Stroke in Youth : युवाओं में स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि, इलाज में देरी से जा सकती है जान

25 साल के युवाओं के बीच स्ट्रोक के मामलों में हो रही है लगातार वृद्धि। जानें, स्ट्रोक के कारण, लक्षण और इलाज का तरीका।

WrittenBy

Written By: Anshumala | Published : November 23, 2019 4:54 PM IST

युवा आबादी के बीच स्ट्रोक (Stroke in Youth) के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और इसी के साथ इस समस्या की रोकथाम करना एक बड़ी जरूरत बन गई है। स्ट्रोक के लक्षणों और इसकी रोकथाम के तरीकों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्ट्रोक एंड न्यूरोवैस्कुलर इंटरवेंशन फाउंडेशन ने एक इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन किया। हमारे देश में स्ट्रोक (Stroke in Youth)  यूनिट और न्यूरोइंटरवेंशनिस्ट की कमी के कारण लोगों को एडवांस इलाज के बारे में कुछ अधिक जानकारी नहीं है इसलिए उन्हें जागरूक करना बहुत जरूरी है, ताकि स्ट्रोक को एक महामारी बनने से रोका जा सके।

स्ट्रोक एंड न्यूरोवैस्कुलर इंटरवेंशन फाउंडेशन, स्ट्रोक मैनेजमेंट में हालिया प्रगति के बारे में चर्चा के लिए सालों से ट्रेनिंग कार्यक्रमों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंसों का आयोजन करता आ रहा है। भारत में, इस प्रकार के बहुत ही कम कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो विशेष तौर पर स्ट्रोक की रोकथाम के लिए नए विकल्पों पर केंद्रित होते हैं।

25 साल के युवाओं के बीच स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि

कई रिसर्च और अध्ययनों से अनुसार, 25 साल के युवाओं के बीच स्ट्रोक के मामलों में अचानक वृद्धि (Stroke in Youth) देखी गई है। विकसित देशों की तुलना में विकासशील देशों जैसे कि भारत की युवा आबादी (25 से 40 की उम्र वाले) में स्ट्रोक की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। स्ट्रोक इंडिया 2018 की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल स्ट्रोक के सभी मरीजों में 20 फीसदी मरीजों की उम्र 40 से कम थी, जिससे यह साफ पता चलता है कि युवा आबादी में स्ट्रोक मृत्यु दर का तीसरा सबसे बड़ा कारण और बीमारी की दर का चौथा सबसे बड़ा कारण है।

Brain Stroke : क्या है ब्रेन स्ट्रोक, इसके कारण, लक्षण और उपचार

स्ट्रोक के कारण और लक्षण

स्ट्रोक एंड न्यूरोवैस्कुलर इंटरवेंशन फाउंडेशन के न्यूरोइंटरवेंशन विभाग के निदेशक, डॉ. विपुल गुप्ता ने बताया कि पहले के समय में स्ट्रोक को वरिष्ठ आबादी की बीमारी समझा जाता था, लेकिन यह मिथ धीरे-धीरे टूटता जा रहा है। आज स्ट्रोक के मीरजों में 40 साल से कम उम्र के मरीज ज्यादा देखने को मिलते हैं। अनुवांशिक और पारिवारिक कारण के अलावा, खराब डाइट और लाइफस्टाइल इस बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक हैं। चूंकि, इस समस्या के लक्षणों के बारे में जागरूकता बढ़ाने से शुरुआती निदान के साथ इलाज से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है, लेकिन लोगों को स्ट्रोक की रोकथाम के विभिन्न तरीकों के बारे में भी पता होना चाहिए। एक हेल्दी और संतुलित डाइट की मदद से स्ट्रोक के जोखिम को 80% तक कम किया जा सकता है।”

हेल्दी लाइफस्टाइल से पा सकते हैं स्ट्रोक पर काबू

हेल्दी लाइफस्टाइल और खान-पान की सही आदतों के साथ स्ट्रोक पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। युवाओं को एक हेल्दी डाइट के साथ नियमित एक्सरसाइज पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा उन्हें धूम्रपान बंद कर देना चाहिए और शराब का कम से कम सेवन करना चाहिए।

डॉक्टर विपुल गुप्ता ने आगे बताया कि “स्ट्रोक के लक्षणों और शुरुआती निदान की महत्ता के बारे में जागरूकता को अधिक से अधिक महत्व देना चाहिए। स्ट्रोक के इलाज के लिए पहले 6 से 24 घंटों का समय जरूरी होता है। 24 घंटों के अंदर इलाज करने से समस्या से निजात पाया जा सकता है। पिछले 5 सालों में, स्ट्रोक के इलाज में एक बड़ा बदलाव आया है। एडवांस ट्रीटमेंट के साथ, आज के आधुनिक उपकरण न सिर्फ क्लॉट को निकालने में सक्षम हैं, बल्कि स्ट्रोक का सफल इलाज करने में भी सक्षम हैं। यही वजह है कि लोगों को इलाज में आई प्रगति के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। इलाज में देरी करने से एक-तिहाई मरीज हमेशा के लिए पैरालाइज्ड हो सकते हैं और 25 फीसदी मरीजों की एक साल के अंतराल में मृत्यु हो सकती है।”

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source