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PTSD: बार-बार पुरानी घटनाओं को कर रहे हैं याद? कहीं आप इस मानसिक समस्या के तो नहीं हैं शिकार
Post-traumatic Stress disorder: हर किसी के जीवन में कोई ना कोई ऐसी दुखद घटना घटती है, जिसे उसके लिए भुला पाना मुश्किल होता है। कभी किसी प्रिय व्यक्ति की मौत, तो कभी आर्थिक नुकसान। इस तरह की घटनाओं से व्यक्ति टूट जाता है। हालांकि, इस तरह की घटनाएं कितनी भी दुखद क्यों ना हों, समय के साथ कुछ लोग इन बुरी घटनाओं को भूलकर जिंदगी में आगे बढ़ जाते हैं। वहीं, कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो अपनी जीवन में घटी इन दुखद घटनाओं से जल्दी बाहर नहीं आ पाते। कई महीने उदासी में डूबे रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए सदमे से निकलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। इसी समस्या को 'पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर' (Post-traumatic Stress disorder) कहते हैं। कई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि युद्ध और दंगों से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग इस मनोदशा से अधिक पीड़ित होते हैं। जानें, क्या है पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और इसके लक्षण, कारण और उपचार...
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (Post-traumatic disorder) अक्सर ऐसे लोगों में देखा गया है, जो पहले से ही एंग्जायटी डिसऑर्डर और डिप्रेशन के शिकार होते हैं। ऐसे लोगों के जीवन में जब कोई दुखद घटना घटती है, तो उनके मन पर इसका बुरा असर पड़ता है और वो विचलित हो जाते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि हमारे मस्तिष्क का खास हिस्सा हिप्पोकैंपस है भावनाओं (Emotion) को कंट्रोल करने का काम करता है। जिन लोगों के मस्तिष्क में हिप्पोकैंपस का आकार छोटा होता है, वे पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) के जल्दी शिकार हो सकते हैं। इसके अलावा हिंसक माहौल में पैदा होने वाले बच्चे, यौन उत्पीड़न से पीड़ित बच्चे भी पीटीएसडी के शिकार हो सकते हैं।
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