
कोरोना वायरस के सभी वेरिएंट्स को बेअसर कर देगी ये एक एंटीबॉडी, शोध में हुआ बड़ा खुलासा
Sp1-77 antibody: वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एंटीबॉडी की खोज की है जो कि कोरोना वायरस के सभी वेरिएंट्स के खिलाफ कारगर तरीके से काम कर सकती है।

Sp1-77 antibody: वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एंटीबॉडी की खोज की है जो कि कोरोना वायरस के सभी वेरिएंट्स के खिलाफ कारगर तरीके से काम कर सकती है।

विश्लेषण से पता चला है कि ओमिक्रॉन के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों मे अधिकतर को टीका लग चुका था और इसी वजह से उनमें कोविड संबंधी स्वास्थ्य जटिलताएं कम पाई गई थी।

हाल ही में किए गए एक प्रयोगशाला के निष्कर्षों से यह जानकारी मिली है कि कोविड-19 वैक्सीन की तीसरी बूस्टर खुराक एंटीबॉडी के स्तर को सफलतापूर्वक बढ़ाने में सक्षम है, जो कि ओमिक्रोन वेरिेएंट को बेअसर कर देता है।

Delhi Covid-19 News Update: दिल्ली में कोरोनावायरस के नए मामलों में कमी आने के साथ पिछले 5 दिनों में एक भी मौत नहीं हुई है।

हरियाणा में 36,520 सैंपल साइज के तीसरे कोविड-19 सीरो सर्वे में पाया गया है कि 76.3 फीसदी आबादी (शहर में 78.1 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में 75.1 फीसदी) में वायरस एंटीबॉडीज हैं।

आईसीएमआर (ICMR) ने एक स्टडी के आधार पर बयान दिया है कि ऐसे लोग जिन्हें कोरोना वायरस संक्रमण (people with Covid history) हो चुका है उन्हें कोरोना वैक्सीन की 2 नहीं बल्कि केवल एक डोज़ लेना ही पर्याप्त है। (ICMR On Vaccination After Covid-19 Infection)

डीएनए बेस्ड ये वैक्सीन डिपार्टमेंट ऑफ बायो टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर बनाई गई है, अनुमति मिलने से पहले इस वैक्सीन का 3 स्टेज में ट्रायल हुआ था, इसका ट्रायल लगभग 28000 लोगों पर किया गया है, और यह वैक्सीन कोरोनावायरस के खिलाफ 66% तक प्रभावी है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एंटीबॉडी सुरक्षा के बारे में समझ को बेहतर बनाने में मदद करने के अलावा, यह योजना उन लोगों के किसी भी समूह के बारे में भी जानकारी देगी, जिन्होंने कोरोनावायरस होने के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित नहीं की थी। ( Covid-19 Antibody Response Test)

फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन हॉस्पिटल्स एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट (यूसीएलएच) की टीम ने कहा कि यह समझना कि कैसे कुछ वेरिएंट अन्य वेरिएंट के खिलाफ एक प्रभावी एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने में सक्षम हो सकते हैं, भविष्य के टीके का डिजाइन सूचित करने में मदद कर सकते हैं। (Antibodies produced by Covid variant)

बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक किए गए इस सर्वे में दावा किया गया है कि इन दोनों राज्यों की लगभग 76 फीसदी आबादी में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी है। (Highest Covid Antibodies Among Indian States)

एक नयी स्टडी के अनुसार, एंटीबॉडीज के स्तर में यह गिरावट 10 सप्ताह में 50 फीसदी से भी अधिक देखी गयी। जिसके बाद कोविड-19 वैक्सीन की बूस्टर डोज़ की ज़रूरत भी बढ़ने लगी।( Pfizer & AstraZeneca Vaccine Antibodies in Hindi)

आइसीएमआर के चौथे सीरो सर्वे में पाया गया है कि भारत में लगभग 40 करोड़ लोगों में कोरोना एंटीबाडीज़ नहीं बन सकी हैं और इसीलिए, इन लोगों के लिए संक्रमित होने की आशंका बनी हुई है। (Covid Antibodies in Indian population in Hindi)

बृहन्मुंबई नगर निगम यानि बीएमसी (BMC) द्वारा किए गए एक सीरो-सर्वेक्षण से पता चला है कि मुंबई में बच्चों की 50 प्रतिशत आबादी ने अपेक्षित तीसरी लहर से पहले, कोविड -19 एंटीबॉडी विकसित कर ली है। (Covid Antibodies in Mumbai Kids)

एक नयी स्टडी में कहा गया है कि, अजन्मे बच्चे को उनकी माता कोरोना वायरस से सुरक्षित रख सकती है। दरअसल, इस रिसर्च के परिणामों के आधार पर दावा किया गया है कि प्रेगनेंट माता से गर्भ में पल रहे बच्चे या भ्रूण तक कोरोना एंटीबॉडीज़ पहुंच सकती है। (Covid-19 Antibodies in fetus in hindi)

आईसीएमआर ने एक सर्वे में ये खुलासा किया है कि देशभर में करीब 30 करोड़ लोगों के पास कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हर्ड इम्यूनिटी है। आइए जानते हैं क्या कहता है सर्वे।

एंटीबॉडी (Antibodies) एक तत्व होता है, जिसे हमारा इम्युन सिस्टम (Immune System) बनाता है। एंटीबॉडी (Antibodies) का काम शरीर में वायरस के असर को कम करना होता है।

सरकार के कोविड-19 वैक्सीनेशन अभियान को झटका लग सकता है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक, वैक्सीन लगवाने को लेकर 69 प्रतिशत भारतीय संकोच कर रहे हैं।

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ने क्लिनिकल परीक्षण और 'कोविशिल्ड' के निर्माण के लिए ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ भागीदारी की है, जबकि भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर 'कोवैक्सीन' बनाई है।

दिल्ली सरकार के अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा, "नए वेरिएंट से संक्रमित पाए गए सभी मरीजों को संदिग्ध रोगियों के लिए नामित एक विशेष वार्ड के अलग-अलग कमरों में रखा गया है।"

पुर्तगाली शोधकर्ताओं के अनुसार, महिलाओं की तुलना में औसत तौर पर पुरुष कोविड -19 एंटीबॉडी का अधिक उत्पादन करते हैं। 90 फीसदी रोगियों में सार्स-कोव-2 वायरस के संपर्क में आने के सात महीनों तक के बाद एंटीबॉडी मिली हैं।

एक शोध में कहा गया है कि जब किसी के शरीर में कोरोनावायरस अटैक करता है, तो शरीर कोरोनावायरस के खिलाफ जो एंटीबॉडीज का निर्माण करता है, वह दो से तीन महीने तक ही आपको सुरक्षित रख सकता है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या हम कोरोना से ऐसे ही लड़ते रहेंगे?

सुबह उठने के बाद जो काम करते हैं वो आपकी फिटनेस और हेल्थ पर असर डालता है. वजन कम करने, कब्ज और गैस जैसी परेशानियों से बचने के लिए सुबह की इन आदतों को आप भी अपना सकते हैं.

शोधकर्ताओं ने चेताया है कि पानी की व्यवस्था के माध्यम से एआरजी जैसे नए और उभरते हुए दूषित पदार्थो के प्रसार से एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी सुपर बग्स के विकास में वृद्धि हुई है.

अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि एंटीबॉडी को निष्क्रिय करना, लेकिन प्रतिरक्षा प्रणाली के अन्य पहलुओं को बनाए रखना, वायरस को रोकने की कुंजी है।

Sp1-77 antibody: वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एंटीबॉडी की खोज की है जो कि कोरोना वायरस के सभी वेरिएंट्स के खिलाफ कारगर तरीके से काम कर सकती है।

विश्लेषण से पता चला है कि ओमिक्रॉन के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों मे अधिकतर को टीका लग चुका था और इसी वजह से उनमें कोविड संबंधी स्वास्थ्य जटिलताएं कम पाई गई थी।

हाल ही में किए गए एक प्रयोगशाला के निष्कर्षों से यह जानकारी मिली है कि कोविड-19 वैक्सीन की तीसरी बूस्टर खुराक एंटीबॉडी के स्तर को सफलतापूर्वक बढ़ाने में सक्षम है, जो कि ओमिक्रोन वेरिेएंट को बेअसर कर देता है।

Delhi Covid-19 News Update: दिल्ली में कोरोनावायरस के नए मामलों में कमी आने के साथ पिछले 5 दिनों में एक भी मौत नहीं हुई है।

हरियाणा में 36,520 सैंपल साइज के तीसरे कोविड-19 सीरो सर्वे में पाया गया है कि 76.3 फीसदी आबादी (शहर में 78.1 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में 75.1 फीसदी) में वायरस एंटीबॉडीज हैं।

आईसीएमआर (ICMR) ने एक स्टडी के आधार पर बयान दिया है कि ऐसे लोग जिन्हें कोरोना वायरस संक्रमण (people with Covid history) हो चुका है उन्हें कोरोना वैक्सीन की 2 नहीं बल्कि केवल एक डोज़ लेना ही पर्याप्त है। (ICMR On Vaccination After Covid-19 Infection)

डीएनए बेस्ड ये वैक्सीन डिपार्टमेंट ऑफ बायो टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर बनाई गई है, अनुमति मिलने से पहले इस वैक्सीन का 3 स्टेज में ट्रायल हुआ था, इसका ट्रायल लगभग 28000 लोगों पर किया गया है, और यह वैक्सीन कोरोनावायरस के खिलाफ 66% तक प्रभावी है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एंटीबॉडी सुरक्षा के बारे में समझ को बेहतर बनाने में मदद करने के अलावा, यह योजना उन लोगों के किसी भी समूह के बारे में भी जानकारी देगी, जिन्होंने कोरोनावायरस होने के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित नहीं की थी। ( Covid-19 Antibody Response Test)

फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन हॉस्पिटल्स एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट (यूसीएलएच) की टीम ने कहा कि यह समझना कि कैसे कुछ वेरिएंट अन्य वेरिएंट के खिलाफ एक प्रभावी एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने में सक्षम हो सकते हैं, भविष्य के टीके का डिजाइन सूचित करने में मदद कर सकते हैं। (Antibodies produced by Covid variant)

बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक किए गए इस सर्वे में दावा किया गया है कि इन दोनों राज्यों की लगभग 76 फीसदी आबादी में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी है। (Highest Covid Antibodies Among Indian States)

एक नयी स्टडी के अनुसार, एंटीबॉडीज के स्तर में यह गिरावट 10 सप्ताह में 50 फीसदी से भी अधिक देखी गयी। जिसके बाद कोविड-19 वैक्सीन की बूस्टर डोज़ की ज़रूरत भी बढ़ने लगी।( Pfizer & AstraZeneca Vaccine Antibodies in Hindi)

आइसीएमआर के चौथे सीरो सर्वे में पाया गया है कि भारत में लगभग 40 करोड़ लोगों में कोरोना एंटीबाडीज़ नहीं बन सकी हैं और इसीलिए, इन लोगों के लिए संक्रमित होने की आशंका बनी हुई है। (Covid Antibodies in Indian population in Hindi)

बृहन्मुंबई नगर निगम यानि बीएमसी (BMC) द्वारा किए गए एक सीरो-सर्वेक्षण से पता चला है कि मुंबई में बच्चों की 50 प्रतिशत आबादी ने अपेक्षित तीसरी लहर से पहले, कोविड -19 एंटीबॉडी विकसित कर ली है। (Covid Antibodies in Mumbai Kids)

एक नयी स्टडी में कहा गया है कि, अजन्मे बच्चे को उनकी माता कोरोना वायरस से सुरक्षित रख सकती है। दरअसल, इस रिसर्च के परिणामों के आधार पर दावा किया गया है कि प्रेगनेंट माता से गर्भ में पल रहे बच्चे या भ्रूण तक कोरोना एंटीबॉडीज़ पहुंच सकती है। (Covid-19 Antibodies in fetus in hindi)

आईसीएमआर ने एक सर्वे में ये खुलासा किया है कि देशभर में करीब 30 करोड़ लोगों के पास कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हर्ड इम्यूनिटी है। आइए जानते हैं क्या कहता है सर्वे।

एंटीबॉडी (Antibodies) एक तत्व होता है, जिसे हमारा इम्युन सिस्टम (Immune System) बनाता है। एंटीबॉडी (Antibodies) का काम शरीर में वायरस के असर को कम करना होता है।

सरकार के कोविड-19 वैक्सीनेशन अभियान को झटका लग सकता है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक, वैक्सीन लगवाने को लेकर 69 प्रतिशत भारतीय संकोच कर रहे हैं।

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ने क्लिनिकल परीक्षण और 'कोविशिल्ड' के निर्माण के लिए ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ भागीदारी की है, जबकि भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर 'कोवैक्सीन' बनाई है।

दिल्ली सरकार के अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा, "नए वेरिएंट से संक्रमित पाए गए सभी मरीजों को संदिग्ध रोगियों के लिए नामित एक विशेष वार्ड के अलग-अलग कमरों में रखा गया है।"

पुर्तगाली शोधकर्ताओं के अनुसार, महिलाओं की तुलना में औसत तौर पर पुरुष कोविड -19 एंटीबॉडी का अधिक उत्पादन करते हैं। 90 फीसदी रोगियों में सार्स-कोव-2 वायरस के संपर्क में आने के सात महीनों तक के बाद एंटीबॉडी मिली हैं।

एक शोध में कहा गया है कि जब किसी के शरीर में कोरोनावायरस अटैक करता है, तो शरीर कोरोनावायरस के खिलाफ जो एंटीबॉडीज का निर्माण करता है, वह दो से तीन महीने तक ही आपको सुरक्षित रख सकता है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या हम कोरोना से ऐसे ही लड़ते रहेंगे?

शोधकर्ताओं ने चेताया है कि पानी की व्यवस्था के माध्यम से एआरजी जैसे नए और उभरते हुए दूषित पदार्थो के प्रसार से एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी सुपर बग्स के विकास में वृद्धि हुई है.

अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि एंटीबॉडी को निष्क्रिय करना, लेकिन प्रतिरक्षा प्रणाली के अन्य पहलुओं को बनाए रखना, वायरस को रोकने की कुंजी है।