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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 4, 2018 6:23 PM IST
स्ट्रोक की समस्या का सामना कर चुके मरीजों को डिमेंशिया होने की संभावना अधिक रहती है। © Shutterstock
स्ट्रोक की समस्या का सामना कर चुके मरीजों को डिमेंशिया होने की संभावना अधिक रहती है। डिमेंशिया की बीमारी एक तरह से भूलने की बीमारी है जो इंसान की स्मरणशक्ति को प्रभावित करती है। जो लोग स्ट्रोक की समस्या का सामना कर चुके होते हैं उनके दिमाग पर गहरा असर होता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार ज्यादातर मामलों में दिमाग में ब्लड की कमी या ब्लड के फैलने से स्ट्रोक होता है जो न्यूरोलॉजिकल फंक्शन को प्रभावित करता है।
दिमाग में अचानक ब्लड की कमी या दिमाग के अंदर ब्लड के फैलने से स्ट्रोक होता है जिसके कारण दिमाग के काम करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। डेमेंशिया की बीमारी दिमाग की बीमारी है जो इंसान में याददाश्त को कम कर देती है। शराब के सेवन से बढ़ता है स्ट्रोक, डिमेंशिया का खतरा।
स्ट्रोक के लक्षण
किसी इंसान को अपने शरीर के लक्षणों से बीमारियों से पहले ही उससे सतर्क हो जाना चाहिए। स्ट्रोक के भी कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जो कुछ दिन पहले ही दिखाई देने लगते हैं। स्ट्रोक के कुछ सामन्य लक्षण है जिसका अगर ध्यान रखा जाय तो इससे बचा जा सकता है। बिना किसी सर्जरी के डिमेंशिया का हो सकता है इलाज, जानें फैक्ट्स।
स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करना चाहिए ?