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अपोलो में इलाज कराना होगा आसान, मरीजों की फाइनेंस सुविधा के लिए आया को-ब्रांडेड हेल्थ ईएमआई कार्ड

अपोलो में इलाज कराना होगा आसान, मरीजों की फाइनेंस सुविधा के लिए आया को-ब्रांडेड हेल्थ ईएमआई कार्ड

अपोलो होस्पिटल्स और बजाज फिनसर्व ग्रुप ने अस्पताल के भुगतान को आसान बनाने के लिए साझेदारी करते हुए फाइनैंस सुविधाएं उपलब्ध कराने जा रही है, जिसके लिए इन्होंने पेश किया है को-ब्राण्डेड हेल्थ ईएमआई कार्ड।

लिवर डिजीज के लक्षणों को समय पर पहचानना है जरूरी वरना लिवर ट्रांसप्लांट करवाने की आ सकती है नौबत

लिवर डिजीज के लक्षणों को समय पर पहचानना है जरूरी वरना लिवर ट्रांसप्लांट करवाने की आ सकती है नौबत

सौम्यदीप का मात्र 6 साल की उम्र में ही लिवर ट्रांसप्लान्ट किया गया था और आज वह सफल और स्वस्थ जिंदगी जी रहे हैं।

अपोलो फाउंडेशन ने 1600 एनसीसी कैडेट्स को बेसिक लाइफ सपोर्ट के लिए किया प्रशिक्षित

अपोलो फाउंडेशन ने 1600 एनसीसी कैडेट्स को बेसिक लाइफ सपोर्ट के लिए किया प्रशिक्षित

बेसिक लाइफ सपोर्ट के तहत चिकित्सा प्रक्रियाओं की एक श्रृंखला होती है। मरीज को घातक स्थिति से बाहर निकालने के लिए इन प्रक्रियओं का इस्तेमाल किया जाता है। बेसिक लाइफ सपोर्ट (Basic life support) को बीएलएस भी कहा जाता है। यह मुश्किल मामलों में मरीज को जरूरी चिकित्सकीय देखभाल प्रदान करता है, जब तक कि उसे एडवांस्ड उपचार या देखभाल न मिल जाए।

दिल की बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों में कीहोल सर्जरी के जरिए मल्टीपल स्टेंटिंग हो रही है कारगर

दिल की बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों में कीहोल सर्जरी के जरिए मल्टीपल स्टेंटिंग हो रही है कारगर

दिल की बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों में कीहोल सर्जरी के जरिए मल्टीपल स्टेंटिंग हो रही है कारगर।

दिल की जटिल बीमारी से पीड़ित बच्ची को मिला नया जीवन, दिल ने बंद कर दिया था धड़कना

दिल की जटिल बीमारी से पीड़ित बच्ची को मिला नया जीवन, दिल ने बंद कर दिया था धड़कना

एएलसीएपीए दिल की जन्मजात बीमारी है, जिसमें कार्डियक मसल्स (दिल की मांसपेशियां) को ब्लड सप्लाई (खून की आपूर्ति) करने वाली बाईं कोरोनरी आर्टरी आर्योटा की बजाय पल्मोनरी आर्टरी से जुड़ी होती है। इस वजह से दिल की बाईं ओर की मांसपेशियों (कार्डियक मसल्स) को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और इस हिस्से में बिना ऑक्सीजन वाला खून ही पहुंचता है।

भारत में होने वाली एक चैथाई मौतों का कारण कार्डियोवैस्कुलर रोग

भारत में होने वाली एक चैथाई मौतों का कारण कार्डियोवैस्कुलर रोग

भारत में होने वाली एक चैथाई मौतों का कारण कार्डियोवैस्कुलर रोग है। इस्केमिक हार्ट डिजीज एवं स्ट्रोक भारत में कार्डियोेवैस्कुलर मौतों का मुख्य कारण हैं।

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने देश भर में ऑर्गन डोनेशन ड्राइव के लिए आईएमए-वूमेन डॉक्टर्स विंग के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने देश भर में ऑर्गन डोनेशन ड्राइव के लिए आईएमए-वूमेन डॉक्टर्स विंग के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर

प्रत्येक व्यक्ति अपने अंगों का दान करके 7 लोगों की जान बचा सकता है। वर्तमान में, भारत को 10 लाख से अधिक कॉर्नियल प्रत्यारोपण, 50,000 हृदय प्रत्यारोपण और 20,000 से अधिक फेफड़े के प्रत्यारोपण की आवश्यकता है।

अपोलो हाॅस्पिटल्स के विशेषज्ञों ने छह महीने के केन्याई बच्चे को दिया नया जीवन, ''टाॅसिंग-बिंग एनोमली'' नामक बीमारी से था पीड़ित

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जब इमेन्युअल को अपोलो लाया गया, तो वह सायनोटिक से पीड़ित था यानी उसके खून में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण त्वचा का रंग नीला पड़ता जा रहा था।

अपोलो हॉस्पिटल्स ने लखनऊ में 330 बेड्स वाले सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के साथ भारत के केन्द्र में किया प्रवेश

अपोलो हॉस्पिटल्स ने लखनऊ में 330 बेड्स वाले सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के साथ भारत के केन्द्र में किया प्रवेश

दशकों से उत्तरप्रदेश के नागरिक दिल्ली या अन्य राज्यों में आकर अपोलो की सेवाओं का लाभ उठाते रहे हैं। हमारी उच्च गुणवत्ता की सेवाओं में उनका सतत भरोसा हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसी भरोसे ने हमें क्षेत्र में विस्तार के लिए प्रेरित किया है।

अपोलो हॉस्पिटल्स ने कैंसर पीड़ितों के लिए शुरू किया दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला प्रोटोन थेरेपी सेंटर

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अपोलो प्रोटोन कैंसर सेंटर (एपीपीसी) बना भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कैंसर पीड़ितों के लिए आशा की नई किरण।

इम्युनोथेरेपी कैंसर के इलाज में लाएगी नई क्रान्ति, जानें कैंसर के इलाज में कैसे है ये फायदेमंद

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भारत में 2018 में कैंसर के कारण 8.17 फीसदी मौतें हुईं। एक अनुमान के मुताबिक, 2020 तक देश में विभिन्न प्रकार के कैंसर के कारण 8.8 लाख मौतें होंगी और 2030 तक आंकड़ा दोगुना होने का अनुमान है।

भारत में बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा ! ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

भारत में बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा ! ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

11वें ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' के मौके पर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइन्सेज इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने स्ट्रोक पर 11वें सीएमई (कन्टीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) सेमिनार का आयोजन किया।

स्ट्रोक की शिकार बच्ची को 'गोल्डेन पीरियड' में इलाज देकर बचाया

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स्ट्रोक के बाद तकरीबन चार घंटे की अवधि को ''गोल्डेन पीरियड'' कहते हैं। इस अवधि के अंदर सही इलाज मिलने पर मरीज के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

अपोलो में इलाज कराना होगा आसान, मरीजों की फाइनेंस सुविधा के लिए आया को-ब्रांडेड हेल्थ ईएमआई कार्ड

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अपोलो होस्पिटल्स और बजाज फिनसर्व ग्रुप ने अस्पताल के भुगतान को आसान बनाने के लिए साझेदारी करते हुए फाइनैंस सुविधाएं उपलब्ध कराने जा रही है, जिसके लिए इन्होंने पेश किया है को-ब्राण्डेड हेल्थ ईएमआई कार्ड।

लिवर डिजीज के लक्षणों को समय पर पहचानना है जरूरी वरना लिवर ट्रांसप्लांट करवाने की आ सकती है नौबत

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सौम्यदीप का मात्र 6 साल की उम्र में ही लिवर ट्रांसप्लान्ट किया गया था और आज वह सफल और स्वस्थ जिंदगी जी रहे हैं।

अपोलो फाउंडेशन ने 1600 एनसीसी कैडेट्स को बेसिक लाइफ सपोर्ट के लिए किया प्रशिक्षित

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बेसिक लाइफ सपोर्ट के तहत चिकित्सा प्रक्रियाओं की एक श्रृंखला होती है। मरीज को घातक स्थिति से बाहर निकालने के लिए इन प्रक्रियओं का इस्तेमाल किया जाता है। बेसिक लाइफ सपोर्ट (Basic life support) को बीएलएस भी कहा जाता है। यह मुश्किल मामलों में मरीज को जरूरी चिकित्सकीय देखभाल प्रदान करता है, जब तक कि उसे एडवांस्ड उपचार या देखभाल न मिल जाए।

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एएलसीएपीए दिल की जन्मजात बीमारी है, जिसमें कार्डियक मसल्स (दिल की मांसपेशियां) को ब्लड सप्लाई (खून की आपूर्ति) करने वाली बाईं कोरोनरी आर्टरी आर्योटा की बजाय पल्मोनरी आर्टरी से जुड़ी होती है। इस वजह से दिल की बाईं ओर की मांसपेशियों (कार्डियक मसल्स) को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और इस हिस्से में बिना ऑक्सीजन वाला खून ही पहुंचता है।

भारत में होने वाली एक चैथाई मौतों का कारण कार्डियोवैस्कुलर रोग

भारत में होने वाली एक चैथाई मौतों का कारण कार्डियोवैस्कुलर रोग

भारत में होने वाली एक चैथाई मौतों का कारण कार्डियोवैस्कुलर रोग है। इस्केमिक हार्ट डिजीज एवं स्ट्रोक भारत में कार्डियोेवैस्कुलर मौतों का मुख्य कारण हैं।

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने देश भर में ऑर्गन डोनेशन ड्राइव के लिए आईएमए-वूमेन डॉक्टर्स विंग के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने देश भर में ऑर्गन डोनेशन ड्राइव के लिए आईएमए-वूमेन डॉक्टर्स विंग के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर

प्रत्येक व्यक्ति अपने अंगों का दान करके 7 लोगों की जान बचा सकता है। वर्तमान में, भारत को 10 लाख से अधिक कॉर्नियल प्रत्यारोपण, 50,000 हृदय प्रत्यारोपण और 20,000 से अधिक फेफड़े के प्रत्यारोपण की आवश्यकता है।

अपोलो हाॅस्पिटल्स के विशेषज्ञों ने छह महीने के केन्याई बच्चे को दिया नया जीवन, ''टाॅसिंग-बिंग एनोमली'' नामक बीमारी से था पीड़ित

अपोलो हाॅस्पिटल्स के विशेषज्ञों ने छह महीने के केन्याई बच्चे को दिया नया जीवन, ''टाॅसिंग-बिंग एनोमली'' नामक बीमारी से था पीड़ित

जब इमेन्युअल को अपोलो लाया गया, तो वह सायनोटिक से पीड़ित था यानी उसके खून में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण त्वचा का रंग नीला पड़ता जा रहा था।

अपोलो हॉस्पिटल्स ने लखनऊ में 330 बेड्स वाले सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के साथ भारत के केन्द्र में किया प्रवेश

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दशकों से उत्तरप्रदेश के नागरिक दिल्ली या अन्य राज्यों में आकर अपोलो की सेवाओं का लाभ उठाते रहे हैं। हमारी उच्च गुणवत्ता की सेवाओं में उनका सतत भरोसा हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसी भरोसे ने हमें क्षेत्र में विस्तार के लिए प्रेरित किया है।

अपोलो हॉस्पिटल्स ने कैंसर पीड़ितों के लिए शुरू किया दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला प्रोटोन थेरेपी सेंटर

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अपोलो प्रोटोन कैंसर सेंटर (एपीपीसी) बना भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कैंसर पीड़ितों के लिए आशा की नई किरण।

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भारत में 2018 में कैंसर के कारण 8.17 फीसदी मौतें हुईं। एक अनुमान के मुताबिक, 2020 तक देश में विभिन्न प्रकार के कैंसर के कारण 8.8 लाख मौतें होंगी और 2030 तक आंकड़ा दोगुना होने का अनुमान है।

भारत में बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा ! ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

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11वें ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' के मौके पर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइन्सेज इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने स्ट्रोक पर 11वें सीएमई (कन्टीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) सेमिनार का आयोजन किया।

स्ट्रोक की शिकार बच्ची को 'गोल्डेन पीरियड' में इलाज देकर बचाया

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स्ट्रोक के बाद तकरीबन चार घंटे की अवधि को ''गोल्डेन पीरियड'' कहते हैं। इस अवधि के अंदर सही इलाज मिलने पर मरीज के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।