सिजोफ्रेनिया में इंसान खुद की पहचान भी भूल जाता है

इस बीमारी की वजह का ठीक से पता नहीं चल पाया है इस वजह से इलाज पूरी तरह संभव नहीं है। लेकिन शैनन वीकर्ट की ये खोज साजोफ्रेनिया के बीमारों के लिए नए रास्ते खोल सकती है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 20, 2018 6:40 PM IST

सिजोफ्रेनिया दुनिया की ऐसी बीमारी है जिसके कारण के बारे में अभी तक कुछ खास पता नहीं चल सका है। अगर पूरे विश्व की बात करें तो इससे प्रभावित लोगों की संख्या भी काफी है। यह एक गंभीर मानसिक बीमारी के तौर पर जाना जाता है। यह इंसान की सोच और अनुभव पर प्रभाव दिखाती है। इसकी वजह से इंसान का व्यवहार बदल जाता है। सिजोफ्रेनिया की बीमारी में लोगों की सोचने-समक्षने की क्षमता खत्म हो जाती है। यह भी कहा जाता है कि इंसान खुद को भूल सा जाता है। हाल ही में आस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर और रिसर्च करने वाली शैनन वीकर्ट ने इस धारणा को चुनौती दी थी कि प्रतिरक्षा कोशिकाएं मनोविकार के दौरान मस्तिष्क से स्वतंत्र रहती हैं और उन्होंने कहा है कि मानव की प्रतिरक्षा कोशिकाओं में विकार की वजह से सिजोफ्रेनिया की बीमारी हो सकती है।

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इस शोध की वजह से इस बात की उम्मीद जगी है कि इसके इलाज के लिए भी कुछ रास्ते खुलेंगे। इस बीमारी की वजह से एक अच्छा भला इंसान खुद को भूल जाता है। आइए जानते हैं सिजोफ्रेनिया के लक्षण और उपचार के बारे में।

सिजोफ्रेनिया के लक्षण

  • इस बीमारी में लोगों को अक्सर ऐसे विचार आते हैं जो कि सच नहीं होते. व्यक्ति को हलूसिनेशन हो जाता है।
  • सिजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति को ध्यान लगाने और बोलने में परेशानी होती है।
  • ऐसे व्यक्ति अजीबो–गरीब व्यवहार करते हैं।
  • सिजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति डर के साए में जीता है।

सिजोफ्रेनिया का उपचार

  • क्योकि अभी तक इस बीमारी की वजह का ठीक से पता नहीं चल पाया है इस वजह से इलाज पूरी तरह संभव नहीं है. लेकिन शैनन वीकर्ट की ये खोज साजोफ्रेनिया के बीमारों के लिए नए रास्ते खोल सकती है।
  • वर्तमान में सिजोफ्रेनिया पर शोध तीन मस्तिष्क कोशिकाओं, जिसमें न्यूरॉन्स, ग्लियल कोशिकाएं जो न्यूरॉन्स का समर्थन करती हैं और एंडोथेलियल कोशिकाएं जो रक्त धमनियां पर परत चढ़ाती हैं, की स्थिति पर केंद्रित है. शैनन और उनकी टीम ने हालांकि नई आणविक तकनीक के इस्तेमाल और चौथी कोशिका मैक्रोफेज की उपस्थिति की पहचान की, जो सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों के मस्तिष्क के ऊतकों में प्रतिरक्षा कोशिका है और यह सूजन के उच्च स्तर प्रदर्शित करती है।
  • शैनन ने कहा, "यह निष्कर्ष चिकित्सा के नए रास्ते खोलता है, क्योंकि यह बताता है कि सिजोफ्रेनिया होने की वजह प्रतिरक्षा कोशिकाओं के अंदर छिपी है और प्रतिरक्षा कोशिकाएं सिजोफ्रेनिया के लक्षणों में योगदान दे सकती हैं." यह शोध 'मॉलीकुलर साइक्रियाट्री' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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