Advertisement

वर्ल्ड ऑटोइम्यून अर्थराइटिस डे 2019 : रूमेटाइड अर्थराइटिस क्या है ? जानें इसके कारण, लक्षण, प्रकार और इलाज

रूमेटाइड गठिया एक ऑटोइम्यून रोग है, जिसमें इम्यून सिस्टम शरीर के सेल्स पर हमला करती है। © Shutterstock.

रूमेटाइड अर्थराइटिस किसी भी उम्र-समूह में होने वाला एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। रूमेटाइड गठिया के कारण जोड़ों में सूजन होती है, जो जोड़ों में दर्द और कठोरता का कारण बनता है। इसमें इम्यून सिस्टम शरीर के सेल्स पर हमला करती है।

रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जो जोड़ों के ऊतक में सूजन के कारण होती है। इससे जोड़ों में विकृति और चलने में कठिनाई होती है। रूमेटाइड अर्थराइटिस और ऑस्टियोअर्थराइटिस में अंतर होता है। ऑस्टियोअर्थराइटिस जोड़ों का एक नॉन-इंफ्लेमेटरी रोग है, जो जोड़ों में कार्टिलेज के पतले या अनुपस्थिति के कारण होता है। रूमेटाइड अर्थराइटिस किसी भी उम्र-समूह में होने वाला एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। ऑस्टियोअर्थराइटिस वृद्धावस्था या जोड़ों पर अत्यधिक दबाव के कारण होता है।

रूमेटाइड अर्थराइटिस 

रूमेटाइड अर्थराइटिस, अर्थराइटिस का एक अन्य प्रकार है। रूमेटाइड अर्थराइटिस के कारण जोड़ों में सूजन होती है, जो जोड़ों में दर्द और कठोरता का कारण बनता है। यह एक ऑटोइम्यून रोग है, जिसमें इम्यून सिस्टम शरीर के सेल्स और जोड़ों पर हमला करती है। इसमें रोग प्रतिरोधक तंत्र के कुछ सेल्स सही तरीके से काम नहीं कर पाते। इसे नजरंदाज करने से जोड़ों में सूजन और गंभीर क्षति हो सकती है।  इसमें रोग प्रतिरोधक तंत्र के कुछ सेल्स सही तरीके से काम नहीं कर पाते। इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं।

रूमेटाइड अर्थराइटिस का निदान

- इसमें खून की प्रारंभिक जांच के जरिए डॉक्टर रूमेटाइड गठिया कारक, रक्त कोशिकाओं की गिनती व यूरिक एसिड आदि के स्तर से गठिया का पता लगाते हैं।

Also Read

More News

- जोड़ों में किसी भी प्रकार की क्षति के लिए एक्स-रे और एमआरआई भी करवाते हैं।

वर्ल्ड ऑटोइम्यून अर्थराइटिस डे 2019 : ‘ऑटोइम्यून’ और ‘ऑटोइंफ्लेमेटरी’ अर्थराइटिस में अंतर ?

उपचार

इसमें डॉक्टर स्टेरॉइड्स रहित मेडिसिन के जरिए होने वाली जकड़न, सूजन व दर्द को नियंत्रित करते हैं। एंटी-रूमेटिक दवाई की मदद से बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जाता है। यदि रोगी क्षतिग्रस्त जोड़ों की असहनीय दर्द से पीड़ित है, तो उसे ज्वॉइंट्स प्रत्यारोपण की सलाह दी जाती है।

घरेलू उपचार

- यदि आपको यह समस्या है, तो आप नियमित व्यायाम करें। इससे शरीर के विभिन्न जोड़ सक्रिय होते हैं।

- मोटापे से ग्रस्त लोगों में रूमेटाइड गठिया होने की अधिक संभावनाएं होती हैं, क्योंकि मोटे लोगों हड्डियों और जोड़ों पर अधिक तनाव और दबाव पड़ता है।

- इससे आप पौष्टिक आहार के सेवन से बच सकते हैं। कोल्ड पैक और हीट थेरेपी से दर्द से अस्थायी राहत पाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

रूमेटाइड अर्थराइटिस में क्या खाएं

वसा का सेवन करना है, तो सिर्फ पौधे युक्त वसा का ही सेवन करें। ओमेगा-3 फैटी एसिड में खानपान समृद्ध हो। मिर्च और टमाटर का सेवन कम करें। केवल कैस्टर तेल में का यूज करें। नींबू और शहद के साथ अदरक की चाय दर्द में असरदार है। एंटीऑक्सिडेंट्स जैसे विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन ई और सेलेनियम भी सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।

अर्थराइटिस के दर्द से पाना है छुटकारा, तो खाएं ये हर्ब्स

रूमेटाइड अर्थराइटिस के प्रकार

सेरोपॉजिटिव रूमेटाइड गठिया- इसके के रोगी वो होते हैं, जिनके रक्त-परीक्षण के परिणाम में एंटी-सीसीपी की मौजूदगी होती है।

सेरोनेगेटिव रूमेटाइड गठिया-  जिन मरीजों के रक्त में एंटीबॉडी की उपस्थिति के बिना रूमेटाइड गठिया का विकास होता है, उसे सेरोनेगेटिव रूमेटाइड गठिया कहते हैं। सेरोनेगेटिव मरीजों में रूमेटाइड फैक्टर होता है।

जुवेनाइल इडियोपैथिक गठिया - यह एक प्रकार का गठिया है जो 16 या उससे छोटे आयु के बच्चे में जोड़ों में सूजन और कठोरता का कारण बनता है।

क्या है कारण

रूमेटाइड गठिया का कारण अभी तक पता नहीं चला है। हां, वायरस, बैक्टीरिया और फंगस जैसे संक्रामक एजेंट्स पर कई बार संदेह किया गया है लेकिन कोई भी कारण के रूप में सिद्ध नहीं हुआ है। हालांकि, कुछ ट्रिगर कारकों से रूमेटाइड गठिया हो सकता है जैसे मोटापा, आघात या चोट के कारण कार्टिलेज की क्षति और अत्यधिक धूम्रपान आदि।

इन चीजों का अधिक सेवन आपकी हड्डियों को कर सकता है कमजोर

Total Wellness is now just a click away.

Follow us on