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भारतीय महिलाओं में हो रहा है समय से पहले मेनोपॉज - रिसर्च

जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन किया जाए तो मेनोपॉज के बाद होने वाली समस्या को कम किया जा सकता है।

Written by akhilesh dwivedi |Published : May 7, 2018 6:28 PM IST

मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) महिला के जीवन में एक कठीन बदलाव होता है। मेनोपॉज किसी भी महिला को एक ऐसे समय में लाकर खड़ा करता है जिसे स्वीकारने के लिए वह मानसिक रूप से तैयार नहीं होती है।

मेनोपॉज विभिन्न जैविक, हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों को भी अपने साथ लेकर आता है। ये बदलाव महिला के जीवन के मायने ही बदलने लगते हैं। मेनोपॉज आमतौर पर 49 से 52 वर्ष की आयु के बीच में होता है।

द इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज द्वारा किए गए एक हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक, लगभग चार प्रतिशत भारतीय महिलाओं को जीवनशैली में अंतर के कारण 29-34 की आयु के बीच मेनोपॉज हो जा रहा है और 35-39 आयु वर्ग में लगभग आठ प्रतिशत महिलाओं को मेनोपॉज हो जा रहा है।

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प्रोफेसर डॉ. जतिन तलवार कहती हैं कि मेनोपॉज के समय महिलाओं में एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है, जो ऑस्टियोब्लास्ट की दक्षता कमजोर करता है। कम एस्ट्रोजन की वजह से हड्डियों में कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है, जिससे हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, जिससे समग्र बोन डेंसिटी में कमी आती है। नतीजतन महिलाओं की हड्डियां पुरुषों की तुलना में जल्दी कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोअर्थराइटिस जैसी ऑर्थोपेडिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

  • कुछ महिलाओं में बहुत जल्द मेनोपॉज होता है, जो जैविक रूप से स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा नहीं है। यह धूम्रपान, थायराइड, कीमोथेरेपी और पेल्विक सर्जरी के कारण भी होता है।
  • शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऑस्टियोअर्थराइटिस की बीमारी अधिक होती है और इसका खतरा मेनोपॉज के बाद कई गुना बढ़ जाता है, भले ही हार्मोन-रिप्लेसमेंट थेरेपी कराई जाए।
  • मेनोपॉज के बारे में सतर्क रहकर इस शोध की जानकारियों को ध्यान में रखकर अगर जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन किया जाए तो मेनोपॉज के बाद होने वाली समस्या को कम किया जा सकता है।

स्रोत:ANI

चित्रस्रोत:Shutterstock.

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