे एलर्जी और कैंसर जैसी बीमारी से बचाव किया जा सकता है।

अस्थमा के मरीज़ों को अपने खानपान का ख़ास ध्यान रखना पड़ता है। बहुत सी चीज़ें ऐसी होती हैं जो एलर्जी बढ़ाकर अस्थमा के मरीज़ों को नुकसान पहुंचाती हैं।

सर्दियों में बच्चों को अस्थमा होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। श्वसन संबंधी से बीमारी न सिर्फ मासूमों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर देती है, बल्कि पेरेंट्स के लिए भी इससे उभर पाना चुनौतीपूर्ण होता है।

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जो रह-रह हो सकती है। ऐसे में आपको अपने खान-पान को लेकर सर्तक रहना चाहिए। इसलिए जानते हैं अस्थमा में क्या खाएं और किन चीजों को खाने से परहेज करें।

एक शोध में ये पाया गया है कि अगर अस्थमा से पीड़ित लोग हल्का और नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं जैसे रनिंग तो ऐसा करने से उनके फेफड़ों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थमा से पीड़ित लोगों को रनिंग करने से पहले इन तीन बातों पर जरूर विचार करना चाहिए।

आंखों में परेशानी का सामना हर किसी को करना पड़ रहा है। आज के समय में बहुत ही कम उम्र में लोगों की आंखें खराब हो रही हैं। ऐसे में सिंघाड़ा आपकी मदद कर सकता है। सिंघाड़े में विटामिन बी-6 भरपूर रूप से होता है। यह हमारे शरीर में विटामिन बी 6 की कमी नहीं होने देता है। विटामिन बी 6 का सेवन करने से आंखों से जुड़ी सारी समस्याएं चुटकियों में गायब हो जाती हैं।

तुलसी के पत्तों को दूध में उबालकर पीने से सेहत को बहुत ही लाभ होते हैं। इससे हम खुद को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं, जिसके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा। आइए जानते हैं तुलसी के पत्तों को दूध में उबालकर पीने से होने वाले फायदों (Milk and Tulsi Leaves) के बारे में-

प्रेग्नेंसी, अस्थमा, डायबिटीज (Diabetes) औऱ ह्रदय रोगियों (Blood pressure) के लिए शरीफा रामबाण की तरह काम करता है। इसमें विटामिन सी (Vitamin-c) और एंटी-ऑक्सीडेंट्स काफी मात्रा में मौजूद है। इससे एलर्जी और कैंसर जैसी बीमारी से बचाव किया जा सकता है।

अस्थमा के मरीज़ों को अपने खानपान का ख़ास ध्यान रखना पड़ता है। बहुत सी चीज़ें ऐसी होती हैं जो एलर्जी बढ़ाकर अस्थमा के मरीज़ों को नुकसान पहुंचाती हैं।

चाहे गर्मियों के दौरान धूल, प्रदूषण की बात हो, बसंत के समय एलर्जी बढ़ने का खतरा हो , सर्दी या बारिश के वक्त तापमान में गिरावट हो, इन सभी से सांस की नली में दिक्कत हो सकती है और घरघराहट या फिर सांस फूलने की समस्या हो सकती है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 3 करोड़ 43 लाख लोग अस्थमा से जूझ रहे हैं. अस्थमा को दमा भी कहा जाता है. इस बीमारी में सांस की नलियों में सूजन आ जाता है. अस्थमा के क्या लक्षण होते हैं जानिए इस वीडियो में.