
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : December 9, 2024 5:25 PM IST
आयुर्वेद व उसके गुणों के बारे में तो बहुत से लोग जानते हैं, लेकिन सिद्ध चिकित्सा के बारे में आज भी लोगों को बहुत कम जानकारी है। आयुर्वेद से सिद्ध चिकित्सा कई साल पुरानी है। सिद्ध चिकित्सा व आयुर्वेद दोनों ही प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियां हैं, लेकिन सिद्ध चिकित्सा का इतिहास आयुर्वेद से कहीं अधिक पुराना माना जाता है। सिद्ध चिकित्सा मुख्य रूप से द्रव्य, योग, प्राणायाम व आध्यात्मिक साधनाओं का उपयोग करती है, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है। लेकिन जरूरी है कि पहले आप इसे समझें। बहुत ही कम लोगों को सिद्ध चिकित्सा के बारे में जानकारी नहीं हैं और इसलिए वे इसके लाभों को उठा नहीं पाते हैं। इस लेख में हम आपको सिद्ध चिकित्सा व उससे मिलने वाले कुछ फायदों के बारे में खा जानकारी देने वाले हैं, जो इस प्रकार से हो सकते हैं।
सिद्ध चिकित्सा एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है, जो हजारों साल पुरानी है और इसका उद्देश्य बीमारियों का जड़ से इलाज करना है। यह पद्धति मुख्य रूप से जड़ी-बूटियां, आध्यात्मिक उपचार, योग, और प्राकृतिक चिकित्सा का उपयोग करती है। सिद्ध चिकित्सा में शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाती है, जिससे समग्र स्वास्थ्य सुधरता है। यह आयुर्वेद के समान कार्य करती है, लेकिन इसमें विशेष रूप से प्राकृतिक शक्तियों और साधनाओं का उपयोग किया जाता है। वैसे सिद्ध चिकित्सा का संबंध तमिलनाडु और द्रविड़ियन परंपरा से है और यह पद्धति उन सिद्ध महर्षियों द्वारा विकसित की गई थी, जिन्होंने ध्यान और साधना के माध्यम से जीवन के रहस्यों को समझा और चिकित्सा के सूत्रों को खोजा। सिद्ध चिकित्सा में द्रव्य (जड़ी-बूटियां), मणि, रत्न, और धातु का उपयोग कर शरीर और मन के विकारों का इलाज किया जाता है।
सिद्ध चिकित्सा का राज इसके सटीक और सघन उपचार प्रक्रिया में है, जो न केवल लक्षणों को ठीक करती है, बल्कि रोग के मूल कारण को भी समाप्त करती है। यह आयुर्वेद के समान शरीर में दोषों के संतुलन पर जोर देती है, लेकिन इसमें जड़ी-बूटियां और मंत्रों का विशेष महत्व है। अब बात करें कि सिद्ध चिकित्सा आयुर्वेद से क्यों पिछड़ गई। इसके पीछे कई कारण हैं हो सकते हैं, जैसे
आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां, जैसे एलोपैथी और आयुर्वेद ने नए शोध और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया, जिससे उनकी प्रभावशीलता और प्रचार बढ़ा। सिद्ध चिकित्सा को व्यापक रूप से स्थापित करने के लिए इस तरह के संसाधनों की कमी रही।
सिद्ध चिकित्सा का ज्ञान मुख्य रूप से गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित था और यह धीरे-धीरे लुप्त हो गया। इसके विपरीत, आयुर्वेद ने लिखित रूप में अपने सिद्धांतों को संग्रहित किया, जिससे उसे अधिक प्रचार मिला।
आयुर्वेद को सरकार और समाज से अधिक समर्थन मिला, जबकि सिद्ध चिकित्सा को उतनी प्रमुखता नहीं मिली। इस प्रकार, सिद्ध चिकित्सा की प्राचीन और प्रभावशीलता के बावजूद, यह आयुर्वेद के मुकाबले कम लोकप्रिय हुई, लेकिन इसके उपचार के तरीके आज भी एक महत्वपूर्ण विकल्प बने हुए हैं।