अल्जाइमर से बचाएगी नई दवा, समझें डिमेंशिया और अल्जाइमर का फर्क
प्रीक्लिनिकल शोध को जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी एंड एक्सपेरीमेंटल थेरेप्यूटिक्स में प्रकाशित किया गया है। इसमें पाया गया है कि दवा-बीपीएन14770-अमलॉइड बीटा के प्रभावों को रोकती है।
प्रीक्लिनिकल शोध को जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी एंड एक्सपेरीमेंटल थेरेप्यूटिक्स में प्रकाशित किया गया है। इसमें पाया गया है कि दवा-बीपीएन14770-अमलॉइड बीटा के प्रभावों को रोकती है।
हाल ही में हुए एक शोध में कहा गया है कि अल्जाइमर के एन्जाइम की गतिशीलता को रोकने में पीपल काफी मददगार हो सकता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अल्जाइमर की बीमारी में मस्तिष्क के वे हिस्से कमजोर हो जाते हैं जो आपको दिन में जगाए रखते हैं।
नींद न पूरी होने से सिर्फ मस्तिष्क ही नहीं बल्कि पूरे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। नींद न पूरी होने से आप फ्रेश महसूस नहीं करतीं। दिमाग रिलैक्स नहीं होने के कारण आपको थकान महसूस होती है, बॉडी पेन होता है, किसी भी काम पर फोकस करने में दिक्कत होती है।
अभी अल्जाइमर बीमारी के बारे में मस्तिष्क के स्कैन और सेरीब्रोस्पाइनल तरल के परीक्षण से पता लगाया जाता है, यह तरल मेरूदंड में सूई डाल कर निकाला जाता है।
उम्र बढ़ने के साथ दिमाग भी कमजोर होने लगता है। कुछ लोगों को अल्जाइमर की परेशानी भी हो जाती है।
नवंबर महीने में मनाये जाने वाले इस विशेष कार्यक्रम के बारे में हेल्थ के क्षेत्र में काम करने वालों को जरूर जानना चाहिए।
रोजाना का खान-पान और रहन-सहन का असर इंसान की सेहत पर सीधा पड़ता है। हाल ही में आयी एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अल्जाइमर रोग की संभावना तेजी से बढ़ रही है।
हल्दी में पाए जाने वाले ‘करक्यूमिन’ में ऑक्सीकरण-रोधी गुण होते हैं। इसे एक संभावित कारण बताया गया है कि भारत में जहां करक्यूमिन आहार में शामिल होता है, बूढ़े-बुजुर्ग अल्जाइमर की चपेट में कम आते हैं। उनकी याददाश्त भी तुलनात्मक रूप से अच्छी होती है।
एशिया में लगातार बढ़ रही है डिमेंशिया ग्रस्त लोगों की संख्या।
इसके लिए सावधानियां और व्यायाम ज़रूर हैं, जो इस बीमारी में काफ़ी हद तक नियंत्रण में रखते हैं।
यह बीमारी अब केवल बूढ़ों तक ही सीमित नहीं रही है। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चल सकती है। इस रोग के प्रारंभिक लक्षण याद्दाश्त में कमी, भौतिक वातावरण और भाषा में बाधा आदि है।
आंकड़ों की बात करें तो दुनिया में हर 4 सेकेंड में किसी न किसी को अल्जाइमर होने का पता चलता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि आप अलग-थलग रहेंगे, किसी से बात नहीं करेंगे, तो भविष्य में आपके इस रोग से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ सकती है। अधिक लोगों के साथ रहने, उनसे बातचीत करने से इस रोग से बचा जा सकता है।
'डीमेंशिया' और 'अल्जाइमर' दोनों अलग स्थितियां हैं, इन्हें समझने की है जरूरत।
अल्जाइमर्स डिजीज व्यक्ति के सोचने और समझने की क्षमता को पूरी तरह प्रभावित करता है। इससे बचाव के लिए नियमित सैर व मानसिक व्यायाम जरूरी है।
लीवर की बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होती रही दवा, अल्जाइमर से क्षतिग्रस्त हुई कोशिकाओं को फिर से दुरुस्त करने में मदद कर सकती हैं।
बेंजोडाइजेपाइन्स एक तरह की नींद आने की गोली है। इसके नियमित सेवन से अल्जाइमर्स डिजीज का खतरा बढ़ता है।
नींद न पूरी होने से सिर्फ मस्तिष्क ही नहीं बल्कि पूरे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। नींद न पूरी होने से आप फ्रेश महसूस नहीं करतीं। दिमाग रिलैक्स नहीं होने के कारण आपको थकान महसूस होती है, बॉडी पेन होता है, किसी भी काम पर फोकस करने में दिक्कत होती है।
अभी अल्जाइमर बीमारी के बारे में मस्तिष्क के स्कैन और सेरीब्रोस्पाइनल तरल के परीक्षण से पता लगाया जाता है, यह तरल मेरूदंड में सूई डाल कर निकाला जाता है।
उम्र बढ़ने के साथ दिमाग भी कमजोर होने लगता है। कुछ लोगों को अल्जाइमर की परेशानी भी हो जाती है।
नवंबर महीने में मनाये जाने वाले इस विशेष कार्यक्रम के बारे में हेल्थ के क्षेत्र में काम करने वालों को जरूर जानना चाहिए।
रोजाना का खान-पान और रहन-सहन का असर इंसान की सेहत पर सीधा पड़ता है। हाल ही में आयी एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अल्जाइमर रोग की संभावना तेजी से बढ़ रही है।
हल्दी में पाए जाने वाले ‘करक्यूमिन’ में ऑक्सीकरण-रोधी गुण होते हैं। इसे एक संभावित कारण बताया गया है कि भारत में जहां करक्यूमिन आहार में शामिल होता है, बूढ़े-बुजुर्ग अल्जाइमर की चपेट में कम आते हैं। उनकी याददाश्त भी तुलनात्मक रूप से अच्छी होती है।
एशिया में लगातार बढ़ रही है डिमेंशिया ग्रस्त लोगों की संख्या।
इसके लिए सावधानियां और व्यायाम ज़रूर हैं, जो इस बीमारी में काफ़ी हद तक नियंत्रण में रखते हैं।
यह बीमारी अब केवल बूढ़ों तक ही सीमित नहीं रही है। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चल सकती है। इस रोग के प्रारंभिक लक्षण याद्दाश्त में कमी, भौतिक वातावरण और भाषा में बाधा आदि है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि आप अलग-थलग रहेंगे, किसी से बात नहीं करेंगे, तो भविष्य में आपके इस रोग से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ सकती है। अधिक लोगों के साथ रहने, उनसे बातचीत करने से इस रोग से बचा जा सकता है।
'डीमेंशिया' और 'अल्जाइमर' दोनों अलग स्थितियां हैं, इन्हें समझने की है जरूरत।
अल्जाइमर्स डिजीज व्यक्ति के सोचने और समझने की क्षमता को पूरी तरह प्रभावित करता है। इससे बचाव के लिए नियमित सैर व मानसिक व्यायाम जरूरी है।
लीवर की बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होती रही दवा, अल्जाइमर से क्षतिग्रस्त हुई कोशिकाओं को फिर से दुरुस्त करने में मदद कर सकती हैं।
बेंजोडाइजेपाइन्स एक तरह की नींद आने की गोली है। इसके नियमित सेवन से अल्जाइमर्स डिजीज का खतरा बढ़ता है।
हर्पीस सिम्पेक्स वायरस (एचएसवी) ज्यादातर मानव को युवा काल में संक्रमित करता है।
कई शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि जो लोग नियमित व्यायाम या पसीना बहाने वाले वर्कआउट करते हैं तो उनकी सेक्स लाइफ बेहतर होती है।
अगर आपको भी शराब की लत है तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है क्योंकि एक नये रिसर्च में यह पाया गया है कि शराब का सेवन करने वाले लोगों में अल्जाइमर होने का खतरा बढ़ जाता है।
अल्जाइमर्स रोगियों की स्मृति को बेहतर करते हुए, संगीत उनकी चिंता और परेशानी को कम करके, मरीज की देखभाल करने वालों को भी लाभ पहुंचा सकता है।