
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : June 26, 2022 2:52 PM IST
प्राचीन समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई प्रकार की सभ्यताएं हुआ करती थी। उनका रहन-सहन, खान-पान और जीवन जीने के सामान्य तरीके एक दूसरे से अलग हुआ करते थे। ठीक ऐसी ही प्रकार इन सभ्यताओं में रोगों का इलाज करने का तरीका भी अलग-अलग हुआ करता था। आज भी ऐसी कई प्राचीन चिकित्सा प्रणालियां हैं, जिनका इस्तेमाल कई बीमारियों का इलाज करने के लिए किया जाता है और वे हमारे जीवन में मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम के जैसा ही प्रभाव रखती हैं। आयुर्वेद, यूनानी व होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों के बारे में तो पूरी दुनिया जानती हैं और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके संस्थान खुले हुए हैं। लेकिन कुछ ऐसी चिकित्सा प्रणालियां ऐसी भी हैं, जो इनके जितनी ही प्रभावी हैं लेकिन एक सीमित ही सीमा में लोग इसके बारे में जानते हैं और इनका लाभ ले पाते हैं। सोवा रिग्पा और सिद्ध जैसी कई चिकित्सा पद्धति हैं, जो एक प्रभावी प्राचीन चिकित्सा प्रणालियां हैं लेकिन दुर्भाग्य से कुछ लोगों के इनके बारे में समय रहते पता नहीं चल पाता है। इस लेख में हम सोवा-रिग्पा और उससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले हैं।
सोवा रिग्पा को एक तिब्बती चिकित्सा प्रणाली माना गया है, लेकिन इसके तार भूटान, मंगोलिया, चीन और भारत जैसे देशों के हिमालयी क्षेत्रों से भी जुड़े हैं। हालांकि, जानकारी अभी भी इसके बारे में सटीक जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार सोवा रिग्पा का जन्म 8वीं शताब्दी हिमालय के क्षेत्रों में हुआ था और वहीं कुछ जानकार मानते हैं कि यह लगभग 2500 वर्ष पुरानी चिकित्सा है।
सोवा रिग्पा की प्रैक्टिस करने वाले लोगों के अनुसार सोवा-रिग्पा कई बीमारियों का जड़ से इलाज करने की क्षमता रखती है। वहीं इसके बारे में यह भी कहा जाता है कि जिन रोगों का इलाज मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम में संभव नहीं हैं, वह सोवा रिग्पा की मदद से किया जा सकता है।
सोवा रिग्पा के बारे में कहा जाता है कि इसमें रोगों का जड़ से इलाज किया जा सकता है। इस चिकित्सा पद्धति में इलाज जंग-वा-न्गा और न्गेपा-सुम के सिद्धांतों पर किया जाता है। इसके पंचमहाभूत और त्रिदोष रोगों को जड़ से खत्म करने में मदद करते हैं। एलोपैथी की तरह इसमें भी रोग से पहले उसका निदान (डायग्रोनस) किया जाता है। निदान प्रक्रिया में रोग के प्रकार और कारण का पता लगाया जाता है और उचित इलाज की प्रक्रिया को निर्धारित किया जाता है।
वैसे तो भारत व चीन समेत कई ऐसे देश हैं, जो दावा करते हैं कि सोवा-रिग्पा का जन्म उनके यहां हुआ है। लेकिन भारत और आयुर्वेद के साथ सोवा-रिग्पा का एक विशेष रिश्ता जुड़ा हुआ है। इस तिब्बती चिकित्सा प्रणाली के कई सिद्धांत व अभ्यास तरीके आयुर्वेद से मिलते-जुलते हैं। इतना ही कुछ लोगों का मानना है कि इसकी कुछ प्रैक्टिस आयुर्वेद से ही ली गई हैँ। भगवान बुद्ध की मदद से सोवा रिग्पा में भारत का महत्व रहा है। जब बुद्ध भारत से तिब्बत गए थे तो उस समय वहां पर आयुर्वेद और सोवा रिग्पा का प्रचलन काफी तेज हो गया था।