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शिंगल्‍स हो सकता है दर्दनाक, इस चर्म रोग से पाना है छुटकारा तो जरूर आजमाएं ये घरेलू उपाय

शिंगल्‍स बीमारी में शरीर में दर्दनाक फफोले हो जाते हैं, जिससे पीछा छुड़ाना आसान नहीं होता है। इस समस्‍या का समय पर इलाज नहीं किया गया, तो संपर्क में आने वाला व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है।

Written By Editorial Team
Published : December 27, 2018 11:59 AM IST

घरेलू उपचार से भी किया जा सकता है शिंगल्‍स का इलाज। © Shutterstock.

शिंगल्‍स एक प्रकार का चर्म रोग है। जिन लोगों की इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होती है या बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। कई बार यह तनाव, चोट, कुछ दवाओं के रिऐक्शन या फिर अन्य कारणों से भी हो सकता है। दरअसल, नर्व रुट्स में छिपे वैरिसेला-जोस्टर वायरस के फिर से सक्रिय हो जाने की वजह से होता है। वैरिसेला जोस्टर एक प्रकार का हर्पिस वायरस है, जिससे चिकनपॉक्स (चेचक) भी होता है। अक्सर चिकनपॉक्स के बाद शरीर में ये वायरस नर्व रुट्स में छिपे रह जाते हैं, तो कुछ लोगों में यह दोबारा सक्रिय हो जाते हैं। इसी से शिंगल्स रोग होता है। इस बीमारी में शरीर में दर्दनाक फफोले होते हैं, जिससे पीछा छुड़ाना आसान नहीं होता है। इस समस्‍या का समय पर इलाज नहीं किया गया, तो संपर्क में आने वाला व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है।

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घरेलू उपचार से भी किया जा सकता है इलाज

टी ट्री ऑयल और गुड़हल

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टीट्री ऑयल शिंगल्‍स के दर्द (विशेष रूप से तंत्रिका दर्द) को दूर करने का सबसे प्रभावी उपाय है। इसमें मौजूद एंटी-फंगल और एंटी-सेप्टिक गुणों के कारण यह बहुत अच्‍छे से इलाज करता है। समस्‍या होने पर आई ड्रॉपर की मदद से कुछ बूंदों को संक्रमित त्‍वचा पर लगा लें। इसके अलावा गुड़हल भी शिंगल्‍स के दर्द से राहत दिलाने वाला सबसे सस्‍ता और आसानी से मिलने वाला घरेलू उपाय है। गुड़हल के फूल की पंखुडि़यों का पेस्‍ट बनाकर प्रभावित हिस्‍से पर लगाने से आराम मिलता है।

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लेमन बाम और एप्‍पल साइडर सिरका

लेमन बाम रोजमैरिनिक, कर्फिंक और फेरुलिक एसिड जैसे यौगिक इस जड़ी-बूटी को शानदार एंटी-वायरल गुण प्रदान करते हैं। यह शिंगल्‍स के कारण होने वाले त्‍वचा के घावों पर बहुत अच्‍छी तरह से काम करता है। समस्‍या होने पर इसकी लिक्विड बूंदों को दिन में 3-4 बार प्रभावित त्‍वचा पर लगायें। एप्‍पल साइडर सिरका शिंगल्‍स के लिए एक और बहुत अच्‍छा घरेलू उपाय है। यह प्रकृति से एंटी-वायरल होता है और दर्द और परेशानी दूर करने में मदद करता है। समस्‍या होने पर 3.5 लीटर पानी में एक कप एप्‍पल साइडर सिरका मिला लें। फिर एक साफ कपड़े को इसमें भिगोकर प्रभावित त्‍वचा पर लगायें। साथ ही आंतरिक लाभ पाने के लिए एप्‍पल साइडर सिरके का सेवन भी करें। इसके लिए दो चम्‍मच सिरके को एक चम्‍मच मुनका शहद को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर खाने से 20 मिनट पहले दिन मे तीन बार लें।

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विटामिन सी और शहद

विटामिन सी आपके इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत बनाने और शिंगल्‍स वायरस के खिलाफ लड़ने में मदद कर सकते हैं। अध्ययन के अनुसार, एस्कॉर्बिक एसिड या विटामिन सी भी शिंगल्‍स के कारण होने वाले दर्द को कम करने में सहायक होता है। समस्‍या होने पर अपनी दिनचर्या में विटामिन सी युक्‍त आहार को शामिल करें। इसके अलावा शहद भी शिंगल्‍स को दूर करने में बहुत मददगार उपाय है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटीवायरल गुण इसे शिंगल्‍स का इलाज करने में मदद करता है। यह सस्‍ता होने के साथ आसानी से मिलने वाला खाद्य पदार्थ है। आप इसे प्रभावित त्‍वचा पर सीधे तौर पर लगा सकते हैं।

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एलोवेरा और मुलेठी

आप शिंगल्‍स को दूर करने के लिए एलोवेरा का उपयोग कर सकते हैं। इस अद्भुत संयंत्र के अर्क से आप शिंगल्‍स सहित त्‍वचा की कई समस्‍याओं का उपचार कर सकते हैं। अध्‍ययन के अनुसार, एलोवेरा जैल दाद वायरस के कारण होने वाले त्‍वचा घावों के उपचार में प्रभावी तरीके से काम करता है। मुलेठी में मौजूद एंटीवायरल गुणों के कारण भी यह शिंगल्‍स के इलाज के लिए बहुत प्रभावी होती है। आप इसका इस्तेमाल पाउडर या चाय के रूप में कर सकते हैं। पाउडर का पेस्ट बना लें और प्रभावित त्‍वचा पर लगाएं।

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