प्रेगनेंसी में जीका वायरस से रहना है बचकर, तो यूं रखें अपना ख्याल

जीका वायरस के कारण बच्चे का दिमागी विकास ठीक तरह से नहीं होता, जिसे ‘माइक्रोसिफेली’ कहते हैं।

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Written By: Anshumala | Published : July 9, 2018 1:41 PM IST

यदि आप प्रेगनेंट हैं, तो आपको जीका वायरस से खास सावधानी बरतनी होगी। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जीका संक्रमण के कारण प्रेगनेंट महिलाओं को परेशानी हो सकती है। यह गर्भपात होने के साथ ही मृत शिशु के जन्म का कारण बन सकता है। जीका वायरस के कारण बच्चे का दिमागी विकास ठीक तरह से नहीं होता, जिसे ‘माइक्रोसिफेली’ कहते हैं। जीका वायरस एडीज इजिप्टी नाम के मच्छर से फैलता है। यही मच्छर डेंगू, चिकुनगुनिया आदि विषाणुओं को फैलाने के लिए जिम्मेदार होती है।

जीका संक्रमण के लक्षण

मनुष्यों में जीका संक्रमण होने पर बुखार, शरीर में चकत्ते, सिरदर्द, जोड़ों और मांसपेशी में दर्द, और आंखों में लाल रंग आना प्रमुख है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल के अनुसार, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की तरह ही जीका एक बड़ी जन-स्वास्थ्य समस्या है। जीका वायरस से संक्रमित कई लोग खुद को बीमार महसूस नहीं करते। यदि मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है, जिसके खून में वायरस मौजूद हैं, तो यह किसी अन्य व्यक्ति को काटकर वायरस फैला सकता है।

प्रेगनेंट महिलाओं को रखना होगा खास ख्याल

डॉ. अग्रवाल के अनुसार, वायरस संक्रमित महिला के गर्भ में फैल सकता है, जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे में माइक्रोसिफेली और अन्य गंभीर मस्तिष्क रोग हो सकते हैं। जीका वायरस संक्रमण के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है, ऐसे में विशेष रूप से प्रेगनेंट महिलाओं को मच्छरों से भलीभांति अपना बचाव करना चाहिए। यदि प्रेगनेंट महिला जीका वायरस से संक्रमित है, तो नवजात में भी आसानी से यह फैलती है। यह ब्लड ट्रांसफ्यूजन और यौन संबंधों से भी फैलती है। ऐसे में यदि आप प्रेगनेंट हैं और आपका पार्टनर जीका वायरस से संक्रमित है, तो भूलकर भी यौन संबंध ना बनाएं।

zika virus and pregnancy

क्या है माइक्रोसिफेली

माइक्रोसिफेली एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें बच्चे का सिर छोटा रह जाता है और उसके दिमाग का भी पूरा विकास नहीं हो पाता। इससे बच्चों की जान को भी खतरा होता है। इसके प्रकोप से बच जाने वाले बच्चे ताउम्र बुद्धि संबंधी दोषों से जूझते रहेंगे।

प्रेगनेंसी में जीका वायरस के लक्षण

यदि आप प्रेगनेंट हैं और जीका वायरस से संक्रमित हैं, तो आपको तेज बुखार के साथ-साथ शरीर पर लाल रैशेज होंगे। इसे नजरअंदाज न करें। डॉक्टर को जरूर दिखाएं। ब्लड टेस्ट से ही पता चल सकेगा कि आप जीका वायरस से इंफेक्टेड हैं या नहीं।

जीका इंफेक्शन होने पर ब्रेस्टफीडिंग

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, नई माएं अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड करवा सकती हैं, क्योंकि स्तनपान के फायदे जीका के खतरे से कहीं ज्यादा होते हैं। हालांकि, जीका विषाणु ब्रेस्ट मिल्क में पाया गया है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेस्ट मिल्क से शिशुओं के जीका विषाणु से संक्रमित होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। डब्ल्यूएचओ बच्चों को जन्म के छह महीनों तक सिर्फ मां का दूध पिलाने की ही सलाह देता है। फिर भी किसी भी तरह की मन में डर या शंका हो, तो अपने डॉक्टर से इस बारे में राय जरूर ले लें।

बचाव के उपाय

जीका वायरस का कोई इलाज नहीं है। इससे बचने का एकमात्र विकल्‍प इसके जोखिम को कम करना है। यदि आप प्रेगनेंट हैं, तो अपना विशेष ख्याल रखें। खासकर अपने घर के आसपास से मच्छरों को दूर रखें। कीट नाशकों का उपयोग करें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें। शाम के समय खिड़कियों और दरवाजों को बंद रखें। हो सके तो प्रेगनेंसी के दौरान मच्छरदानी में सोएं। ऐसे मच्‍छर रुके हुए पानी में अपने अंडे देते हैं, इसलिए पानी को घर में या घर के आसपास इकट्ठा होने से रोकें। यूएस सेंट्रर ऑफ डिजीज कंट्रोल के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा करने से बचना चाहिए।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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