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Written By: Anshumala | Published : May 22, 2019 8:24 AM IST
गर्भवस्था के दौरान पहली तिमाही में छोटी मात्रा में एस्पिरिन लेने से प्रीक्लेम्पसिया का खतरा कम हो जाता है। © Shutterstock.
कई प्रेग्नेंट महिलाओं को प्रीक्लेम्पसिया का खतरा होता है। लेकिन एक शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि प्रेग्नेंसी के दौरान पहली तिमाही में छोटी मात्रा में एस्पिरिन लेने से प्रीक्लेम्पसिया का खतरा कम हो जाता है। शोध में शुरुआती प्रीक्लम्पसिया की दर में 82 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते में होने वाली उच्च रक्तचाप की समस्या को प्रीक्लेम्पसिया कहते हैं। ये सामान्य तौर पर होने वाले उच्च रक्तचाप से बिल्कुल अलग है जो प्रसव के बाद अपने आप ठीक हो जाता है। लंदन के किंग्स कॉलेज के प्रोफेसर काइरोप्स निकोलेड्स (Kypros Nicolaides) के अनुसार, इस शोध के शुरुआती परिणाम में एस्पिरिन के असर की पुष्टि हुई है।
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निकोलेड्स के अनुसार, "इस अध्ययन को एक निश्चित परिणाम माना जा सकता है। महिलाएं पहली तिमाही में छोटी और निश्चित मात्रा में एस्पिरिन लेकर प्री-टर्म प्रीक्लेम्पसिया के विकास को कम कर सकती हैं।" यह अध्ययन 1,776 महिलाओं पर किया गया है, जिसमें से कुछ महिलाएं प्लेसबो का सेवन कर रही थीं तो कुछ महिलाएं एस्पिरिन का सेवन कर रही थीं। प्लेसबो लेने वाली महिलाओं की तुलना में एस्पिरिन लेने वाली महिलाओं में प्रीक्लेम्पसिया के विकास की कम घटना पाई गई।
36वें सप्ताह तक कुछ महिलाओं को 11 से 14 सप्ताह की गर्भवती महिलाओं को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में एस्पिरिन दिया गया। एस्पिरिन लेने वाली 13 महिलाओं में प्री-टर्म प्रीक्लम्पसिया के लक्षण देखे गए जबकि प्लेसबो लेने वाली समुह में से 35 में प्री-टर्म प्रीक्लम्पसिया लक्षण देखे गए। इस अध्ययन को जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित किया गया था।